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Patna : कुछ चेहरे कैमरे के सामने चमकते हैं, तो कुछ कैमरे के पीछे अपनी मेहनत से कहानी रचते हैं। किसी के हाथ में स्क्रिप्ट थी, किसी के कंधे पर कैमरा, किसी की आंखों में अपने सपनों की फिल्म चल रही थी। एमिटी यूनिवर्सिटी पटना के एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन में आयोजित दो दिवसीय एमिटी फिल्म महोत्सव 2026 कुछ ऐसा ही नजारा लेकर आया, जहां हर कोने में युवा सपनों की हलचल दिखी। शुक्रवार को जब इस फिल्म महोत्सव का भव्य समापन हुआ, तो सिर्फ पुरस्कार नहीं बांटे गए, बल्कि कई युवाओं को अपने सपनों पर भरोसा करने की वजह भी मिल गई। इस समापन समारोह के मुख्य अतिथि रहे पंचायत सीरीज में विकास का किरदार निभाने वाले अभिनेता चंदन रॉय, जिनकी मौजूदगी ने माहौल को और खास बना दिया।
कैमरे की रोशनी में नहीं, मेहनत की रोशनी में चमकते हैं कलाकार : चंदन
समापन समारोह में चंदन रॉय मंच पर पहुंचे तो छात्रों की आंखों में एक अलग चमक दिखी। कई छात्र ऐसे थे, जिन्होंने पंचायत जैसी सीरीज को देखकर अभिनय का सपना देखा था। और आज उसी कलाकार को सामने देखकर उनके चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही थी। चंदन रॉय ने अपनी बातों में किसी बड़े भाषण का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी जिंदगी के छोटे-छोटे अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि अभिनय या फिल्म निर्माण का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन अगर इंसान लगातार मेहनत करता रहे तो रास्ते खुद बन जाते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि कई बार रिजेक्शन मिलेगा, लोग मजाक भी उड़ाएंगे, लेकिन अगर जुनून सच्चा है तो काम जरूर बोलेगा। मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता।

सपनों की भीड़ में हर छात्र अपनी कहानी लेकर आया
फिल्म महोत्सव में शामिल प्रतिभागियों के लिए यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं थी। यह मंच था, जहां कोई अपनी पहली फिल्म लेकर आया था, तो कोई पहली बार एडिटिंग के जरिए अपनी कला दिखा रहा था। किसी ने मोबाइल से फिल्म बनाई थी, तो किसी ने टीम बनाकर पूरी शॉर्ट फिल्म तैयार की थी। यहां कई छात्रों के चेहरे पर हल्की घबराहट थी, लेकिन उसी के साथ आत्मविश्वास भी था। स्क्रीन पर जब उनकी बनाई फिल्में चलीं, तो तालियों के साथ उनके सपनों को भी आवाज मिली।
कुलपति ने कहा- यह मंच युवाओं को पहचान देता है
एमिटी यूनिवर्सिटी पटना के कुलपति प्रोफेसर (डॉ) विवेकानंद पांडे ने कार्यक्रम की सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रचनात्मकता और सहयोग का उत्सव है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों के अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर लाते हैं और उन्हें यह एहसास कराते हैं कि वे कुछ अलग कर सकते हैं।

टैलेंट ट्रेजर में झूमा कैंपस, हर कोने में कला का रंग
फिल्म महोत्सव का एक और खास हिस्सा रहा टैलेंट ट्रेजर, जिसने कार्यक्रम में जान डाल दी। मंच पर कभी डांस की धड़कन सुनाई दी, कभी संगीत ने माहौल को भावुक बना दिया, तो कभी नाटक ने दर्शकों को हंसाया और सोचने पर मजबूर कर दिया। कुछ छात्र चित्रकला के जरिए अपनी बात कह रहे थे, तो कुछ संवाद और अभिनय से दर्शकों का दिल जीत रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा कैंपस कुछ देर के लिए किसी बड़े सांस्कृतिक शहर में बदल गया हो।
बिहार में फिल्म निर्माण की संभावनाएं, सरकार भी कर रही मदद : आनंद कौशल
कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार, पीआर एक्सपर्ट और मीडिया स्ट्रेटजिस्ट आनंद कौशल ने युवाओं को एक नई दिशा की बात बताई। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार फिल्म निर्माण और क्रिएटिव इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए कई सुविधाएं दे रही है। उन्होंने बताया कि सरकार इस क्षेत्र में काम करने वालों की मदद भी कर रही है और बिहार में युवा क्रिएटर्स के लिए अपार संभावनाएं हैं। उनके शब्दों ने छात्रों के मन में यह भरोसा भर दिया कि अगर वे मेहनत करें, तो बिहार से भी बड़ा सिनेमा निकल सकता है।

सपनों का सम्मान था यह पल
समापन समारोह में जब पुरस्कार बांटे जा रहे थे, तो मंच पर खड़े विजेताओं की आंखों में खुशी साफ दिख रही थी। यह खुशी सिर्फ ट्रॉफी की नहीं थी, बल्कि उस मेहनत की थी जो रातों की नींद छीनकर की गई थी। सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म, सर्वश्रेष्ठ संपादन, सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति जैसी कई श्रेणियों में विजेताओं को सम्मानित किया गया। टैलेंट ट्रेजर के चैंपियन से लेकर रॉकस्टार तक हर प्रतिभा को तालियों के बीच मंच पर बुलाया गया। कई छात्रों के माता-पिता भी मौजूद थे, जिनके लिए यह पल गर्व से भरा था। किसी मां की आंखों में खुशी के आंसू थे, तो किसी पिता का सीना चौड़ा हो गया था।
50 संस्थानों से आए 300 प्रतिभागी, 150 फिल्में हुईं दर्ज
इस दो दिवसीय आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 50 स्कूल और कॉलेज शामिल हुए। कुल मिलाकर 300 से अधिक प्रतिभागियों ने इस फिल्म महोत्सव में भाग लिया। सबसे खास बात यह रही कि महोत्सव में लगभग 150 लघु फिल्में, रील और वृत्तचित्र पंजीकृत किए गए थे। यह आंकड़ा बता गया है कि युवा अब सिर्फ फिल्में देखना नहीं चाहते, बल्कि खुद अपनी कहानी बनाना भी चाहते हैं।

एमिटी फिल्म महोत्सव ने दे दिया नई उड़ान का हौसला
एमिटी फिल्म महोत्सव 2026 का समापन सिर्फ एक कार्यक्रम का अंत नहीं था, बल्कि कई युवाओं के लिए यह एक नई शुरुआत थी। यहां उन्हें न सिर्फ मंच मिला, बल्कि यह एहसास भी हुआ कि उनके सपने अकेले नहीं हैं। पटना के इस कैंपस में दो दिनों तक जो कुछ हुआ, वह सिर्फ फिल्में नहीं थीं, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और हौसले की कहानियां थीं। और जब चंदन रॉय ने मंच से कहा कि “मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता”, तो ऐसा लगा जैसे हजारों सपनों को एक नई दिशा मिल गई हो।
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