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Patna : बिहार में चीनी उद्योग को फिर से मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने गन्ने की खेती का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। राज्य के 7,490 एकड़ नए क्षेत्रों में अब गन्ने की खेती शुरू कराने की तैयारी है। इसके लिए बिहार सरकार ने कृषि रोड मैप के तहत संचालित “नये क्षेत्रों में गन्ना फसल क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम” के लिए 14.90 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।
सरकार का मानना है कि राज्य में बंद चीनी मिलों को दोबारा चालू करने और नई चीनी मिलें स्थापित करने की योजना तभी सफल होगी, जब मिलों के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो। इसी जरूरत को देखते हुए गन्ने की खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे एक तरफ चीनी मिलों को कच्चा माल मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों के लिए खेती का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार होगा।
नई चीनी मिलों के लिए बढ़ेगा गन्ने का उत्पादन
बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के साथ नई चीनी मिलें लगाने की दिशा में भी काम कर रही है। चीनी मिलों के संचालन में गन्ने की नियमित उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे में सरकार ने पहले से गन्ना उत्पादन वाले इलाकों के साथ नए क्षेत्रों में भी इसकी खेती बढ़ाने की योजना बनाई है।
गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत कुल 7,490 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर गन्ने की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का फायदा चीनी मिल क्षेत्रों के साथ गैर चीनी मिल क्षेत्रों के किसानों को भी मिलेगा। किसानों को गन्ने की खेती शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार की योजना से उन किसानों को भी गन्ने की खेती से जोड़ने में मदद मिलेगी, जिन्होंने अब तक अपने खेतों में दूसरी फसलों की खेती की है। नए क्षेत्रों में खेती बढ़ने से राज्य में कुल गन्ना उत्पादन में भी इजाफा होने की उम्मीद है। इससे चीनी मिलों को स्थानीय स्तर पर गन्ना मिलने में सुविधा होगी और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
मुफ्त बीज के साथ कटाई से ढुलाई तक का खर्च उठाएगी सरकार
इस योजना की खास बात यह है कि किसानों को गन्ने की खेती शुरू करने के लिए गुणवत्तायुक्त गन्ने का बीज निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। केवल बीज देने तक ही सरकारी सहायता सीमित नहीं रहेगी। बीज की कटाई, उसे खेत तक पहुंचाने, लोडिंग और अनलोडिंग का पूरा खर्च भी राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा।
योजना का लाभ 0.25 एकड़ से लेकर अधिकतम 5 एकड़ तक के गन्ना क्षेत्र के लिए दिया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम किसानों को भी योजना से जुड़ने का मौका मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि खेती की शुरुआती लागत का बोझ किसानों पर कम पड़े और वे नए क्षेत्र में गन्ने की खेती अपनाने के लिए आगे आएं।
योजना के क्रियान्वयन में गन्ना उद्योग विभाग के सहायक निदेशक, ईख विकास की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विभाग की ओर से किसानों को योजना से जुड़ी प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी दी जाएगी।
केन केयर पोर्टल पर करना होगा ऑनलाइन आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए केन केयर पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। किसान पोर्टल पर आवेदन करने के बाद विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत योजना का लाभ ले सकेंगे। प्राप्त आवेदनों की जांच और अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नए क्षेत्रों में गन्ना खेती का विस्तार कराया जाएगा।
विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नए क्षेत्रों में गन्ने की खेती अपनाकर इस योजना का लाभ उठाएं। सरकार को उम्मीद है कि गन्ने का रकबा बढ़ने से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और राज्य में चीनी उद्योग को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में नई और कार्यरत चीनी मिलों की जरूरत पूरी करने के लिए स्थानीय स्तर पर गन्ने की उपलब्धता बढ़ाना इस योजना का अहम उद्देश्य है।
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