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Home » ‘कागजी जादूगरी’ कर किया करोड़ों का गोलमाल, CID ने मास्टरमाइंड को पटना से दबोचा
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‘कागजी जादूगरी’ कर किया करोड़ों का गोलमाल, CID ने मास्टरमाइंड को पटना से दबोचा

July 9, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : झारखंड के बोकारो जिले में ‘कागजी जादूगरी’ और अफसरों की मिलीभगत से हुए करोड़ों रुपये के वन भूमि घोटाले में जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। CID ने मामले के मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड शैलेश कुमार सिंह को पटना से गिरफ्तार कर लिया है। सीआईडी उसे रांची लेकर आई, जहां कोर्ट के आदेश पर उसे सीधे होटवार जेल भेज दिया गया।

यह पूरा मामला बोकारो के तेतुलिया मौजा में 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि (Reserved Forest Land) की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है। इस महाघोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे इसमें ऐसे खुलासे हो रहे हैं जिन्हें सुनकर जांच अधिकारी भी हैरान हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस खेल की मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही है।

कैसे हुआ कागजों पर करोड़ों का यह ‘महाखेल’

पहली हेराफेरी : 9 साल के बच्चे को बना दिया जमीन खरीदार

इस पूरे घोटाले की नींव एक बेहद ही अजीबोगरीब और झूठे दावे पर रखी गई थी। मुख्य किरदारों में से एक इजहार अंसारी ने दावा किया कि उसके दादा समिरुद्दीन अंसारी (उर्फ समीर महतो) ने 20 सितंबर 1933 को एक सरकारी नीलामी के जरिए यह 103 एकड़ जमीन खरीदी थी।

जब ईडी और सीआईडी ने पुराने रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्र खंगाले, तो खेल पकड़ा गया। समिरुद्दीन अंसारी का जन्म 26 मार्च 1924 को हुआ था। यानी 1933 में जिस समय नीलामी का दावा किया गया, उस समय उनके दादा की उम्र महज 9 साल 5 महीने थी। कानून के मुताबिक, एक छोटा बच्चा किसी सरकारी नीलामी में शामिल ही नहीं हो सकता। यहीं से साफ हो गया कि सारे दस्तावेज फर्जी हैं।

दूसरी हेराफेरी : सर्किल रेट से 11 गुना महंगी बेची जमीन

सरकारी रिकॉर्ड में इस संरक्षित वन भूमि को निजी जमीन दिखाने के बाद इसे बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने का खेल शुरू हुआ। इसमें ‘उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी को आगे किया गया।

  • तेतुलिया मौजा में जमीन का सरकारी सर्किल रेट सिर्फ 50 हजार रुपये प्रति डिसमिल था।
  • लेकिन कंपनी ने नियमों को ठेंगे पर रखकर यही जमीन 5 लाख 50 हजार रुपये प्रति डिसमिल (11 गुना ज्यादा) के रेट पर 20 अलग-अलग खरीदारों को बेच दी।

जांच में ईडी ने एक उदाहरण दिया। बेबी देवी नाम की महिला ने यहां 5 डिसमिल जमीन खरीदी। सरकारी कागज पर इसकी कीमत सिर्फ 2.50 लाख रुपये दिखाई गई, लेकिन असलियत में कंपनी को 22 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया। यानी ऑन-पेपर और ऑन-टेबल रकम में सीधे 9 गुना का अंतर मिला।

तीसरी हेराफेरी : सरकारी दफ्तर से फाड़ दिए रिकॉर्ड के पन्ने

इस जालसाजी को छिपाने के लिए सरकारी दफ्तरों के रिकॉर्ड तक को नष्ट कर दिया गया। तीन सदस्यीय जांच समिति ने जब फाइलों की जांच की, तो पता चला कि:

  • वर्ष 1993 के वॉल्यूम नंबर 58 में दर्ज 40 सेल डीड (Registry Documents) से जुड़े बेहद जरूरी पन्ने फाड़कर गायब कर दिए गए थे।
  • एक सेल सर्टिफिकेट (नंबर 191/193) को साल 2025 में जारी हुआ दिखाया गया, जबकि पुरुलिया के रजिस्ट्रार ऑफिस में इसका कोई नामोनिशान ही नहीं था।

इस खेल में गिरफ्तार शैलेश सिंह की क्या भूमिका थी

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शैलेश कुमार सिंह ही इस पूरे सिंडिकेट का सबसे शातिर मोहरा था। उसने जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले अंसारी भाइयों (इजहार अंसारी और अख्तर अंसारी) से ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ ले ली थी। इसके बाद शैलेश ने अपनी कंपनी के जरिए अंसारी भाइयों से करीब 75 एकड़ वन भूमि को लगभग 10 करोड़ रुपये में खरीदा और फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसे आम लोगों को बेचकर करोड़ों की अवैध कमाई की।

रडार पर कई और रसूखदार, सीओ पहले ही सस्पेंड

वन विभाग की संरक्षित भूमि को निजी बताकर बेचना बिना सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के मुमकिन नहीं था। इस मामले में राजस्व विभाग के कई अधिकारियों पर तलवार लटकी हुई है। घोटाले में मदद करने के आरोपी एक अंचल अधिकारी (CO) को सरकार पहले ही नौकरी से बर्खास्त कर चुकी है। सीआईडी का कहना है कि शैलेश सिंह की गिरफ्तारी (थाना कांड संख्या 04/2025) के बाद पूछताछ में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होना तय है।

इसे भी पढ़ें : AI के दम पर बदलेगी झारखंड की सूरत, सीएम हेमंत ने की टेक दिग्गजों के साथ बैठक

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