अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
News Samvad : लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के वैज्ञानिकों ने टाइप-2 डायबिटीज को लेकर एक अहम खोज की है। इस रिसर्च में ऐसे जीन की पहचान की गई है, जो इस बीमारी के होने के खतरे को बढ़ाता है। खास बात ये है कि इससे न सिर्फ बीमारी का जोखिम पहले से पता चल सकेगा, बल्कि यह भी समझा जा सकेगा कि कौन-सी दवा किस मरीज पर ज्यादा असर करेगी।
क्या है पूरा मामला?
डायबिटीज को अक्सर लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी माना जाता है—जैसे गलत खानपान, कम एक्सरसाइज वगैरह। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि इसका एक मजबूत आनुवांशिक (जेनेटिक) पहलू भी है।
केजीएमयू की टीम ने खून में मौजूद एक खास जीन वेरिएशन (RS 2028299) की पहचान की, जो टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ा हुआ पाया गया।
कैसे हुआ रिसर्च?
यह स्टडी जनवरी 2022 से दिसंबर 2023 के बीच की गई और इसे Sultan Qaboos Medical Journal में प्रकाशित किया गया।
- रिसर्च में 60 डायबिटीज मरीज और 40 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया
- दोनों ग्रुप का BMI और फैमिली हिस्ट्री लगभग समान थी
- मरीजों की औसत उम्र 55 साल, जबकि स्वस्थ लोगों की 43 साल थी
वैज्ञानिकों ने खून के सैंपल लेकर तीन खास जेनेटिक बदलाव (SNPs) पर फोकस किया। इसके लिए PCR (Polymerase Chain Reaction) और Sanger Sequencing जैसी एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल किया गया—इन्हीं तकनीकों का उपयोग कोविड-19 जांच में भी हुआ था।
इलाज में भी मिलेगा फायदा
रिसर्च टीम की सदस्य डॉ. कौसर उस्मान के मुताबिक,
- अगर किसी व्यक्ति में यह जीन पहले ही पहचान लिया जाए, तो उसे समय रहते सावधान किया जा सकता है
- लाइफस्टाइल सुधार (डाइट, एक्सरसाइज) पहले से शुरू कराई जा सकती है
- आगे चलकर “पर्सनलाइज्ड मेडिसिन” यानी हर मरीज के हिसाब से दवा तय करना आसान होगा
देश में तेजी से बढ़ रही बीमारी
भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान के मुताबिक:
- करीब 15 करोड़ लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं
- बड़ी संख्या में लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं
यानी आने वाले समय में यह समस्या और बड़ी हो सकती है, अगर समय रहते कदम न उठाए जाएं।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
कुछ ऐसे फैक्टर हैं जो डायबिटीज का जोखिम बढ़ाते हैं:
- बढ़ती उम्र
- ज्यादा वजन (उच्च BMI)
- परिवार में डायबिटीज का इतिहास
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- पेट/कमर पर ज्यादा चर्बी
- तनाव और डिप्रेशन
आसान भाषा में समझें
अब तक हम सोचते थे कि डायबिटीज सिर्फ खानपान और आदतों की वजह से होती है। लेकिन इस रिसर्च ने दिखा दिया कि “जीन” भी इसमें बड़ा रोल निभाते हैं।
मतलब:
अगर आपके परिवार में डायबिटीज है, तो आपको और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है—क्योंकि रिस्क पहले से मौजूद हो सकता है।
निष्कर्ष
केजीएमयू की यह खोज भविष्य में डायबिटीज की पहचान और इलाज—दोनों को बदल सकती है। अब फोकस सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि बीमारी को पहले ही रोकने पर रहेगा।



