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Patna : बिहार में राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने और शिकायतों के तुरंत निपटारे के लिए विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड का गठन किया जाएगा। यह निर्देश खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने मुख्य सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता समिति की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चल रहे कार्यक्रमों, नए राशन कार्ड बनाने, संदिग्ध कार्डों की छंटनी, स्मार्ट पीडीएस व्यवस्था और आगामी धान खरीद की तैयारियों पर बिंदुवार बात हुई। मंत्री ने साफ कहा कि तकनीक के इस्तेमाल में बिहार आगे है, लेकिन असल चुनौती यह है कि अनाज सही व्यक्ति तक बिना किसी परेशानी के पहुंचे।
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पीडीएस दुकानों के नए लाइसेंस देने में किसी तरह की देरी न की जाए। सभी लंबित मामलों को समय सीमा तय करके निपटाया जाए। इसके अलावा पात्र परिवारों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने और खाद्यान्न वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न होने देने पर जोर दिया गया।
8.45 करोड़ लाभुकों में से 80 प्रतिशत की ई-केवाईसी पूरी, फर्जी कार्डों पर सख्ती
बैठक के दौरान राज्य में राशन कार्ड और खाद्यान्न वितरण से जुड़े आंकड़े पेश किए गए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लगभग 2.09 करोड़ राशन कार्डों के जरिए 8.45 करोड़ लोगों को अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें से 6.54 करोड़ लाभार्थियों का ई-केवाईसी काम पूरा हो चुका है, जो कुल संख्या का लगभग 80.07 प्रतिशत बैठता है। वर्तमान में राज्य के 1.85 करोड़ राशन कार्डों पर नियमित तौर पर अनाज बांटा जा रहा है। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना का असर भी जमीन पर दिख रहा है। बीते अक्टूबर महीने में ही बिहार के 3.65 लाख राशन कार्डधारकों ने दूसरे राज्यों में रहकर अपने हिस्से का खाद्यान्न उठाया। विभाग को मिली कुल 4,069 शिकायतों में से 3,383 का समाधान कर दिया गया है।
नए राशन कार्ड बनाने के लिए राज्यभर में पंचायत विकास शिविर लगाकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभाग को नए कार्ड के लिए अब तक करीब 13.93 लाख आवेदन मिले हैं, जिनमें से 7.40 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 14.61 लाख से अधिक नए सदस्यों के नाम जोड़े गए हैं। आवेदनों की जांच प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और आपूर्ति निरीक्षक के स्तर पर की जा रही है, जबकि मंजूरी अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा दी जा रही है। इसके साथ ही गलत तरीके से बने संदिग्ध राशन कार्डों की पहचान भी तेज कर दी गई है। केंद्र सरकार के तय नियमों के आधार पर ऐसे लोगों की छंटनी हो रही है जो लंबे समय से अनाज नहीं ले रहे हैं, जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं, या जो तय आय और संपत्ति सीमा के बाहर आते हैं।
राशन दुकानों की 4910 रिक्तियों पर भर्ती प्रक्रिया जारी, स्मार्ट पीडीएस से जुड़ा सिस्टम
राज्य में जन वितरण प्रणाली की खाली पड़ी दुकानों को भरने का काम भी तेजी से चल रहा है। कुल 4,910 खाली पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था, जिसके बदले विभाग को 50,031 आवेदन मिले हैं। स्क्रूटनी के बाद अब तक 1,237 नए दुकानदारों को लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। बाकी बचे पदों को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लोगों को दूर राशन लेने न जाना पड़े।
वहीं, व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए स्मार्ट पीडीएस प्रणाली के विभिन्न हिस्से जमीन पर उतार दिए गए हैं। राशन कार्ड बनाने, सुधारने और नाम हटाने का काम अब आरसीएमएस पोर्टल से हो रहा है। इसके अलावा अनाज के आवंटन, उठाव, ढुलाई और दुकानों के संचालन की पूरी निगरानी सप्लाई चेन मैनेजमेंट और फेयर प्राइस शॉप मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए की जा रही है। दुकानों पर पॉस मशीनों के जरिए केवल बायोमेट्रिक और आंख की पुतली यानी आइरिस स्कैन से ही राशन दिया जा रहा है। इस पूरे डिजिटल रिकॉर्ड को आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़ा जा रहा है ताकि पात्र लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ सीधे मिल सके।
1 नवंबर से शुरू होगी धान खरीद, साधारण धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपए तय
बैठक में खरीफ मौसम के तहत धान खरीद की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। इस बार राज्य सरकार ने 35 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। केंद्र सरकार के तय मानकों के अनुसार साधारण धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपए प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का मूल्य 2,461 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। किसानों की सुविधा के लिए खरीद दो चरणों में शुरू होगी। कोसी, पूर्णिया, तिरहुत, दरभंगा और सारण प्रमंडलों के जिलों में खरीद 1 नवंबर से शुरू होकर 31 मार्च तक चलेगी। वहीं राज्य के बाकी जिलों में खरीद का काम 15 नवंबर से शुरू होगा।
पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो खरीफ मौसम में 36.85 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 36.79 लाख टन धान की खरीद की गई थी, जो लक्ष्य का 99.84 प्रतिशत रहा। इससे 5.40 लाख से अधिक किसानों को 8,807 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान हुआ। स्थानीय स्तर पर खरीद और चावल तैयार होने से बाहर से अनाज मंगाने का भारी खर्च बचता है। बैठक में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन सहित कई सांसद, विधायक, विभागीय सचिव और डीलर संघ के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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