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Home » रात के सन्नाटे में रेस हुई मधुबनी पुलिस, भोर होते-होते आर्केस्ट्रा के नर्क से 40 लड़कियां आजाद
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रात के सन्नाटे में रेस हुई मधुबनी पुलिस, भोर होते-होते आर्केस्ट्रा के नर्क से 40 लड़कियां आजाद

September 15, 2026No Comments4 Mins Read
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Madhubani : जिस उम्र में हाथों में स्कूल का बस्ता और आंखों में बेहतर कल के सपने होने चाहिए थे, उस उम्र में वे तेज आवाज में बजते लाउडस्पीकरों, अश्लील गानों और शराबी भीड़ की गंदी नजरों के बीच घुट रही थीं। किसी को मजबूरी का फायदा उठाकर तो किसी को बेहतर जिंदगी का लालच देकर आर्केस्ट्रा के इस दलदल में झोंक दिया गया था। अंधेरे कमरों में बंद ये मासूम लड़कियां बर्बादी की उस दहलीज पर खड़ी थीं, जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं बचता। बीती रात मधुबनी पुलिस के एक बड़े ऑपरेशन ने इन 40 मासूम जिंदगियों को एक नई सुबह दी।

आधी रात को बना प्लान, भोर तक गूंजती रही पुलिस की सायरन

पटना स्थित कमजोर वर्ग के एडीजी कार्यालय और मिशन मुक्ति फाउंडेशन को लगातार इन बच्चियों की बेबसी की भनक लग रही थी। खबर पक्की होते ही मधुबनी के एसएसपी योगेंद्र कुमार ने मिशन को अंजाम देने का जिम्मा साइबर डीएसपी अंकुर कुमार और एएसपी मुख्यालय रश्मि कुमारी को सौंपा। देर रात एक सीक्रेट टीम बनाई गई, जिसमें महिला थाना, मानवाधिकार संस्था और चाइल्डलाइन को जोड़ा गया। रात के सन्नाटे में पुलिस की कई गाड़ियां एक साथ निकलीं और बासोपट्टी, अरेर, बेनीपट्टी, खजौली और लौकहा थाना इलाकों में बने आर्केस्ट्रा ठिकानों की घेराबंदी कर ली गई।

जब दरवाजा टूटा तो सहमी आंखों में दिखे आंसू

ठिकानों पर छापा पड़ा तो नजारा बेहद दर्दनाक था। पतली गलियों और बंद तंग कमरों में नाबालिग बच्चियों को छिपाकर रखा गया था। जब अचानक पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तो पहले तो बच्चियां दहशत से कांपने लगीं। उन्हें लगा कि शायद कोई नया आफत आ गया है। लेकिन जैसे ही महिला पुलिसकर्मियों ने आगे बढ़कर प्यार से सिर पर हाथ रखा और कहा कि डरो मत, हम तुम्हें घर ले जाने आए हैं, तो मासूमों के सब्र का बांध टूट पड़ा। बच्चियां महिला पुलिसकर्मियों से लिपटकर रोने लगीं। भोर का उजाला फैलने तक पुलिस ने एक-एक कर कुल 40 नाबालिग बच्चियों को उस नर्क से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

तीन राज्यों से जुड़े हैं इस गंदे धंधे के तार

यह सिर्फ एक जिले का खेल नहीं था, बल्कि दूसरे राज्यों तक फैला पूरा रैकेट था। पुलिस ने मौके से तीन महिलाओं सहित कुल 15 आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में पश्चिमी चंपारण के इरफान आलम, राहुल सिंह, नंदलाल प्रसाद और अजय कुमार शामिल हैं। वहीं मधुबनी के स्थानीय धंधेबाज श्याम कुमार यादव, देवचंद्र परनामी, संजन कुमार दास और नंदकिशोर यादव भी दबोचे गए। मामले में पश्चिम बंगाल के नादिया का समरशिल, 24 परगना का काशीनाथ मंडल, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज का आयुष शर्मा और सीवान का परमेश्वर राम भी पुलिस के हत्थे चढ़ा। ये लोग गरीबी का शिकार बेटियों को फुसलाकर लाते थे और उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह जबरन काम कराते थे।

अब सीलबंद जिंदगी से आएंगी बाहर, फाइलों में दर्ज हुआ दर्द

रेस्क्यू के बाद सभी 40 बच्चियों को सुरक्षित महिला थाना लाया गया, जहां उन्हें खाना खिलाया गया और महिला अफसरों ने उनकी काउंसलिंग की। पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ महिला थाने में बीएनएस, पॉक्सो एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और बंधुआ मजदूरी निवारण कानून की बेहद सख्त धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुरुष आरोपियों को सीधे जेल भेजा जा रहा है। वहीं कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन बच्चियों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा, ताकि वे अपने परिवारों के पास लौट सकें। रात भर चले इस ऑपरेशन ने 40 घरों के बुझते चिरागों को फिर से रोशन कर दिया।

सराहनीय रही इनकी भूमिका

नाबालिगों के रेस्क्यू और रैकेट का पर्दाफाश करने में मधुबनी की ASP रश्मि कुमारी, साइबर डीएसपी अंकुर कुमार, AHTU प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील कुमार, प्रभारी , CCTNS प्रभारी इंस्पेक्टर अमित कुमार, इंस्पेक्टर शमशाद आलम, महिला थानेदार रीना भारती और एसआई रंजू कुमारी की भूमिका सराहनीय रही।

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