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Patna : बिहार में बैंकों की मनमानी और ऋण बांटने में ढिलाई पर अब राज्य सरकार ने पूरी तरह शिकंजा कस दिया है। राज्य सरकार ने बैंकों की कार्यप्रणाली को परखने के लिए इतिहास में पहली बार 100 अंकों का एक नया और पारदर्शी मापन सूचकांक लागू किया है। इस फार्मूले के तहत सभी सरकारी और निजी बैंकों के कामकाज का बारीकी से हिसाब-किताब लगाया गया। शुक्रवार को पुराना सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में जब रिपोर्ट कार्ड खुला, तो कई नामी और बड़े बैंकों की कलई खुल गई। राज्य का सबसे बड़ा बैंक माना जाने वाला भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई, केनरा बैंक, यूको बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे दिग्गज संस्थान फिसड्डी साबित होकर रेड जोन में जा पहुंचे हैं। दूसरी तरफ निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने सबसे बेहतरीन काम करते हुए 74 अंकों के साथ पहली पायदान हासिल की है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने सख्त लहजे में बैंकों से कहा कि बिहार की जनता की गाढ़ी कमाई से बैंक अपनी तिजोरियां तो भर रहे हैं, मगर जब विकास के लिए कर्ज देने की बारी आती है तो हाथ पीछे खींच लेते हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि बिहार का पैसा बिहार के विकास में ही लगना चाहिए, यह ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं होगी।
बड़े बैंकों की तिजोरियां भरीं, मगर लोन बांटने में फिसड्डी
समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि राज्य में बैंकों का प्रदर्शन तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। पचास से अधिक अंक लाकर ग्रीन जोन में जगह बनाने वाले बैंकों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अलावा जम्मू एंड कश्मीर बैंक, आरबीएल बैंक, एचडीएफसी बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा आगे रहे हैं। वहीं चालीस से पचास अंक पाने वाले बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई और पंजाब नेशनल बैंक जैसे संस्थान मध्यम यानी येलो जोन में सिमट गए। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति उन बड़े सरकारी बैंकों की रही जो चालीस से भी कम अंक पाकर रेड जोन में पहुंच गए हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को महज 32 अंक मिले, जबकि केनरा बैंक को 27, बंधन बैंक, कोटक महिंद्रा, आईडीबीआई और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक को मात्र 26-26 अंक मिले। विकास आयुक्त ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जिन बैंकों के पास राज्य की भारी पूंजी जमा है, उनका साख जमा अनुपात पचास प्रतिशत से भी कम होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा कि बैंक शाखाओं में लंबित पड़े लोन आवेदनों का निपटारा तुरंत किया जाए और बिना ठोस वजह के गरीब व छोटे कारोबारियों के आवेदन खारिज करने की आदत बंद हो।
छह महीने में बंटा 1.89 लाख करोड़ का कर्ज, छोटे उद्योगों की रफ्तार सबसे तेज
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने चार लाख पचानवे हजार करोड़ रुपये की विशाल वार्षिक साख योजना तैयार की है। यह लक्ष्य बिहार के कुल सालाना प्लान बजट से लगभग चार गुना ज्यादा है, जिसका सीधा मकसद जमीन पर रोजगार पैदा करना और आर्थिक पहिए को गति देना है। इस बड़े लक्ष्य के मुकाबले सितंबर छमाही तक राज्य भर में कुल एक लाख नवासी हजार तीन सौ तैंतालीस करोड़ रुपये यानी लगभग अड़तीस प्रतिशत ऋण का वितरण हो चुका है। राहत की बात यह है कि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इस बार छियालीस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज बांटा गया है, जो राज्य में तेज होती आर्थिक हलचल का संकेत देता है। इसमें भी छोटे और मझोले उद्योगों के क्षेत्र ने सबसे शानदार रफ्तार पकड़ी है। इस सेक्टर में तय लक्ष्य का आधे से ज्यादा यानी लगभग चौरासी हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण छह महीने के भीतर वितरित कर दिया गया है। प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में कुल एक लाख तीस हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज दिया गया, जबकि खेती-किसानी के लिए भी करीब चौवालीस हजार करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचाए गए हैं।
कल्याणकारी योजनाओं में सुस्ती बर्दाश्त नहीं, मिशन मोड में काम करने के निर्देश
राज्य में वर्तमान में साख जमा अनुपात यानी सीडी रेशियो साठ प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है। राज्य भर के बैंकों में जनता की जमा पूंजी बढ़कर करीब छह लाख पचास हजार करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है, जबकि बैंकों की ओर से दिया गया कुल बकाया कर्ज भी तीन लाख नब्बे हजार करोड़ रुपये के नए स्तर को छू चुका है। विकास आयुक्त ने बैठक में मौजूद वित्त विभाग के प्रधान सचिव और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में बैंक रोड़ा न बनें। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए अब तक सात लाख से अधिक खातों में आठ हजार तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज पहुंचाया गया है। इसके अलावा पीएम सूर्य घर योजना, पीएम स्वनिधि योजना, रेहड़ी-पटरी वालों के रोजगार और विश्वकर्मा योजना के तहत दस्तकारों को मिलने वाले आर्थिक सहयोग को और तेज करने को कहा गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले छह महीनों में सभी बैंकों को बचे हुए लक्ष्यों को मिशन मोड में पूरा करना होगा, वरना लापरवाह बैंकों पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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