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News Samvad : सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सेना की कानूनी शाखा में नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। न्यायाधीशों की पीठ ने यह सवाल किया है कि यदि महिलाएं भारतीय वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमान उड़ा सकती हैं, तो उन्हें सेना की कानूनी शाखा के शीर्ष पदों पर क्यों नियुक्त नहीं किया जा सकता। पीठ ने याचिकाकर्ता अर्शनूर कौर को सेना की कानूनी शाखा में शामिल करने का निर्देश दिया है। दूसरी याचिकाकर्ता आस्था त्यागी ने पहले ही भारतीय नौसेना में शामिल हो चुकी हैं। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने जज एडवोकेट जनरल की परीक्षा में क्रमशः चौथी और पांचवीं रैंक प्राप्त की, लेकिन उनसे कम रैंक वाले पुरुष अधिकारियों की नियुक्ति की गई। आवेदन में यह भी कहा गया कि विभाग में केवल छह पदों में से तीन ही पद महिलाओं के लिए आरक्षित थे, जिससे असमानता स्पष्ट होती है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन ने केंद्र सरकार से पूछा, “यदि महिलाएं वायुसेना में लड़ाकू विमान चला सकती हैं, तो सेना की कानूनी शाखा में अधिक महिलाओं की नियुक्ति क्यों कठिन है?” अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एश्वर्या भाटी ने कहा कि 2012 से 2023 तक पुरुष और महिला अधिकारियों की भर्ती में 70:30 के अनुपात को अब 50:50 में बदलने की नीति भेदभावपूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कार्यपालिका का अधिकार क्षेत्र है और इसे चुनौती देना सही नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और केंद्र सरकार के जवाब के बाद आगे का निर्णय सुनाया जाएगा।
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