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Home » समाधि पर झुका शीश, नम हुईं आंखें… निर्मल दा की यादों में भावुक हुए सीएम हेमंत
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समाधि पर झुका शीश, नम हुईं आंखें… निर्मल दा की यादों में भावुक हुए सीएम हेमंत

August 8, 2026No Comments6 Mins Read
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Pawan Thakur 

जमशेदपुर के उलियान की हवा में आज वही पुरानी तासीर और अपनापन महसूस हो रहा था। यह वही उलियान है, जिसकी मिट्टी अमर शहीद निर्मल महतो के पसीने और खून से कभी तर हुई थी। शहीद निर्मल महतो के 39वें शहादत दिवस पर जब सीएम हेमंत सोरेन समाधि स्थल पहुंचे, तो लगा जैसे वक्त जरा ठहर सा गया हो। चारों तरफ पसरी गहरी खामोशी, हाथों में फूल लिए कतार में खड़े लोग और बुजुर्गों की नम आंखें इस बात की गवाही दे रहे थे कि निर्मल महतो सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज कोई नाम नहीं हैं, बल्कि वे आज भी झारखंड के हर नागरिक के दिल में धड़कते हैं। सीएम हेमंत सरेन ने समाधि स्थल पर सिर झुकाकर जब पुष्पांजलि अर्पित की और प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, तो पूरा परिसर एक अजीब सी भावुकता और गर्व के अहसास से भर गया।

एक जननायक की याद में भीगी आंखें और सीने में तैरता पुराना संघर्ष

श्रद्धांजलि देने के बाद जब सीएम हेमंत सोरेन मंच पर पहुंचे और सभा को संबोधित करने के लिए माइक संभाला, तो उनके गले से निकले शब्दों में श्रद्धांजलि की औपचारिकता कम और एक अपनों को खोने का दर्द व सम्मान ज्यादा नजर आया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की यह पावन माटी वीरों और बलिदानियों की भूमि रही है। अमर शहीद निर्मल महतो जैसे जननायकों ने अपने खून-पसीने से इस राज्य की सामाजिक चेतना को सींचा है। निर्मल दा ने जिस दौर में झारखंड आंदोलन की मशाल थामी थी, वह दौर बेहद मुश्किलों भरा था। चारों तरफ अन्याय, शोषण और पहचान का संकट था, लेकिन निर्मल दा ने बिना अपनी जान की परवाह किए आदिवासियों और मूलवासियों की आवाज को बुलंद किया।

सीएम ने भावुक होते हुए कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र पहचान के साथ सिर उठाकर जी रहे हैं, वह कोई खैरात में मिली चीज नहीं है। इसके पीछे निर्मल दा जैसे महान योद्धाओं की जवानी, उनका त्याग और उनका सर्वोच्च बलिदान छिपा है। एक लंबे और कठिन संघर्ष के बाद जब झारखंड को उसकी अलग पहचान मिली, तो उसकी नींव में निर्मल महतो का विचार ही सबसे मजबूत स्तंभ बनकर खड़ा था। जब तक इस नीले आसमान में सूरज और चांद रहेंगे, तब तक निर्मल महतो का नाम और उनका विचार इस झारखंडी मिट्टी में महकता रहेगा।

शहीदों के सपनों का झारखंड… आखिरी झोपड़ी तक पहुंचेगा न्याय और अधिकार

जनसभा में मौजूद हजारों लोगों की भीड़ में किसान, मजदूर, महिलाएं और नौजवान शामिल थे, जो टकटकी लगाए मुख्यमंत्री की बातें सुन रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों की समाधि पर आकर सिर्फ फूल चढ़ा देना या दो शब्द कह देना काफी नहीं होता। सच्ची श्रद्धांजलि तो तब होगी जब हम उनके दिखाए रास्ते पर चलेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य के हर गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासी और मूलवासी के हक और अधिकारों की रक्षा करना उनकी सरकार का सबसे पहला और अटूट संकल्प है।

