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Pakur (Jaydev Kumar) : अक्सर सरकारी स्कूलों की तस्वीर जेहन में आते ही वही घिसी-पिटी बातें याद आती हैं, हाजिरी, मिड-डे मील और इम्तिहान में पास होने की जद्दोजहद। मगर पाकुड़ जिले के स्कूलों में अब हवा का रुख कुछ अलग होने वाला है। जिला प्रशासन ने यह ठान लिया है कि बच्चों को केवल किताबों के पन्ने पलटना नहीं सिखाना है, बल्कि उन्हें जिंदगी जीने का सलीका भी बताना है। इसी सोच के साथ रविंद्र नगर भवन के खचाखच भरे हॉल में ‘नव दिशा पाकुड़’ का आगाज हुआ, जहां बच्चों के भविष्य को नई उड़ान देने के लिए एक साझा खाका खींचा गया।
नंबरों की होड़ से आगे, इंसान बनने की सीख
सभागार में जुटी भीड़ और उत्सुकता से भरी नन्हीं आंखों के सामने उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने अपनी बात बिल्कुल सीधे और अपने अंदाज में रखी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई सिर्फ कॉपियों को भरने या परीक्षा में ज्यादा अंक बटोरने का जरिया नहीं है। असल तालीम वह है जो बच्चे के भीतर खुद पर भरोसा जगाए और उसे जिम्मेदार नागरिक बनाए। उन्होंने बच्चों से एक बेहद खास बात कही कि जिस स्कूल में वे रोज आते हैं, वह किसी गैर का नहीं बल्कि उनका अपना है। वहां की एक-एक बेंच, खिड़की और किताब उनकी अमानत है, जिसे संभालना उनकी खुद की जिम्मेदारी है। साथी बच्चों के साथ कैसे बर्ताव करना है, बराबरी और इज्जत के क्या मायने होते हैं, इन छोटी मगर बुनियादी बातों पर खुलकर चर्चा हुई।

तकनीक और काउंसलिंग बनेगी बच्चों की ताकत
इस पूरी मुहिम में तकनीकी साझेदार फिलोएड टेक की भूमिका भी अहम रहने वाली है, जिनके साथ मिलकर एक खास मार्गदर्शिका तैयार की गई है। कार्यक्रम में मौजूद जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिता पुरती ने साफ किया कि ‘नव दिशा’ केवल एक दिन का जलसा नहीं, बल्कि स्कूलों में लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। इसके जरिए बच्चों को करियर की सही राह चुनने के लिए जरूरी काउंसलिंग मिलेगी और नए तौर-तरीकों से सोचने की आजादी भी दी जाएगी। मकसद साफ है कि पाकुड़ के दूर-दराज इलाकों से आने वाले किसी भी बच्चे में झिझक न रहे और वह आत्मविश्वास से भरी दुनिया में मजबूती से कदम रख सके।
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