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Chhapra : रजिस्ट्री कराने के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़े और छोटी-छोटी जानकारी के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ें, अब इस तस्वीर को बदलने की कोशिश सारण में जमीन पर दिखाई देने लगी है। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को सिर्फ कागज कम करने वाली व्यवस्था नहीं माना, बल्कि इसे आम आदमी के लिए आसान बनाने पर जोर दिया। उनकी इसी सोच के तहत दस्तावेज नवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं की बैठक से लेकर प्रशिक्षण, मोबाइल पर हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस, लाइसेंस निर्गमन और आम लोगों को जानकारी देने तक लगातार काम किया गया। अब इसका असर भी दिखने लगा है। 2 सितंबर को जिला स्तरीय अवर निबंधन कार्यालय, सारण में 28 अपॉइंटमेंट दर्ज हुए। वहीं एकमा और परसा के अवर निबंधन कार्यालय में 6-6 अपॉइंटमेंट हुए। यानी एक दिन में तीनों कार्यालयों में कुल 40 अपॉइंटमेंट दर्ज किए गए।
खास बात यह है कि पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था शुरू होने के शुरुआती दिनों में अपॉइंटमेंट की संख्या दो, तीन या चार तक ही सीमित रहती थी। ऐसे में अचानक बढ़ी संख्या को प्रशासन की लगातार मेहनत का नतीजा माना जा रहा है। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने नई व्यवस्था को लागू करने के साथ यह भी समझा कि केवल नियम लागू कर देने से काम नहीं चलेगा। पहले उससे जुड़े लोगों को समझाना होगा और फिर आम नागरिकों के लिए रास्ता आसान करना होगा। इसी दिशा में जिला प्रशासन लगातार काम कर रहा है।

डीएम ने पहले लोगों की परेशानी समझी, फिर समाधान पर किया काम
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर शुरुआत में दस्तावेज नवीसों और स्टाम्प विक्रेताओं के बीच कई सवाल और आशंकाएं थीं। नई डिजिटल प्रक्रिया उनके लिए भी नई थी। डीएम के निर्देश पर प्रशासन ने इसे नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित लोगों के साथ बैठक की और उनकी समस्याओं को सुना। उन्हें बताया गया कि नई व्यवस्था में क्या बदलाव हुआ है और रजिस्ट्री की प्रक्रिया किस तरह पूरी करनी है।
इसके बाद केवल कागज पर प्रशिक्षण देने के बजाय उन्हें मोबाइल और डिजिटल माध्यम से खुद प्रक्रिया करके समझाई गई। हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस के जरिए यह कोशिश की गई कि दस्तावेज नवीस और स्टाम्प विक्रेता नई व्यवस्था को व्यवहार में भी समझ सकें। इसका सीधा फायदा रजिस्ट्री कराने आने वाले आम लोगों को मिलना है। अब अगर किसी नागरिक को ऑनलाइन या डिजिटल प्रक्रिया में कोई दिक्कत आती है तो उससे जुड़े लोग उसे मौके पर ही सही जानकारी और मदद दे सकेंगे।
संबंधित लोगों की सुविधा को देखते हुए विशेष कैंप लगाकर जरूरी लाइसेंस जारी करने की कार्रवाई भी की गई। यानी प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने के साथ उससे जुड़े लोगों को तैयार करने पर भी बराबर ध्यान दिया। यही वजह है कि अब शुरुआती झिझक कम होती दिखाई दे रही है और लोग धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को अपना रहे हैं।

हेल्प डेस्क से लेकर फ्लो चार्ट तक, डीएम ने नागरिक सुविधा पर दिया जोर
डीएम वैभव श्रीवास्तव की पहल का एक अहम हिस्सा यह भी है कि रजिस्ट्री कार्यालय आने वाले आम लोगों को अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए जिला अवर निबंधन कार्यालय में ‘May I Help You’ हेल्प डेस्क बनाया गया है। पहली बार रजिस्ट्री कराने वाला व्यक्ति यहां पहुंचकर जरूरी दस्तावेज, शुल्क और पूरी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी ले सकता है।
कार्यालय में फ्लो चार्ट भी लगाया गया है। इसका मकसद यह है कि लोगों को रजिस्ट्री की प्रक्रिया समझने के लिए किसी के पीछे-पीछे भटकना न पड़े। एक नजर में उन्हें पता चल सके कि किस चरण में क्या करना है। अलग-अलग काउंटर की व्यवस्था भी व्यवस्थित की गई है, जिससे लोगों का काम आसानी से हो सके।
पेपरलेस व्यवस्था से कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की गई है। डिजिटल प्रक्रिया के जरिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और काम को व्यवस्थित करने में मदद मिल रही है। इससे लोगों का समय बचाने और अनावश्यक रूप से बार-बार कार्यालय आने की परेशानी कम करने की उम्मीद है।

मीडिया ने देखा पूरा सिस्टम, अब ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी जानकारी
डीएम के निर्देश पर पेपरलेस रजिस्ट्री को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए मीडिया प्रतिनिधियों को भी जिला अवर निबंधन कार्यालय का भ्रमण कराया गया। मीडिया प्रतिनिधियों ने कार्यालय में मौजूद अलग-अलग काउंटर, हेल्प डेस्क और नागरिक सुविधाओं को देखा।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई। किस काउंटर पर क्या काम होता है, रजिस्ट्री के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं, शुल्क से जुड़ी जानकारी क्या है और डिजिटल प्रक्रिया में नागरिकों को किस तरह मदद दी जाती है, इन सभी बिंदुओं की जानकारी दी गई।
प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था की सही जानकारी जितनी ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी, उतनी ही आसानी से लोग इसे अपना सकेंगे। इसी वजह से मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जा रही है।
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