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Ranchi : कभी जंगलों और बॉर्डर इलाकों में जिसका नाम सुनकर लोग रास्ता बदल लेते थे, वही रामदेव उरांव अब पुलिस के सामने नतमस्तक था। हाथ में हथियार नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण की इच्छा थी। झारखंड में लंबे समय से सक्रिय झांगुर गिरोह का सरगना और पांच लाख रुपये का इनामी अपराधी रामदेव उरांव शनिवार को अपने दो साथियों के साथ पुलिस के सामने सरेंडर कर गया। रामदेव का आत्मसमर्पण उस कहानी का नया मोड़ है, जिसमें एक ऐसा शख्स शामिल है, जिसने करीब दो दशक तक अपराध की दुनिया में अपना दबदबा बनाए रखा और जिसके नाम से पुलिस और ग्रामीण दोनों परिचित थे।
जब एसएसपी को मिली एक खास सूचना
रांची के रूरल एसपी गौरव गोस्वामी ने मीडिया को बताया कि शनिवार की सुबह रांची एसएसपी राकेश रंजन को सूचना मिली कि झांगुर गिरोह का प्रमुख रामदेव उरांव अपने साथियों के साथ रांची और गुमला की सीमा पर मौजूद है। लेकिन इस बार सूचना किसी वारदात की नहीं थी। खबर थी कि रामदेव सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत पुलिस के सामने आने की तैयारी में है।
सूचना मिलते ही रांची और गुमला पुलिस एक्टिव हो गई। दोनों जिलों की टीमों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। बेड़ो डीएसपी दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिसकर्मी सीमा क्षेत्र की ओर बढ़े। पुलिस को भी शायद यकीन नहीं रहा होगा कि वर्षों से फरार चल रहा अपराधी इस बार हथियार चलाने नहीं, बल्कि उन्हें सौंपने वाला है।
पुलिस टीम पहुंची तो सामने आ गए तीनों
रूरल एसपी गौरव गोस्वामी के मुताबिक, जब संयुक्त टीम सीमा क्षेत्र में पहुंची तो तीन लोग सामने आए। उनमें सबसे आगे रामदेव उरांव था। उसके साथ प्रसाद उरांव और सुबास उरांव भी थे। तीनों ने पुलिस के सामने खुद को झांगुर गिरोह का सदस्य बताया और कहा कि अब वे अपराध का रास्ता छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई और औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। यह दृश्य उन पुलिस अधिकारियों के लिए भी खास था, जो वर्षों से इनकी तलाश में अभियान चलाते रहे थे।
एक ऐसा नाम, जो वर्षों तक पुलिस रिकॉर्ड में सबसे ऊपर रहा
रामदेव उरांव कोई आम अपराधी नहीं था। गुमला और आसपास के इलाकों में उसका नाम लंबे समय से अपराध की दुनिया से जुड़ा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, लूट, अवैध हथियार रखने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर मामलों में करीब 29 केस दर्ज हैं। कई बार पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह हर बार बच निकलता था। धीरे-धीरे वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पांच लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
हथियार भी साथ लाया, ताकि नई शुरुआत की जा सके
सरेंडर के दौरान सिर्फ तीन लोग ही पुलिस के सामने नहीं आए, बल्कि उनके साथ उनके हथियार भी आए। पुलिस ने एक एसएलआर राइफल समेत दो ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए हैं। इसके अलावा दो मैगजीन और 45 जिंदा गोलियां भी जब्त की गई हैं। एसपी का कहना है कि झांगुर गिरोह के सरगना के आत्मसमर्पण से क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह उन अपराधियों के लिए भी एक संदेश है जो अब भी हथियार के दम पर अपनी पहचान बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
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