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News Samvad: हिंदी पंचांग के आठवें महीने कार्तिक की शुरुआत 27 अक्टूबर, मंगलवार से हो गई है। हिंदू धर्म में कार्तिक महीने को बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, कार्तिक महीने में श्रद्धा और नियम से पूजा-पाठ करने वाले लोगों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है।
कार्तिक महीने की शुरुआत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हुई है। पंचांग के मुताबिक, प्रतिपदा तिथि 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे शुरू हुई थी और 27 अक्टूबर को सुबह 7:01 बजे तक रही। उदयातिथि के अनुसार, 27 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि मानी गई है। इस दिन सिद्धि योग में कार्तिक महीने का शुभारंभ हुआ। वहीं, दोपहर 3:39 बजे से त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना।
धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक महीने में स्नान और दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान पवित्र नदी या तीर्थस्थल में स्नान करना विशेष फलदायी माना गया है। हालांकि, हर दिन किसी तीर्थस्थल पर पहुंचना संभव नहीं होता। ऐसे में महीने की कुछ खास तिथियों पर स्नान और दान करके भी धार्मिक परंपरा का पालन किया जा सकता है।
कार्तिक महीने में इन 5 तिथियों पर स्नान का विशेष महत्व
शास्त्रों में कार्तिक महीने के दौरान नदी, तालाब या अन्य पवित्र जल में स्नान करने की परंपरा बताई गई है। इस महीने में रमा एकादशी, रूप चतुर्दशी, कार्तिक अमावस्या, देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा के स्नान को विशेष महत्व दिया जाता है। रमा एकादशी का स्नान 5 नवंबर को: कार्तिक कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी का व्रत और स्नान 5 नवंबर, गुरुवार को होगा। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11:03 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है।
रूप चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान 7 नवंबर को: रूप चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इसमें शरीर पर तिल का तेल और उबटन लगाकर स्नान किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर और मन की शुद्धि होती है। इस वर्ष रूप चतुर्दशी 7 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे से शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे तक रहेगी।
कार्तिक अमावस्या का स्नान 9 नवंबर को: कार्तिक अमावस्या का स्नान 9 नवंबर, सोमवार को होगा। इस बार सोमवार को अमावस्या पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या पर स्नान और दान करने से पुण्य मिलता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और जरूरतमंदों को दान देने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
देवउठनी एकादशी का स्नान 20 नवंबर को: देवउठनी एकादशी 20 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन से चातुर्मास का समापन माना जाता है और भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने की धार्मिक परंपरा जुड़ी है। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 20 नवंबर को सुबह 7:15 बजे शुरू होकर 21 नवंबर को सुबह 6:31 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और दान करना शुभ माना जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा का स्नान 24 नवंबर को: कार्तिक महीने का सबसे महत्वपूर्ण स्नान कार्तिक पूर्णिमा पर माना जाता है। इस वर्ष यह स्नान 24 नवंबर, मंगलवार को होगा। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर को रात 11:42 बजे शुरू होकर 24 नवंबर को रात 8:23 बजे तक रहेगी। इस दिन पुष्कर में स्नान का विशेष महत्व है। वहीं, वाराणसी यानी काशी में देव दीपावली मनाई जाती है। इस अवसर पर गंगा घाटों पर दीप जलाए जाते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान तथा पूजा-अर्चना करते हैं।
कार्तिक महीने में किन चीजों का दान करना चाहिए?
कार्तिक महीने में स्नान के साथ दान को भी महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। ठंड के मौसम को देखते हुए गर्म कपड़े, कंबल और शॉल का दान उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा नए वस्त्र, तिल, गुड़, चावल, गेहूं, जौ, बाजरा, आंवला, शुद्ध देसी घी, दूध, दही, तुलसी का पौधा और जल से भरा तांबे का पात्र भी दान किया जा सकता है। दान करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही वस्तुएं दान करें। दान का उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी श्रद्धा के अनुसार धार्मिक परंपरा का पालन करना है।
स्नान के बाद इस तरह करें दान का संकल्प
धार्मिक परंपरा के अनुसार, स्नान करने के बाद दान देने से पहले संकल्प किया जाता है। इसके लिए हाथ में अक्षत यानी साबुत चावल, फूल और जल लेकर दान करने का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अनाज या अन्य जरूरी सामान किसी ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को दान किया जाता है। कार्तिक महीने में स्नान और दान करते समय स्वच्छता, श्रद्धा और सेवा भाव का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, दीपदान और जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।



