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Patna : बिहार में नशीले पदार्थों के काले कारोबार के खिलाफ पुलिस और मद्य निषेध विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान छेड़ दिया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सामने आया कि इस साल 27 अक्टूबर तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 4,232 केस दर्ज किए गए हैं और 6,104 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है, जब पूरे 2025 में 2,583 केस दर्ज हुए थे और 3,562 लोग पकड़े गए थे। बैठक में डीजीपी प्रीता वर्मा, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, एडीजी (विधि-व्यवस्था) रत्न संजय और विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह भी मौजूद रहे।
गांजा-स्मैक के साथ कफ सिरप की जब्ती में भारी उछाल
राज्य में नशे की खेप पकड़ने के मामले में इस साल कई बड़े रिकॉर्ड टूटे हैं। पुलिस ने अब तक 46,549 किलो से ज्यादा गांजा, करीब 150 किलो हेरोइन, ब्राउन शुगर व स्मैक, 11.5 लाख से अधिक नशीली गोलियां-कैप्सूल, करीब 5 लाख नशीले इंजेक्शन और 5.11 लाख से ज्यादा कोडीन युक्त कफ सिरप की बोतलें बरामद की हैं। गांजा तस्करी के नेटवर्क में अररिया, सुपौल और मधुबनी सबसे आगे पाए गए, जहां अकेले अररिया से 10 हजार किलो से ज्यादा गांजा पकड़ा गया। वहीं हेरोइन और स्मैक की खपत व बरामदगी के मामले में पटना और पूर्णिया शीर्ष पर रहे। पुलिस ने केवल जब्ती ही नहीं की, बल्कि पिछले साल की तुलना में 10 गुना ज्यादा यानी 25,247 किलो मादक पदार्थों को जलाकर नष्ट भी किया है।

तस्करों की संपत्ति की जांच और गया में अफीम की खेती पर बुलडोजर
सीएम सम्राट चौधरी से मिले कड़े निर्देश के बाद नशे के छोटे से लेकर बड़े सौदागरों पर नकेल कसने के लिए उनकी काली कमाई और संपत्तियों की आर्थिक जांच शुरू कर दी गई है। व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ रखने वाले 231 मामलों के 417 अभियुक्तों की संपत्तियों का ब्योरा खंगाला जा रहा है। इसके अलावा आदतन तस्करों पर सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत निरोध आदेश जारी किए जा रहे हैं। वहीं जंगलों और खेतों में चोरी-छिपे होने वाली अफीम की खेती पर भी बड़ा प्रहार हुआ है। फसल वर्ष 2025-26 के दौरान 512 एकड़ से अधिक अवैध अफीम की फसल को नष्ट किया गया, जिसमें 508 एकड़ से ज्यादा फसल अकेले गया जी जिले में काटी गई। मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए राज्य में 10 विशेष अदालतें काम कर रही हैं, जिन्होंने वर्ष 2021 से अब तक 2,225 तस्करों को सजा दिलाई है।
स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर दायरे में नो-ड्रग्स जोन
युवाओं और छात्रों को नशे के जाल से बचाने के लिए सरकार ने कड़े सामाजिक और प्रशासनिक कदम उठाए हैं। सभी स्कूल और कॉलेजों के आसपास 500 मीटर के क्षेत्र को ड्रग फ्री जोन घोषित करने का आदेश दिया गया है। राज्य भर में 26 नवंबर तक ‘नशा मुक्त बिहार अभियान’ चलाया जा रहा है। आम लोगों से सूचनाएं जुटाने के लिए बनाए गए ‘मानस’ पोर्टल पर मिली हजारों शिकायतों के आधार पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई और 138 एफआईआर दर्ज हुईं। मुख्य सचिव ने सभी मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए अलग से विशेष वार्ड बनाने और जिला स्तर पर हर महीने नियमित समीक्षा करने के निर्देश जारी किए हैं।
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