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Ranchi : राजधानी रांची की सड़कों से अभी दुर्गा पूजा के मेले की चहल-पहल पूरी तरह थमी भी नहीं है कि शहर के घाटों और मोहल्लों में आस्था के सबसे बड़े लोकपर्व छठ और मां काली की आराधना की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। नदी-तालाबों के किनारे व्रतियों की सहूलियत कैसी होगी, पानी साफ रहेगा या नहीं, और पंडालों के इर्द-गिर्द रास्ते दुरुस्त होंगे या नहीं, इन्हीं सब चिंताओं और उम्मीदों की पोटली बांधकर पूजा समितियों के प्रतिनिधि रांची नगर निगम दफ्तर पहुंचे। नगर आयुक्त सुशांत गौरव के कक्ष में हुई इस बैठक का माहौल काफी सकारात्मक रहा। आयोजकों ने दिल खोलकर पहले तो दुर्गा पूजा के दौरान निगम के सफाई और रोशनी के बेहतर इंतजामों की पीठ थपथपाई, फिर याद दिलाया कि छठ महापर्व की परीक्षा इससे भी बड़ी है। पिछले बरस की उम्दा तैयारियों का हवाला देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी निगम प्रशासन उसी मुस्तैदी से साथ खड़ा नजर आएगा।

रास्ते सुगम हों और घाट चकाचक, मोहल्लों में बनेंगे कृत्रिम तालाब
समितियों ने शहर के जमीनी हालात को सामने रखते हुए अपनी मांगें रखी। काली पूजा पंडालों तक पहुंचने वाले रास्तों पर जहां-तहां बने गड्ढों और नमी से निपटने के लिए स्टोन डस्ट गिराने की मांग की गई, ताकि देर रात दर्शन को निकलने वाले भक्तों को कीचड़ या ठोकर का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही छठ घाटों के चारों तरफ युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाने, घाटों तक जाने वाली सड़कों और सीढ़ियों पर दूधिया रोशनी का बंदोबस्त करने पर जोर दिया गया। बैठक में एक अहम मुद्दा कृत्रिम घाटों का भी उठा। शहर की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे बड़ा तालाब, चडरी, हटिया या कांके डैम जैसे पारंपरिक घाटों पर बेतहाशा भीड़ उमड़ती है। ऐसे में कई मोहल्लों की कमेटियां खाली मैदानों या पार्कों में खुद से कृत्रिम घाट तैयार करती हैं। प्रतिनिधियों ने नगर आयुक्त से दोटूक कहा कि इन अस्थाई घाटों की खुदाई और समतलीकरण के लिए जेसीबी और उनमें स्वच्छ पानी भरने के लिए निगम के वाटर टैंकरों का वक्त पर पहुंचना बेहद जरूरी है।

हर घाट का बनेगा एक्शन प्लान, जल्द तय होंगी जिम्मेदारियां
आयोजकों की एक-एक बात सुनने के बाद नगर आयुक्त ने साफ किया कि छठ व्रतियों और उनके परिजनों को शहर के किसी भी कोने में रत्ती भर भी दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मशीनरी से लेकर मैनपावर तक, निगम अपनी पूरी ताकत झोंक देगा। तैयारियों को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने के लिए बहुत जल्द सभी पूजा समितियों के साथ एक साझा समन्वय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक का मकसद हर इलाके की खास जरूरतों को समझना होगा। किस घाट पर चेंजिंग रूम की कमी है, कहां बैरिकेडिंग चाहिए, कहां बिजली के खंभों पर अतिरिक्त लाइट लगनी है और कहां कृत्रिम तालाबों के लिए पानी की सप्लाई देनी है, इन सब पर आमने-सामने बैठकर तुरंत फैसले लिए जाएंगे। निगम का पूरा जोर इस बात पर है कि आस्था का यह महापर्व बिना किसी अव्यवस्था के, पूरी पवित्रता और स्वच्छता के साथ संपन्न हो।
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