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Patna : खरीफ मौसम 2026-27 में किसानों की गाढ़ी कमाई का एक-एक दाना सुरक्षित खरीदने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। सम्राट सरकार की मंशा है कि राज्य के किसी भी हिस्से में किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत न हो और न ही धान के उठाव या कुटाई में कोई रुकावट आए। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने बड़ा कदम उठाया है और चावल मिलरों के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख को 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 15 नवंबर 2026 कर दिया है। सरकार के इस सकारात्मक फैसले से न सिर्फ बाकी बचे मिलरों को जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने का भरपूर समय मिलेगा, बल्कि धान खरीद की पूरी व्यवस्था और भी मजबूत होगी।
1 नवंबर से शुरू होगी खरीद, समानांतर चलेगी कुटाई की व्यवस्था
राज्य में विकेंद्रीकृत अधिप्राप्ति योजना के तहत 1 नवंबर 2026 से धान खरीद की शुरुआत प्रस्तावित है। सरकार की रणनीति यह है कि पैक्स और व्यापार मंडलों में जैसे-जैसे किसानों से धान की आवक हो, वैसे-वैसे तुरंत उसकी मिलिंग कराकर सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) तैयार कर लिया जाए। इसके लिए जरूरी है कि राज्यभर में अधिक से अधिक आधुनिक और सक्षम राइस मिलें ऑनबोर्ड रहें। रजिस्ट्रेशन की तारीख एक महीना आगे बढ़ाने से अधिक संख्या में मिलर व्यवस्था से जुड़ सकेंगे, जिससे सुदूर इलाकों के किसानों को भी अपनी नजदीकी मिलों का सीधा लाभ मिलेगा।
पारदर्शी व्यवस्था के लिए ई-सहकारी पोर्टल पर सुविधा
विभाग ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए 16 अगस्त से ही ई-सहकारी पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दे रखी है। अब तक 450 चावल मिलर सफलता पूर्वक पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा चुके हैं। चूंकि पिछले साल 868 मिलों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी, इसलिए विभाग चाहता है कि इस बार भी कोई भी पात्र मिलर तकनीकी या समय की कमी के कारण छूट न जाए। तारीख बढ़ने से नए और पुराने दोनों तरह के उद्यमियों को अपना भौतिक सत्यापन कराने और जरूरी मानक पूरे करने का पूरा मौका मिलेगा।
डीएम संभालेंगे कमान, जमीनी स्तर पर तेज होगी मॉनिटरिंग
व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के लिए विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। डीएम खुद अपने स्तर पर मिलरों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि विस्तारित अवधि के भीतर सभी पात्र मिलों का भौतिक सत्यापन और निबंधन प्राथमिकता से पूरा हो। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि 1 नवंबर से जब किसान अपनी फसल लेकर केंद्रों पर पहुंचें, तो पूरी मशीनरी तैयार मिले और खरीद से लेकर मिलिंग तक का सफर पूरी तरह पारदर्शी और निर्बाध रहे।
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