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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ स्थित मेसर्स श्री राम पावर एवं स्टील फैक्ट्री में हुए फर्नेस ब्लास्ट के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना की जांच में फैक्ट्री के अंदर सुरक्षा व्यवस्था की कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच के दौरान अग्निशमन के लिए रखे गए 3 DCP और 2 CO₂ सिलेंडर खराब मिले। सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाने वाले विद्युत पैनल बोर्ड के पास भी आग बुझाने का कोई उपकरण नहीं था। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्रवाई करते हुए उत्पादन और संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। वहीं, प्रबंधन की लापरवाही को लेकर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की गई है।
जांच में खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
फैक्ट्री में फर्नेस ब्लास्ट की घटना के बाद रामगढ़ के SDO के नेतृत्व में जांच समिति बनाई गई थी। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर ब्लास्ट की वजह और फैक्ट्री में मौजूद सुरक्षा इंतजामों की जांच की। जांच के दौरान कई ऐसी कमियां मिलीं, जिन्हें सामान्य लापरवाही नहीं माना जा सकता। मौके पर रखे 3 DCP और 2 CO₂ अग्निशमन यंत्र खराब हालत में मिले। यानी जिस समय आग जैसी आपात स्थिति में इन उपकरणों की जरूरत पड़ सकती थी, उस समय इनके भरोसे रहना मुश्किल था। औद्योगिक इकाई में जहां फर्नेस और दूसरे संवेदनशील उपकरणों के साथ काम होता है, वहां अग्निशमन उपकरणों का चालू हालत में रहना बेहद जरूरी है।
जांच टीम को सबसे गंभीर कमी विद्युत पैनल बोर्ड के पास मिली। यहां एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं रखा गया था। बिजली के पैनल में शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी गड़बड़ी से आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर आग पर काबू पाने के लिए जरूरी इंतजाम तक नहीं था। रिपोर्ट में फैक्ट्री परिसर में औद्योगिक और आपातकालीन सुरक्षा से जुड़े जरूरी मानकों के पालन में भी कमी बताई गई है।
DC के निर्देश पर बंद हुआ उत्पादन, कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट
जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद रामगढ़ के DC ने मामले को गंभीरता से लिया। प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से सुरक्षा नियमों की अनदेखी को गंभीर लापरवाही माना और कारखाना निरीक्षक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अब मामले में नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। प्रशासन की ओर से यह भी साफ कर दिया गया है कि औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जांच के आधार पर फैक्ट्री का उत्पादन और पूरा संचालन भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। सक्षम प्राधिकार की ओर से लागू औद्योगिक और सुरक्षा प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है। फैक्ट्री में दोबारा कामकाज शुरू होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जरूरी मानकों का पालन करना होगा।
अब जिले की सभी फैक्ट्रियों की होगी जांच, एक महीने में रिपोर्ट मांगी
श्री राम पावर एवं स्टील फैक्ट्री में मिली खामियों के बाद जिला प्रशासन ने जिले की दूसरी औद्योगिक इकाइयों को लेकर भी सख्ती शुरू कर दी है। उपायुक्त ने कारखाना निरीक्षक, श्रम अधीक्षक और अग्निशमन अधिकारी को निर्देश दिया है कि अगले एक महीने के भीतर जिले में संचालित सभी औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया जाए।
अधिकारियों को औचक जांच के दौरान यह देखना होगा कि फैक्ट्रियों में अग्निशमन उपकरण सही हालत में हैं या नहीं, संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं या नहीं और श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। केवल कागजों पर सुरक्षा व्यवस्था दर्ज होने के बजाय मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति भी देखी जाएगी।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जांच के दौरान जिस भी औद्योगिक इकाई में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या गंभीर खामी मिलेगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। श्री राम पावर एवं स्टील फैक्ट्री पर हुई कार्रवाई के बाद अब जिले की दूसरी फैक्ट्रियों में भी सुरक्षा इंतजामों की जांच तेज होने वाली है। इससे औद्योगिक इकाइयों के संचालकों पर अपने यहां सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने का दबाव बढ़ गया है।
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