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Nepal : नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने कई जिलों में भारी तबाही मचा दी है। रसुवा जिले में आई इस आपदा के बाद अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 403 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक लापता लोगों में 62 नेपाली और 341 विदेशी नागरिक हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। लापता लोगों में 200 महिलाएं और 203 पुरुष हैं।
रसुवा में आई बाढ़ का असर नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में सबसे ज्यादा देखा गया है। यह इलाका चीन के साथ नेपाल के प्रमुख व्यापार मार्ग के लिए बेहद अहम है। बाढ़ के पानी ने सड़क, पुल, हाईवे और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई निचले इलाकों में बस्तियां पानी की चपेट में आ गईं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम लगातार जारी है।
चीन के तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है….भोटेकोशी नदी का पानी अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके के कई घरों, बाजारों और दूसरी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है….8 लोगों की मौत,142 भारतीय सहित 251 विदेशी पर्यटकों के लापता होने की… pic.twitter.com/EHTsLCjshS
— Garima Bharti (@GarimaBharti19) August 26, 2026
भूकंप और हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी में आई बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए बताया कि रसुवा में आई आपदा की वजह भूकंप के साथ हुआ हिमस्खलन बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी आगे पुष्टि की जा रही है। उनके मुताबिक सुबह करीब 8:37 बजे भूकंप आया और इसके कुछ ही समय बाद करीब 8:40 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई।
बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट जिले के कई इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, त्रिशूली बत्तर और देवीघाट समेत कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर है। सरकार ने माना है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे अभी भी खतरा बना हुआ है।
विदेश मंत्री ने नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन के नदी किनारे रहने वाले लोगों से खास सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन को प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
26 देशों के लोग लापता, 133 भारतीयों से संपर्क नहीं
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार लापता 403 लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। माना जा रहा है कि इन लोगों का संबंध 26 अलग-अलग देशों से है। इनमें भारत के 133, अमेरिका के 47 और ब्रिटेन के 33 नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर के बाद संबंधित देशों के दूतावास भी सक्रिय हो गए हैं। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के संबंध में जानकारी लेने के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। भारतीय नागरिक या उनके परिजन +9779851316807 और +9779709107500 पर संपर्क कर सकते हैं।
A horrific scene of severe flooding at the Rasuwagadhi border point on the Nepal-Tibet border.
The strong currents wreaked havoc across the area, leaving 400 pilgrims and 105 Indian tourists also missing in the Nepal floods.#NepalFloods #Nepal #Rasuwa #FlashFlood #Floods pic.twitter.com/dwAX12Gj7l— Ravi Pandey🇮🇳 (@ravipandey2643) August 26, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के PM बालेंद्र शाह से की बात
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने बाढ़ में हुई जनहानि पर दुख जताते हुए नेपाल को हर संभव मानवीय मदद का भरोसा दिया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है और भारतीय टीमें राहत और बचाव कार्यों में नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
सेना और हेलीकॉप्टरों से चल रहा बचाव अभियान
नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक सेना और निजी हेलीकॉप्टरों की मदद से रसुवागढ़ी, तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और मैलुंग के प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने प्रभावित जिलों को तीन महीने के लिए आपदा संभावित क्षेत्र घोषित करने का फैसला किया है। घायलों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था भी की जा रही है। राहत और बचाव अभियान में सेना के साथ अलग-अलग सरकारी एजेंसियों को लगाया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपात बैठक के बाद कहा कि चिकित्सा दल, स्काउट्स और रेड क्रॉस के समन्वय से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि प्रभावित इलाकों तक जल्द से जल्द राहत सामग्री और मेडिकल सहायता पहुंचाई जाए।
चीन और भारत से मदद के लिए बातचीत
बाढ़ से नेपाल-चीन व्यापार मार्ग को भी बड़ा झटका लगा है। रसुवा के रास्ते चीन से होने वाला व्यापार प्रभावित हुआ है। कई जगह सड़क और पुल टूटने से संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। नेपाल सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि राहत और बचाव के लिए चीन और भारत दोनों से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय के जरिए दोनों देशों के साथ समन्वय किया जा रहा है। चीन ने आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी है, जबकि भारत ने भी हर संभव मदद का भरोसा दिया है। सरकार ने हेलीकॉप्टर से बचाव की जरूरत पड़ने पर लोगों से आपातकालीन सहायता नंबर 1234 पर संपर्क करने को कहा है।
भोटेकोशी और त्रिशूली किनारे अब भी खतरा
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ से हुए नुकसान पर दुख जताया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और अफवाहों से बचने की अपील की है। चीन की सरकारी मीडिया सीसीटीवी ने भी तिब्बत में बड़े पैमाने पर नुकसान की जानकारी दी है। रसुवा इलाका तिब्बत से सटा हुआ है और नेपाल-चीन के बीच प्रमुख व्यापार मार्ग यहीं से होकर गुजरता है।
2015 के भूकंप के बाद सबसे बड़ी आपदा जैसी स्थिति
नेपाल में इस आपदा ने 2015 के विनाशकारी भूकंप की यादें ताजा कर दी हैं। 2015 के भूकंप में करीब 9 हजार लोगों की मौत हुई थी। अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है। भोटेकोशी नदी के किनारे रसुवा और नुवाकोट की कई बस्तियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। आबादी कम होने के बावजूद यह इलाका नेपाल के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां की सड़कें और पुल चीन के साथ व्यापार की मुख्य कड़ी हैं।
पिछले साल भी इसी इलाके में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान 18 लोगों की मौत हुई थी और 6 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था। इस बार शुरुआती तस्वीर उससे कहीं ज्यादा भयावह नजर आ रही है।
नेपाल सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नदी किनारे और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। 403 लोगों के लापता होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जबकि भारत और चीन से मिलने वाली मदद के बीच नेपाल सरकार ने पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है।
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