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Home » रामकृपाल यादव का बड़ा ऐलान- बंद चीनी मिलों में फिर बजेगा सायरन, रैयाम में बनेगा शुगर कॉम्प्लेक्स
बिहार

रामकृपाल यादव का बड़ा ऐलान- बंद चीनी मिलों में फिर बजेगा सायरन, रैयाम में बनेगा शुगर कॉम्प्लेक्स

August 12, 2026No Comments6 Mins Read
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Patna : बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार की योजना सिर्फ चीनी बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मिलों के आसपास बिजली उत्पादन, डिस्टलरी और कंप्रेस्ड बायोगैस का काम भी होगा। इससे गन्ना किसानों को अपनी उपज का बाजार मिलेगा और गांवों में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जबकि मधुबनी के सकरी में बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल स्थापित करने की तैयारी है। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को सूचना भवन में विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि दोनों चीनी मिलों को इंडिया पोटाश लिमिटेड के माध्यम से स्थापित और संचालित करने की योजना है। इसके लिए गन्ना किसानों को जोड़कर सहकारी चीनी मिल समिति बनाई जा रही है। किसानों से ऑनलाइन आवेदन भी मांगे गए हैं और अब तक करीब 10 हजार से 15 हजार किसान आवेदन कर चुके हैं।

नई सहकारिता नीति से अब नए क्षेत्रों में भी समितियां बनेंगी

मंत्री ने कहा कि बिहार में सहकारिता को पुराने ढर्रे से निकालकर नए क्षेत्रों से जोड़ने के लिए बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026 लागू की गई है। अब सहकारी समितियां केवल पारंपरिक काम तक सीमित नहीं रहेंगी। गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी समितियों के गठन और विस्तार को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे किसानों के साथ युवाओं, महिलाओं, उद्यमियों और वंचित वर्गों को भी काम और कारोबार से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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नीति के तहत सहकारी संस्थाओं में तकनीक, डिजिटल व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि गांव में ही उत्पादन से लेकर भंडारण, बैंकिंग और बाजार तक की सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।

सुधा की तरह अब दिखेंगे तरकारी बूथ

बिहार में सब्जी किसानों के लिए भी सरकार नई व्यवस्था तैयार कर रही है। सहकारिता विभाग 350 पंचायतों में सब्जी संग्रहण केंद्र बनाने की तैयारी में है। इसके अलावा 50 प्रखंडों में सब्जी कारोबार से जुड़ी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्री ने कहा कि जिस तरह सुधा डेयरी के बूथ जगह-जगह नजर आते हैं, उसी तर्ज पर वेजफेड के माध्यम से तरकारी बूथ खोले जाएंगे। इन बूथों पर स्थानीय किसानों की सब्जियां बेची जाएंगी। इससे किसान को अपनी उपज का बाजार मिलेगा और बूथ के संचालन से स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार में पैदा होने वाली सब्जियों की बिक्री के लिए राज्य के भीतर ही मजबूत बाजार तैयार हो।

रबी से किसानों को मिलेगा फसल बीमा का सहारा

किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी मौसम से बिहार में लागू करने की स्वीकृति दी गई है। फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को उनकी कृषि लागत के बराबर क्षतिपूर्ति राशि देने की व्यवस्था होगी। इसके लिए किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होगा और प्रीमियम में राज्य सरकार और केंद्र सरकार भी अपना हिस्सा देंगी।

धान खरीद की बात करें तो खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में 36.85 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य था। इसके मुकाबले 6902 समितियों के जरिए 5.40 लाख किसानों से 36.79 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। खरीदे गए धान के बदले राज्य खाद्य निगम को 24.57 लाख मीट्रिक टन, यानी 98.47 प्रतिशत चावल की आपूर्ति की जा चुकी है।

गांवों में अनाज रखने की व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है। सहकारी समितियों के 7452 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है। इनसे करीब 18.827 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता तैयार हुई है। इसके अलावा विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत 36 समितियों में 1000, 2000 और 2500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जा रहे हैं।

पैक्स में बढ़ीं सेवाएं, गांव तक पहुंचेगी बैंकिंग सुविधा

पैक्स को अब सिर्फ धान और गेहूं खरीद तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 6425 पैक्स में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए करीब 300 तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इनमें से 5807 समितियां अभी सक्रिय हैं और पैक्स के माध्यम से अब तक 8.81 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है।

जन औषधि केंद्र योजना के तहत 461 पैक्स का चयन किया गया है। इनमें 373 पैक्स में केंद्र खोलने की स्वीकृति मिल चुकी है। 37 पैक्स को दवा बेचने की अनुज्ञप्ति और 36 को स्टोर कोड मिल चुका है। 36 पैक्स में जन औषधि केंद्र का संचालन भी शुरू हो गया है।

ग्रामीण बैंकिंग को लेकर भी विभाग ने समितियों को बैंक मित्र के रूप में तैयार किया है। इसके तहत 186 दुग्ध सहकारी समितियों, 618 पैक्स, 19 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों और सात अन्य सहकारी समितियों को बैंक मित्र बनाया गया है। माइक्रो एटीएम के जरिए गांवों में बैंकिंग सुविधा पहुंचाई जा रही है। 16 अगस्त से एक महीने का विशेष अभियान चलाकर सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के बैंक खाते खोलने की योजना है।

21 जिलों में बने 100 एफपीओ, किसानों को बाजार से जोड़ने की तैयारी

किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों की 100 चयनित पंचायतों में 100 किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य किसानों को बाजार से जोड़ना और उनकी उपज के लिए उचित मूल्य दिलाना है। साथ ही कृषि के लिए जरूरी इनपुट उपलब्ध कराने में भी ये संगठन मदद करेंगे। अभी 50 एफपीओ ने अपनी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं।

मंत्री ने कहा कि सहकारिता के जरिए ग्रामीण इलाकों में रोजगार और कारोबार की संभावनाओं को बढ़ाने पर विभाग का जोर है। इसके साथ ही वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 9 से 17 अगस्त तक सहकारिता विभाग की ओर से ‘हर घर तिरंगा, 2026’ अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत बाइक रैली, रंगोली, तिरंगे के साथ सेल्फी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रेस वार्ता में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निबंधक सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह, अपर सचिव अभय कुमार सिंह, वेजफेड के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें : पाटलिपुत्र टाउनशिप में 651 एकड़ में बनेगा स्पोर्ट्स हब, सरकार का बड़ा फैसला

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