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Patna : किसी घर में जब नशा कदम रखता है, तो सिर्फ एक इंसान बीमार नहीं होता, पूरा परिवार अंदर तक टूट जाता है। किसी मां के सपने बिखरते हैं, तो किसी बहन की पढ़ाई छूट जाती है और पूरा घर एक अनजाने खौफ में जीने लगता है। बिहार के अनगिनत आंगनों में नशे के इसी धीमे जहर ने कई होनहार जिंदगियां छीनी हैं। इसी दर्द को समझते हुए और आने वाली पीढ़ी को एक महफूज कल देने के लिए सीएम सम्राट चौधरी ने एक बेहद भावुक और ठोस पहल की शुरुआत की है। राजधानी पटना के अधिवेशन भवन में उन्होंने ‘नशामुक्त बिहार अभियान’ का आगाज कर यह भरोसा दिलाया कि सरकार अब नशे की इस लड़ाई में हर पीड़ित परिवार के साथ ढाल बनकर खड़ी है। 27 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 तक चलने वाला यह एक महीने का अभियान लाखों घरों के बुझते चिरागों को बचाने की एक संवेदनशील कोशिश है।

जब मां-बहनों के आंसुओं को मिला मजबूत सहारा
कार्यक्रम के मंच से बोलते हुए सीएम सम्राट चौधरी की संवेदनशीलता साफ झलक रही थी। उन्होंने इस जमीनी सच्चाई को खुलकर स्वीकार किया कि नशे की सबसे भयानक और खामोश मार घर की महिलाओं पर पड़ती है। जब बेटा, भाई या पति नशे की गिरफ्त में आता है, तो औरतें तिल-तिल कर अंदर से मरती हैं। वे समाज के ताने भी सहती हैं और घर के भीतर आर्थिक तंगी व हिंसा की शिकार भी होती हैं। इसी दर्द को समझते हुए सम्राट चौधरी ने इस सामाजिक बुराई से लड़ने के लिए बिहार की सबसे बड़ी और संगठित ताकत, यानी राज्य की 1.81 करोड़ जीविका दीदियों और बहनों पर अपना सबसे अटूट भरोसा जताया है।
सीएम सम्राट चौधरी ने बहुत साफ शब्दों में कहा कि कोई भी सरकारी कानून या पुलिस की सख्ती तब तक पूरी तरह कामयाब नहीं हो सकती, जब तक कि घर की चौखट और चूल्हे के पास से इस बुराई के खिलाफ आवाज न उठे। महिलाओं के इसी आंसुओं को हौसले में बदलने के लिए सम्राट चौधरी ने पूरे राज्य में जनजागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये प्रचार गाड़ियां सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि सुदूर देहातों, टोले-मोहल्लों और चौपालों तक पहुंचेंगी।

वहां नुक्कड़ नाटकों और भावनात्मक लघु फिल्मों के माध्यम से लोगों को यह आईना दिखाया जाएगा कि नशा किस तरह एक हंसते-खेलते घर को बर्बादी के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देता है। इसके साथ ही एक आधुनिक व्हाट्सऐप चैटबोट और आपातकालीन हेल्पलाइन की भी शुरुआत की गई है। इस पहल का सबसे बड़ा मकसद यह है कि जो परिवार या युवा इस दलदल से बाहर निकलना चाहते हैं, वे समाज के डर या शर्म के बिना सीधे सरकार से मदद मांग सकें और उनका सही इलाज व काउंसलिंग कराई जा सके।
युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए कड़े कदम
सीएम सम्राट चौधरी की कार्यशैली की सबसे बड़ी ताकत उनका युवाओं के प्रति संवेदनशील और व्यावहारिक नजरिया है। वे इस कड़वी हकीकत को बखूबी समझते हैं कि आज के दौर में शराबबंदी के बावजूद सूखे नशे का एक बहुत बड़ा जाल हमारे युवाओं को चुपके से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। चरस, हेरोइन और अफीम जैसी खतरनाक चीजें स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के आसपास अपना जहर फैला रही हैं। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ इन आंकड़ों की गंभीरता को समझा, बल्कि एक सख्त अभिभावक की तरह इन तस्करों पर कड़ा प्रहार करने की खुली छूट भी पुलिस को दे दी है।

राज्य के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। साल 2024 में जहां 282 किलो चरस बरामद हुई थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 400 किलो तक पहुंच गया। इसी तरह हेरोइन की जब्ती 42 किलोग्राम से बढ़कर 65 किलो हो गई और 77 किलो अफीम भी पकड़ी गई। मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों पर गहरा दुख और चिंता जताते हुए कहा कि वे बिहार के किसी भी बेटे या बेटी का सुनहरा भविष्य इन लालची तस्करों के हाथों तबाह नहीं होने देंगे।
नशीले पदार्थों के खिलाफ दर्ज होने वाले मुकदमों में 20 गुना से ज्यादा की तेजी आई है और करीब 1700 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इन मुकदमों में अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए कई जिलों में विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि नशे के इन सौदागरों के पूरे नेटवर्क को पाताल से भी खोजकर ध्वस्त किया जाए और इसमें किसी भी तरह की सिफारिश या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शराबबंदी के फैसले और केंद्र के सहयोग का जिक्र
सम्राट चौधरी का यह रूप यह बता गया कि वे केवल फाइलों पर दस्तखत करने वाले या कुर्सी से योजनाएं चलाने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि वे जमीन की धूल और आम जनता के दर्द से गहराई से जुड़े जननेता हैं। उन्होंने साल 2016 के दौर को याद करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस ऐतिहासिक और साहसिक फैसले की दिल खोलकर तारीफ की, जब लगभग 50 से 55 हजार करोड़ रुपये के छोटे बजट के बावजूद राजस्व के नुकसान की परवाह किए बिना जनहित में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 तक देश को पूरी तरह नशामुक्त करने के राष्ट्रीय संकल्प को बिहार की धरती पर पूरी ताकत से साकार करने का संकल्प दोहराया।
छात्रों और युवाओं के प्रति उनकी आत्मीयता का प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि उन्होंने विद्यार्थी सहयोग शिविर के जरिए आए 1755 आवेदनों में से 1650 का तुरंत निपटारा करवाया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक राज्य के नौजवानों को इंसाफ और सही दिशा नहीं मिलेगी, तब तक बिहार की तरक्की का सपना अधूरा रहेगा।

समारोह के अंत में सीएम ने खुद खड़े होकर सभी अधिकारियों, जीविका दीदियों और आम नागरिकों को नशा न करने और अपने समाज को नशे से बचाने की भावुक शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी प्रीता वर्मा, मद्य निषेध विभाग के एडीजी रत्न संजय, सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के सचिव नवीन कुमार, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, उत्पाद आयुक्त दिव्या शक्ति, निबंधन विभाग के आईजी कृष्ण चंद्र गुप्ता, ब्रह्माकुमारीज की राजयोगिनी संगीता देवी, डीएम कुंदन कुमार, एसएसपी कार्तिकेय के. शर्मा सहित अन्य वरीय पदाधिकारी, ब्रह्माकुमारीज के प्रतिनिधि, जीविका दीदियां, छात्र-छात्राएं मौजूद थे। वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये विभिन्न जिलों के डीएम एवं आमजन जुड़े हुए थे।

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