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Hyderabad/Patna : बिहार में खेती को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने के साथ अब सरकार की कोशिश है कि रिसर्च का फायदा सीधे किसानों के खेत तक पहुंचे। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान और नवाचारों का लाभ आम लोगों और किसानों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने साफ कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाने से किसानों की आमदनी नहीं बढ़ेगी। किसान जो पैदा कर रहे हैं, उसके लिए बेहतर बाजार और उचित कीमत भी मिलनी चाहिए।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा मंगलवार को बिहार में कृषि क्षेत्र की नई संभावनाओं को तलाशने के लिए हैदराबाद के पटनचेरु स्थित इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रॉपिक्स यानी ICRISAT पहुंचे। उनके साथ कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, कृषि निदेशक मुकेश कुमार लाल और निदेशक उद्यान सह प्रबंध निदेशक बिहार राज्य बागवानी मिशन एवं बिहार फल एवं सब्जी विकास निगम अभिषेक कुमार भी मौजूद रहे।

मिलेट्स की खेती से बाजार तक की व्यवस्था पर जोर
ICRISAT के दौरे के दौरान बिहार में कृषि विकास की संभावनाओं को लेकर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट्स वैल्यू चेन परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ICRISAT जीनबैंक के प्रमुख डॉ. कुलदीप सिंह ने परियोजना के तहत अब तक हुए काम की जानकारी दी। उन्होंने बिहार में मिलेट्स यानी श्री अन्न पर आधारित पूरी मूल्य शृंखला को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में भी बताया।
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में खेती की नई संभावनाओं को किसानों की समृद्धि से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीक को खेत तक पहुंचाकर उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। इसका सीधा फायदा किसानों की आय और आजीविका को मजबूत करने में मिलेगा। उन्होंने कहा कि ICRISAT जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग बिहार में खेती के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
विजय कुमार सिन्हा ने मिलेट्स को लेकर कहा कि बिहार में श्री अन्न का उत्पादन हो रहा है, लेकिन किसानों को इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब उन्हें अपने उत्पाद की सही कीमत मिले। इसके लिए मिलेट्स के बेहतर बाजार तैयार करने के साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना जरूरी है। किसान के खेत से निकलने वाला उत्पाद बाजार तक पहुंचे और फिर उपभोक्ता तक आसानी से उपलब्ध हो, इसके लिए पूरी व्यवस्था को मजबूत करना होगा।

किसानों को मिलेट्स के फायदे बताने पर भी जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के बीच श्री अन्न के फायदे को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। किसानों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि मिलेट्स पोषण के लिहाज से कितने उपयोगी हैं और खेती के लिहाज से इनके क्या फायदे हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए किसानों को वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना जरूरी है।
उन्होंने बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मिलेट्स वैल्यू चेन परियोजना की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि इसे खाद्य और पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में पूर्वी भारत ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इस काम में ICRISAT की विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
मंत्री ने भरोसा जताया कि बिहार सरकार और ICRISAT के बीच सहयोग से मिलेट्स के उत्पादन के साथ-साथ उसके प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकेगा। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने और उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है।

बिहार के किसानों से मिले मंत्री, देखी आधुनिक रिसर्च की व्यवस्था
विजय कुमार सिन्हा ने ICRISAT में प्रशिक्षण ले रहे बिहार के किसानों से भी बातचीत की। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के अनुभव के बारे में पूछा और यह जाना कि उन्हें आधुनिक खेती से जुड़ी कौन-कौन सी तकनीकी जानकारी दी जा रही है। मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीक का फायदा तभी मिलेगा, जब उसे किसानों तक सही तरीके से पहुंचाया जाए।
बिहार के प्रतिनिधिमंडल ने ICRISAT में मौजूद कई अनुसंधान और प्रशिक्षण सुविधाओं का भी दौरा किया। इसमें रीजनरेटिव एग्रीकल्चर लिविंग लैबोरेटरी, स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी, जीनबैंक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन जीनोमिक्स और एग्रीबिजनेस इनोवेशन प्लेटफॉर्म शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल को फसल की नई किस्में तैयार करने, जीन संसाधनों को सुरक्षित रखने, आधुनिक खेती, मौसम के अनुकूल कृषि, कृषि जैव प्रौद्योगिकी और कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में चल रहे काम की जानकारी दी गई।
ICRISAT के उप महानिदेशक अनुसंधान एवं नवाचार डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने प्रतिनिधिमंडल को संस्थान के अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों के बारे में बताया। उन्होंने खाद्य और पोषण सुरक्षा के साथ किसानों की आजीविका मजबूत करने के लिए विज्ञान आधारित कृषि अनुसंधान के जरिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
इस मौके पर ICRISAT के सहायक महानिदेशक संजय अग्रवाल, ग्लोबल रिसर्च प्रोग्राम के निदेशक डॉ. रमन बाबू और डॉ. रमेश सिंह, तेलंगाना कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक एन. पी. श्रवण कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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