अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : बिहार में बाढ़ और सूखे से परेशान मजदूरों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने सभी 38 जिलों में विकास कार्यों पर लगी रोक तत्काल प्रभाव से हटा दी है। अब अकुशल मजदूरों को अपने ही गांव और पंचायत में रोजगार मिल सकेगा। पहले खेती के सीजन को देखते हुए 22 अक्तूबर से 10 दिसंबर 2026 तक निर्माण कार्यों पर रोक (कार्य विराम अवधि) तय की गई थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा और त्योहारों के मौसम को देखते हुए सरकार ने इस आदेश को शिथिल कर दिया है।
इस फैसले से बाढ़ प्रभावित 22 जिलों और कम बारिश से सूखे की चपेट में आए 16 जिलों के लाखों गरीब परिवारों को सीधा फायदा पहुंचेगा। त्योहारों के समय परदेस से घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए भी अपने गांव में ही कमाई का जरिया तैयार रहेगा।
22 जिलों में बाढ़ से टूटी सड़कें, 16 जिलों में बारिश न होने से सूखा
इस साल बिहार के 22 जिले भीषण बाढ़ की चपेट में रहे हैं। अरवल, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, पटना, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, सुपौल और वैशाली में बाढ़ का पानी उतरने के बाद भारी तबाही सामने आई है। इन इलाकों में सड़कें, पुल-पुलिया और तटबंध बुरी तरह टूट चुके हैं।
दूसरी तरफ अररिया, औरंगाबाद, बांका, गयाजी, जमुई, जहानाबाद, कैमूर, किशनगंज, मधुबनी, नालंदा, नवादा, रोहतास, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी और सीवान में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई। सुखाड़ की मार से फसलें चौपट हो गईं, जिसके चलते खेतों में मजदूरों की मांग लगभग खत्म हो गई थी। ऐसे हालात में मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया था।
“बिहार इस बार भीषण आपदा से जूझा है। बाढ़ के चलते सड़कें, पुल-पुलिया, रास्ते और तटबंध बड़े पैमाने पर टूटे हैं। इन ढांचों की तुरंत मरम्मत बेहद जरूरी है ताकि विकास की रफ्तार न थमे और हमारे मजदूरों को सीधे काम मिल सके।”– श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग
टूटी अधोसंरचना का होगा कायाकल्प, मिलेगा 125 दिन का काम
रोक हटने के बाद अब ग्रामीण इलाकों में क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों के जीर्णोद्धार का काम तेजी से शुरू होगा। यह सभी कार्य 1 जुलाई 2026 से लागू ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ (वीबी-जीराम जी) के तहत कराए जाएंगे। इस योजना में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि खर्च करती है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रोक हटाने का दोहरा मकसद है। पहला, बाढ़ से तबाह हुए बुनियादी ढांचे जैसे रास्ते, पुलिया और तटबंधों को दुरुस्त करना। दूसरा, योजना के तहत पंजीकृत मजदूरों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करना। गांव स्तर पर काम शुरू होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और त्योहारों के मौके पर गरीब परिवारों को आर्थिक तंगी से नहीं जूझना पड़ेगा।
इसे भी पढ़ें : बिहार में 88% पेंशनधारियों का सत्यापन पूरा, मंत्री बोलीं- एक भी हकदार न रहें वंचित



