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Patna : सारण में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान सह कृषि जनकल्याण संवाद’ में किसानों की भारी भीड़ जुटी। कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कहा कि हमारे परिवार का स्वास्थ्य सीधे तौर पर खेतों की मिट्टी की सेहत से जुड़ा है। जिस मिट्टी में हम अन्न उगा रहे हैं, अगर वही पोषक तत्वों से भरपूर और सेहतमंद होगी, तभी हमारी थाली में शुद्ध और पौष्टिक खाना पहुंचेगा। संवाद के दौरान जब किसानों को बताया गया कि यूरिया 270 रुपए की तय दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, तो मौके पर मौजूद अधिकारियों की खूब पीठ थपथपाई गई। कार्यक्रम में कई सांसदों और विधायकों ने भी हिस्सा लिया और किसानों के हक में आवाज बुलंद की।

स्कूलों में बनेंगी लैब, बच्चे भी सीखेंगे मिट्टी की सेहत जांचना
कृषि मंत्री ने बताया कि नई पीढ़ी को खेती और मिट्टी की अहमियत समझाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान बिहार के सभी 38 जिलों के 629 पीएम श्री और सरकारी स्कूलों में मिनी मिट्टी जांच लैब बनाई जाएंगी। इससे बच्चे शुरुआत से ही वैज्ञानिक तरीके से समझ सकेंगे कि मिट्टी में कौन से पोषक तत्वों की कमी है और इसे कैसे ठीक किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 160 पीएम श्री स्कूलों में ऐसी लैब चालू की जा चुकी हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों के छात्रों में खासा उत्साह है।
रबी सीजन में 16 लाख किसानों को जोड़ने की तैयारी
अभियान के नतीजों का ब्योरा देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि खरीफ के मौसम में पूरे प्रदेश में 7 हजार 275 किसान चौपाल लगाई गईं। इनमें 6 लाख 19 हजार से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया, जिसमें दो लाख से अधिक महिला किसान भी शामिल थीं। अब सरकार रबी सीजन में इसे और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। राज्य के सभी 534 प्रखंडों की कम से कम दो पंचायतों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इसका सीधा मकसद 15 से 16 लाख किसानों से सीधे जुड़कर उन्हें कम लागत और टिकाऊ खेती के तौर-तरीके सिखाना है।
19 मुद्दों पर किसानों से सीधी बात और तुरंत समाधान के निर्देश
संवाद के दौरान कृषि मंत्री ने बीज, कीटनाशक, मिट्टी जांच और खाद जैसे कुल 19 अहम मुद्दों पर किसानों की बातें सुनीं। किसानों ने अपनी परेशानियां और सुझाव खुलकर सामने रखे, जिस पर मंत्री ने मौजूद अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। कार्यक्रम स्थल पर कृषि विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में उन्होंने उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और प्राकृतिक खेती के नए मॉडलों को भी देखा और किसानों को इनका फायदा उठाने के लिए प्रेरित किया।
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