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दरअसल, बुजुर्ग मनसुख को मृत समझकर अंतिम संस्कार के समय हिंदू वैदिक रिवाज के अनुसार परिजनों ने गऊ पूजन कराकर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए रिश्तेदार को सूचना दे डाली.
सगे-सम्बन्धी सूचना पर घर भी पहुंच गए लेकिन इसी बीच यह बुजुर्ग उठकर बोला-मैं अभी भी जिंदा हूं.
बता दें कि मनसुख कुशवाहा का स्वास्थ्य बीते दो वर्षों से खराब चल रहा है. बुजुर्ग का पैर टूट जाने से वह चल नहीं पा रहे थे. छोटा बेटा राम कृपाल कुशवाहा व उसका परिवार बुढ़ापे में सहारा है.
आर्थिक स्थिति ठीक न होने से जबलपुर में पैर का चल रहा इलाज फिलहाल बंद है. परिजन बोले कभी खाना तो कभी पानी के सहारे है.
बुजुर्ग के परिजनों का कहना है कि मनसुख कुशवाहा की आयु 96 वर्ष की हो जाने व पूर्व में कुछ समय तक स्वास्थ्य अधिक खराब रहने से वह कमजोरी महसूस कर रहे हैं.