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि शहीदों ने एक ऐसे झारखंड की कल्पना की थी, जहां कोई भूखा न सोए, जहां हर गरीब की आवाज सुनी जाए और जहां समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी बराबरी का दर्जा मिले। सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। शहीदों के त्याग की प्रेरणा से ही आज राज्य की योजनाएं सीधी गांवों, टोलों और जंगलों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। जब तक झारखंड के आखिरी घर की झोपड़ी तक विकास और सम्मान की रोशनी नहीं पहुंच जाती, तब तक यह यात्रा रुकने वाली नहीं है।

अटूट भाईचारा और सामाजिक एकजुटता ही झारखंड की असली ढाल

मुख्यमंत्री ने राज्य के ताने-बाने और आपसी भाईचारे पर बात करते हुए कहा कि झारखंड के लोगों की सबसे बड़ी ताकत उनकी आपसी एकजुटता है। उन्होंने कहा कि हमारे वीरों ने हमें सिखाया है कि जब तक हम सब मिलकर एक साथ खड़े रहेंगे, कोई भी ताकत हमें तोड़ नहीं सकती। आज के दौर में कुछ षड्यंत्रकारी और बाहरी ताकतें झारखंड की इसी अटूट एकता में दरार डालने की साजिशें रच रही हैं। वे चाहते हैं कि यहां के लोग आपस में लड़ें और अपनी पहचान को भूल जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की जनता का इतिहास संघर्ष का रहा है। जब-जब बाहर से किसी ने इस राज्य के स्वाभिमान पर हमला करने या यहां के लोगों को दबाने की कोशिश की है, तब-तब झारखंडियों ने हर भेदभाव भूलकर एक साथ खड़े होकर उनका मुकाबला किया है। यही हमारी असली विरासत है और यही हमारी ताकत है, जिसे कोई साजिश कमजोर नहीं कर सकती।

जब एक वीर की गाथा से जुड़ती चली गईं दूसरे शहीदों की यादें

माहौल उस वक्त और भी ज्यादा भावुक हो गया जब सीएम हेमंत सोरेन ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन और झारखंड आंदोलन के अन्य पुरोधाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि झारखंड वीरों की ऐसी जननी है, जहां अगर आप किसी एक वीर की गाथा सुनाना शुरू करेंगे, तो उससे दूसरे अनेक शहीदों और आंदोलनकारियों के बलिदान की कड़ियां अपने आप जुड़ती चली जाएंगी। हाल ही में हम सभी ने दिशोम गुरु जी को भी याद किया था और उनका आशीर्वाद लिया था। ये सभी वे मार्गदर्शक थे जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी झारखंडी अस्मिता की रक्षा में खपा दी। उन्होंने कहा कि आज भले ही निर्मल दा या अन्य वीर शहीद हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन उनकी सोच, उनका संघर्ष और उनके आदर्श हर पल हमारे साथ चलते हैं। जब भी जीवन में कोई मुश्किल रास्ता आता है, तो शहीदों की यह पावन धरती और उनकी यादें हमें सही दिशा दिखाती हैं।

संकल्प और विश्वास के साथ संपन्न हुआ शहादत दिवस

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने उलियान की धरती पर मौजूद हर एक व्यक्ति का आभार जताया और कहा कि शहीदों की यह पावन स्मृति हमें हर दिन और ज्यादा निडर होकर काम करने की शक्ति देती है। हम बिना डरे, बिना थके और बिना रुके शहीदों के सपनों के मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध झारखंड के निर्माण के लिए आगे बढ़ते रहेंगे।

इस ऐतिहासिक और भावुक मौके पर विधायक सबिता महतो, विधायक समीर मोहंती, विधायक संजीव सरदार, विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत में जब पूरा उलियान परिसर ‘निर्मल महतो अमर रहें’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा, तो ऐसा लगा मानो उलियान की मिट्टी ने अपने वीर सपूत को एक बार फिर अपने आगोश में ले लिया हो।

इसे भी पढ़ें : आग से लड़ने को तैयार 58 नये साथी, CM हेमंत बोले- संकरी गलियों तक भी पहुंचेगी दमकल

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