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Home » धरहरा के आदिम जनजाति रोजगार के अभाव में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं
झारखंड

धरहरा के आदिम जनजाति रोजगार के अभाव में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं

July 4, 2021No Comments2 Mins Read
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बरकट्ठा। प्रखंड क्षेत्र के कोनहारा खुर्द पंचायत अंतर्गत ग्राम धरहरा में आदिवासी जनजाति के लोग निवास करते हैं, जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इनकी आबादी लगभग 600 है। इस ग्राम में शैक्षणिक सुविधा के नाम पर एकमात्र प्राथमिक विद्यालय है जहां नामांकन के अनुरूप उपस्थिति कम ही रहती है। धरहरा ग्राम में पंचायत नीधि से सोलर जल मिनार का निर्माण कराया गया है किन्तु अधिक आबादी के कारण यह जल मीनार जवाब दे देता है। इन्हें पानी लाने के लिए दो-तीन किलोमीटर बगल क्रेसर मंडी जाकर पानी लाना पड़ता हैं। लोगों के जीवकोपार्जन का एकमात्र साधन दिहाड़ी मजदुरी है। किन्तु कोरोना काल के कारण इन लोगों के समक्ष आर्थिक समस्या विकराल हो गई है। फिलहाल जीविकोपार्जन के लिए ये प्लास्टिक के बोरा से रस्सी बनाकर बेचते हैं।

स्थानीय निवासी लाटो बिरहोर ने कहा कि मुझे आवास नहीं मिला है जिसके कारण मैं धरहरा के सामुदायिक भवन में कपडे घेर कर रहने को विवश हूॅ। मेरी परिवार गर्भवती है जिनका आर्थिक संकट के कारण समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि गाहे-बगाहे पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि आते हैं किंतु नाममात्र का सामग्री उपलब्ध कराकर वे चले जाते हैं और हम लोगों के समक्ष समस्याएं जस की तस बनी रहती है। आगे उन्होंने अपनी स्थिति के बारे में बताया की अधिक बारिश के कारण यहां पानी प्रवेश कर जाता है जिससे घर में रखे सारे सामान भिंग जाते हैं। फिर हम लोग बारिश से बचने के लिए स्कूल चले जाते हैं। स्थानीय निवासी गुड़िया कुमारी(विकलांग) ने बताया कि यहां पर किसी परिवार को गैस चूल्हा नहीं मिला है ।यदि हम लोगों को सरकार से गैस चूल्हा मिल जाए तो हम लोगों को खाना बनाने में सहूलियत होगी। गुड़िया कुमारी का राशन कार्ड है इस कार्ड पर जो अनाज उन्हें मिलता है वही इनका जीविकोपार्जन का साधन है। गुड़िया कुमारी ने झारखंड सरकार से एक व्हीलचेयर, गैस चूल्हा और एक आवास की मांग की गुहार लगाई है। स्थानीय लोगों ने कहा कि गैस चूल्हा नहीं मिलने के कारण हम लोग मजबूरन जंगल से लकड़ी चुनकर लाते हैं और भोजन बनाते हैं।

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