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Home » खेतों से शहर तक हाथियों का आतंक, कोडरमा में हर रात खौफ
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खेतों से शहर तक हाथियों का आतंक, कोडरमा में हर रात खौफ

July 17, 2026No Comments4 Mins Read
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Koderma (Aftab Alam) : कोडरमा में इन दिनों सूरज ढलते ही लोगों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। वजह है जंगली हाथियों का बढ़ता आतंक। पहले जंगल और उससे सटे गांवों तक सीमित रहने वाले हाथी अब शहरी इलाकों में भी दिखाई देने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग रात में घरों से निकलने से डर रहे हैं। जंगल किनारे बसे गांवों में परिवार पूरी रात जागकर पहरा दे रहे हैं, क्योंकि किसी को नहीं पता कि हाथियों का झुंड कब गांव में घुस आए। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि हाथियों के हमलों में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लगातार बढ़ते मानव और हाथी संघर्ष ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

बेरहवा जंगल में डेरा डाले है 25 हाथियों का झुंड

ताजा मामला मरकच्चो प्रखंड के बेरहवा जंगल का है। यहां करीब 25 हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से डेरा जमाए हुए है। दिनभर हाथी जंगल के भीतर रहते हैं, लेकिन रात होते ही भोजन की तलाश में गांवों की ओर निकल पड़ते हैं। बीती रात हाथियों ने नादकरी, महुआटांड और हरलाडीह गांव में जमकर उत्पात मचाया। खेतों में तैयार धान के बिचड़ों को रौंद डाला और कई जगह तोड़फोड़ भी की। देखते ही देखते किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो गई।

पटाखे फोड़े, शोर मचाया, तब जाकर खिसके हाथी

हाथियों के गांव में घुसने की खबर मिलते ही ग्रामीण एकजुट हो गए। लोगों ने लूप और पटाखे जलाकर काफी देर तक हाथियों को भगाने की कोशिश की। लंबी मशक्कत के बाद झुंड को पास के जंगल की ओर खदेड़ा जा सका। हालांकि ग्रामीण राहत की सांस लेने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि हाथियों का झुंड अब भी आसपास के जंगल में मौजूद है और किसी भी रात फिर से गांव का रुख कर सकता है। इसी डर से कई गांवों में लोग रातभर पहरा दे रहे हैं।

मानसून ने पहले सताया, अब हाथियों ने उजाड़ दी उम्मीद

इस बार बारिश समय पर नहीं हुई। इसके बावजूद किसानों ने किसी तरह मेहनत करके धान का बिहन तैयार किया था। उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी फसल होगी और नुकसान की भरपाई हो जाएगी। लेकिन हाथियों ने कुछ ही मिनटों में सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में तैयार धान के बिचड़े पूरी तरह नष्ट हो गए। किसानों का कहना है कि अब दोबारा बिहन तैयार करना आसान नहीं है। इससे खेती का पूरा सीजन प्रभावित हो सकता है और आर्थिक संकट भी गहरा जाएगा। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से जल्द मुआवजा देने और हाथियों के आतंक से बचाने के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है।

अब शहर तक पहुंच रहे हाथी, बढ़ी लोगों की चिंता

कोडरमा में हालात इसलिए भी चिंताजनक हैं क्योंकि अब हाथियों की मौजूदगी सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रही। हाल के दिनों में शहरी क्षेत्रों में भी हाथी देखे गए हैं। इससे शहर के लोगों में भी दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले हाथी जंगलों तक ही सीमित रहते थे, लेकिन अब उनका आबादी वाले इलाकों तक पहुंचना साफ संकेत है कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास तेजी से प्रभावित हो रहा है।

वन विभाग पर विधायक ने उठाए सवाल

कोडरमा विधायक डॉ. नीरा यादव ने हाथियों के बढ़ते आतंक को गंभीर बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लगातार डर के साए में जी रहे हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से अपेक्षित सक्रियता नहीं दिख रही है। विधायक ने कहा कि एक तरफ जंगलों की लगातार कटाई हो रही है, दूसरी तरफ वन विभाग प्रभावी कदम नहीं उठा रहा। इसका नतीजा यह है कि हाथियों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है और वे मजबूरी में रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते सरकार ने इस समस्या का समाधान नहीं किया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

कोडरमा चारों तरफ जंगलों से घिरा, इसलिए खतरा ज्यादा

कोडरमा के डीएफओ सौमित्र शुक्ला का कहना है कि जिला चारों ओर से जंगलों से घिरा हुआ है। ऐसे में जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोग सबसे अधिक संवेदनशील हैं। उन्होंने बताया कि कई ग्रामीण अब भी कच्चे और मिट्टी के मकानों में रहते हैं। ऐसे घर हाथियों के हमले के दौरान ज्यादा सुरक्षित नहीं होते। इसलिए वन विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है और लोगों से सतर्क रहने की अपील भी की जा रही है।

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