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Patna : जिंदगी जब मुश्किलें सामने खड़ी करती है तो कुछ लोग रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो मुश्किलों को ही अपनी ताकत बना लेते हैं। बिहार के दो पैरा खिलाड़ी सोमन राणा और झंडू कुमार की कहानी कुछ ऐसी ही है। एक ने सेना में रहते हुए लैंडमाइन विस्फोट में अपना दाहिना पैर खो दिया, तो दूसरा बचपन में पोलियो की चपेट में आ गया। दोनों ने हालात के आगे घुटने नहीं टेके और खेल के मैदान में ऐसी पहचान बनाई कि आज पूरा बिहार उन पर गर्व कर रहा है।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर मिलेगा बड़ा सम्मान
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पदक जीतने वाले सोमन राणा और झंडू कुमार को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर सम्मानित किया जाएगा। CM सम्राट चौधरी 29 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास पर दोनों खिलाड़ियों को खेल सम्मान देंगे। कार्यक्रम शाम 5 बजे होगा। गया के सोमन राणा को 30 लाख रुपये और नालंदा के झंडू कुमार को 15 लाख रुपये की सम्मान राशि का चेक दिया जाएगा। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि दोनों खिलाड़ियों ने सिर्फ पदक ही नहीं जीता, बल्कि बिहार के दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी उम्मीद और हौसले की एक नई कहानी लिखी है।
सोमन राणा ने एक पैर खोया, हौसला नहीं
गया के रहने वाले सोमन राणा का खेल से रिश्ता नया नहीं था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बॉक्सिंग से की थी और राष्ट्रीय स्तर पर भी मुकाबले खेले। इसके बाद वह भारतीय सेना में शामिल हो गए। वर्ष 2006 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में ड्यूटी के दौरान एक लैंडमाइन विस्फोट ने उनकी जिंदगी बदल दी। इस हादसे में उनका दाहिना पैर चला गया। लेकिन सोमन के लिए यह जिंदगी का अंत नहीं था। काफी उम्र बीत जाने के बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स की ओर कदम बढ़ाया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन रोज की मेहनत, कड़ा अभ्यास और खुद पर भरोसा उन्हें आगे ले गया। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुष F57 शॉटपुट में उन्होंने स्वर्ण पदक जीत लिया। खास बात यह रही कि वह इस स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने।
बचपन में पोलियो, फिर पावरलिफ्टिंग में कांस्य
नालंदा के हरनौत के रहने वाले झंडू कुमार की कहानी भी कम संघर्ष वाली नहीं है। वर्ष 1997 में जन्मे झंडू बचपन में ही पोलियो से प्रभावित हो गए थे। उनके पैरों की गतिशीलता प्रभावित हुई। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि इलाज का खर्च आसानी से उठाया जा सके। परिवार की जमा पूंजी इलाज में लगती चली गई। इसके बावजूद झंडू ने खुद को कमजोर नहीं माना। मेहनत करते रहे और पैरा पावरलिफ्टिंग में अपनी पहचान बनाई। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में उन्होंने पुरुष पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीत लिया।
दोनों खिलाड़ियों को प्रधानमंत्री भी सम्मानित कर चुके हैं। ‘खेलो इंडिया संवाद’ के दौरान झंडू कुमार के संघर्ष और उपलब्धि की प्रधानमंत्री ने खास तौर पर सराहना की थी। दोनों खिलाड़ी ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत निर्धारित सरकारी नियुक्ति के लिए भी पात्र हैं।
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