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Patna : बाहर से जगमगाते शीशे, मद्धम रोशनी, धीमी धुन पर बजता संगीत और करीने से सजे टेबल। राजधानी पटना के नामी-गिरामी होटलों और आलीशान रेस्टोरेंट्स का यह वही माहौल है, जहां एक कप कॉफी या एक थाली खाने के लिए लोग जेब ढीली करते वक्त दो बार नहीं सोचते। मन में यही भरोसा रहता है कि महंगा है तो साफ-सुथरा और शुद्ध ही होगा। लेकिन इसी चमचमाती दुनिया के ठीक पीछे, जहां की रसोइयों में आम ग्राहकों की नजर नहीं पहुंचती, वहां सेहत के नाम पर क्या परोसा जा रहा था, इसका खुलासा हालिया छापों में हुआ है। बिहार की जनता की सेहत को लेकर सीएम सम्राट चौधरी की सख्ती के बाद जब स्वास्थ्य विभाग की खाद्य संरक्षा टीमें अचानक इन बड़े ठिकानों पर पहुंचीं, तो वहां का नजारा देखकर खुद अफसरों के होश उड़ गए।
चमकते काउंटर के पीछे गंदगी का अंबार, 14 दिन की मोहलत पर टिकी साख
जांच टीम जब पटना के जाने-माने होटलों… गार्गी ग्रैंड, पाटलिपुत्र एग्जॉटिका, द पनाश और होटल मौर्या की रसोइयों में दाखिल हुई, तो उम्मीद के बिल्कुल उलट तस्वीरें सामने आईं। जिन रसोइयों को पूरी तरह से सैनिटाइज और साफ होना चाहिए था, वहां साफ-सफाई के बुनियादी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। कई जगहों पर शाकाहारी और मांसाहारी चीजों को बिना किसी एहतियात के एक ही फ्रीजर में ठूंसकर रखा गया था। खाना बनाने में जुटे कई कर्मचारियों के पास जरूरी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र तक नहीं थे और पानी की शुद्धता की जांच का कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं मिला। बदबूदार और एक्सपायरी सामान देखकर अधिकारियों ने इन सभी को कड़ी फटकार लगाई और कमियां सुधारने के लिए 14 दिनों का अल्टीमेटम थमा दिया।
ब्रेड में रेंगते कीड़े, 20 लीटर जला तेल और 30 किलो बदबूदार पनीर नाली में बहा
पॉपुलर फूड चेन्स और बुफे सिस्टम के लिए मशहूर रेस्टोरेंट्स की हकीकत तो और भी चौंकाने वाली निकली। बुद्ध मार्ग स्थित बारबेक्यू नेशन की रसोई से टीम ने करीब 30 किलोग्राम सड़ा-बदबूदार पनीर और 4 किलोग्राम बासी चावल जब्त कर तुरंत नष्ट कराया, जबकि 15 किलो पैक्ड चिकन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। वहीं फ्रेजर रोड वाले बारबेक्यू नेशन में जब ब्रेड का पैकेट खोला गया, तो उसमें कीड़े रेंग रहे थे। यहां कड़ाही में बार-बार खौलाया जा चुका 20 लीटर काला पड़ चुका जला हुआ तेल फिंकवाया गया। बोरिंग कैनाल रोड के केएफसी में खाद्य नियमों को ताक पर रखकर इस्तेमाल किए जा रहे 835 इंडस्ट्रियल प्लास्टिक ग्लास जब्त किए गए। पिज्जा हट से लेकर पिस्ता हाउस तक में लापरवाही की एक जैसी कहानी सामने आई।
ब्रांडेड बोतलों में सादा पानी, जिलों में भी ताबड़तोड़ छापेमारी
कार्रवाई सिर्फ होटलों के खाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि गले तर करने वाले पानी के धंधे को भी खंगाला गया। संपतचक और गौरीचक इलाके में चल रही अवैध पैकेज्ड वॉटर फैक्ट्रियों पर जब छापा पड़ा, तो पता चला कि बिना किसी वैध लाइसेंस के बड़े ब्रांड्स के नकली लेबल चिपकाकर पानी का खेल चल रहा था। महादेव इंटरप्राइजेज और त्रिवेणी नीर समेत कई जगहों से पानी की बड़ी खेप जब्त कर इन अवैध यूनिटों को बंद कराया गया। पटना में 87 जगहों पर दबिश देकर 15 पर मुकदमे और 2 के लाइसेंस रद्द किए गए। राजधानी के साथ-साथ रोहतास, सारण, गोपालगंज, गया, वैशाली और मुजफ्फरपुर समेत पूरे सूबे में 531 जगहों पर चले इस अभियान ने साफ कर दिया है कि थाली में मिलावट और गंदगी परोसने वालों की अब खैर नहीं है।
“आम लोगों को सुरक्षित और शुद्ध खाना मिले, यही हमारी प्राथमिकता है। रसोई की गंदगी, खराब भंडारण और मिलावटखोरी को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों की सेहत की सुरक्षा से सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।”
– निशांत, मंत्री, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार
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