Close Menu
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, 8 May, 2026 • 02:29 am
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • AdSense Policy
  • Terms and Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo
News SamvadNews Samvad
  • HOME
  • INDIA
  • WORLD
  • JHARKHAND
    • RANCHI
  • BIHAR
  • UP
  • SPORTS
  • HOROSCOPE
  • CAREER
  • HEALTH
  • MORE…
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Home » यहाँ 6 महीने तक नहीं होते सूरज के दर्शन, रोशनी के लिए लोग करते है ये ‘जुगाड़’?
दुनिया

यहाँ 6 महीने तक नहीं होते सूरज के दर्शन, रोशनी के लिए लोग करते है ये ‘जुगाड़’?

July 20, 2021No Comments2 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Follow Us
Google News Flipboard Facebook X (Twitter)
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Telegram WhatsApp Email
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now

अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

ओस्लो। दुनिया में खगोलीय घटनाओं के एक से बढ़कर एक रोमांचित कर देने वाले नमूने मौजूद हैं.

आपको जान कर आश्चर्य होगा कि दुनिया में एक ऐसी जगह है, जहां कई महीनों तक सूरज की रौशनी पड़ती ही नहीं. जी हां, यहां साल के 6 महीने दिन रहता है और बाकी के महीने रात.

नार्वें  में टेलीमार्क एरिया के पास पहाड़ों की बीच में स्थित इस शहर को रजुकान नाम दिया गया है.

यहां के निवासी लगभग 6 महीने तक बिना धूप के रहते हैं. इसी कारण उनके शरीर में विटामिन डी की भारी कमी हो जाती है.

जानकारी के मुताबिक इस शहर को एक हाइड्रो पावरहाउस के रूप में नॉर्स्क हाइड्रो में काम करने वालों के लिए बसाया गया था.

Interesting Facts: जहां 6 महीने तक नहीं होते सूरज के दर्शन, रोशनी के लिए होता है ये 'जुगाड़'

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस शहर के संस्थापक सैम आइड) ने 1913 तक वहां पर सूरज की रोशनी लाने के लिए शीशा बनाने का सपना देखा था. हांलाकि उनके जीते जी ऐसा हो नहीं सका. जिसके बाद विकल्प के तौर पर नागरिकों को घाटी से बाहर और पहाड़ों पर ले जाने के लिए एक गोंडोला, जिसे हवाई ट्रामवे या क्रोबोबेन भी कहते हैं, उसे बनाया गया था ताकि उन्हें विटामिन डी मिल सके. लेकिन सैम आइड ने लोगों को रास्ता दिखा दिया था.

उनकी मौत के बाद स्थानीय लोगों और आर्टिस्ट मार्टिन एंडरसन  ने सैम की कल्पना के बारे में विचार किया, और लगभग 100 साल बाद आधिकारिक तौर पर रजुकान सन मिरर  का इस्तेमाल किया गया. जिसके बाद स्थानीय निवासियों को अब शहर के 6,500 वर्ग फुट के क्षेत्र में सूरज की रोशनी ले सकते हैं.

शीशे की मदद से करीब 80 फीसदी सूर्य की किरणों को शहर की तरफ भेज दिया जाता है. इस योजना की लागत 750,000 डॉलर बताई जाती है.स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मिरर के लगने के बाद लोगों की बहुत मदद हुई है. साथ ही टूरिज्म को भी बढ़ावा मिला है. जानकारी के अनुसार साल 2015 में इस जगह को नॉर्वे के आठवें यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में पहचान मिली थी.

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Previous Articleखाली पेट तुलसी और पुदीने की पत्तियां चबाएं तो ये 5 बीमारी कभी नहीं होगी
Next Article इस भयानक कुत्ते ने बच्चे पर किया 32 बार हमला, मां ने ऐसे बचाई जान

Related Posts

Headlines

सम्राट सरकार का कैबिनेट विस्तार, किसे मिला कौन सा विभाग… देखें लिस्ट

May 7, 2026
Headlines

मामूली सी बात पर सड़क पर बहा खू’न, 24 घंटे में खुलासा कर गये SP… देखें वीडियो

May 7, 2026
Headlines

चलती ट्रेन में पिस्तौल लहराकर मचाया आतंक, RPF ने निकाल दी हेकड़ी

May 7, 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Telegram
  • WhatsApp

Latest Post

राशिफल @ 08 मई 2026… आज क्या कहता है आपका भाग्य… जानें

May 8, 2026

ऊर्जा निगम में बहाली का रास्ता साफ, अजय बोले- पहले पुराने कर्मियों का हक

May 7, 2026

सम्राट सरकार का कैबिनेट विस्तार, किसे मिला कौन सा विभाग… देखें लिस्ट

May 7, 2026

मामूली सी बात पर सड़क पर बहा खू’न, 24 घंटे में खुलासा कर गये SP… देखें वीडियो

May 7, 2026

चलती ट्रेन में पिस्तौल लहराकर मचाया आतंक, RPF ने निकाल दी हेकड़ी

May 7, 2026
© 2026 News Samvad. Designed by Forever Infotech.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.