Close Menu
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Facebook X (Twitter) Instagram
Sunday, 18 October, 2026 • 10:52 am
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • AdSense Policy
  • Terms and Conditions
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo
News SamvadNews Samvad
  • HOME
  • INDIA
  • WORLD
  • JHARKHAND
    • RANCHI
  • BIHAR
  • UP
  • SPORTS
  • HOROSCOPE
  • CAREER
  • HEALTH
  • MORE…
News SamvadNews Samvad
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • बिजनेस
  • स्पोर्ट्स
  • राशिफल
Home » देश में पहली बार पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की आबादी, शहर और गांव में दिखा बड़ा अंतर
देश

देश में पहली बार पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की आबादी, शहर और गांव में दिखा बड़ा अंतर

March 8, 2022No Comments4 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Follow Us
Google News Flipboard Facebook X (Twitter)
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Telegram WhatsApp Email
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now

अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

auto

आज 8 मार्च है, तो ये भी मालूम होगा की दुनिया इसे इंटरनेशनल विमेंस डे के तौर पर मनाती है। लेकिन सबसे बड़ी बात शायद कम मालूम हो वह यह की अपने देश में आजादी के बाद ये पहला मौका है, जब औरतों की तादाद मर्दों से अधिक हो गई हैं, है न बड़ी बात।

आंकड़ों का ये हिसाब-किताब राष्ट्रीय परिवार और हेल्थ सर्वे-5 का है। इसके मुताबिक देश में प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाएं हो गई हैं। आजादी के बाद, यानी 1951 में ये आंकड़ा 946 था। और 2015 तक मर्दों की तुलना में औरतों का ये आंकड़ा 991 तक ही पहुंच पाया था। तो आज के मौके पर औरतों की कामयाबी का लेखा-जोखा करते हैं बारी-बारी से शहरों की तुलना में गांवों में 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या ज्यादा
यह पहली बार है जब देश में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक हो गई है। पांचवें राष्ट्रीय परिवार और हेल्थ सर्वे के अनुसार अब देश में 1,000 पुरुषों के मुकाबले 1,020 महिलाएं हैं। यह इसलिए भी खास है, क्योंकि हमारे देश में जहां पहले बच्चियों की भ्रूण हत्या हो जाती थी। यानी उनके लिए जीवन के अवसर लड़कों की तुलना में बेहद कम थे, वहां वे अब आगे बढ़ रही हैं। अब गांवों में 1,000 पुरुषों पर 1,037 और शहरों में 985 महिलाएं हैं। वहीं चौथे नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के हिसाब से गांवों में 1,000 पुरुषों की तुलना में 1,009 महिलाएं थीं और शहरों में ये आंकड़ा 956 का था।
बच्चों के सेक्स रेश्यो में भी सुधार की वजह से बढ़ी महिलाओं की संख्या
देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या ज्यादा होने की वजह यह है की जन्म के समय सेक्स रेश्यो में भी सुधार हुआ है। सेक्स रेश्यो का मतलब देश में जन्म लेने वाली लड़कों के मुकाबले लड़कियों का अनुपात। 2015-16 में जन्म के समय सेक्स रेश्यो प्रति 1000 बच्चों पर 919 बच्चियों का था, जो अब 929 हो गया है। इसी वजह से शहर और गांव दोनों ही जगहों पर प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या बढ़ी है। सबसे अच्छी बात तो यह है की यह सुधार शहरों की तुलना में गांवों में बेहतर हुआ है। गांवों में अब हर 1,000 पुरुषों पर 1,037 महिलाएं हैं, जबकि शहरों में 985 महिलाएं हैं।
सिर्फ संख्या ही नहीं, पढ़ाई और काम में भी महिलाएं आगे
अब देश की महिलाएं सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि पढ़ाई और काम के मामले में भी आगे बढ़ रही हैं। विज्ञान और गणित के ग्रेजुएट्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 43% हैं। यह संख्या अमेरिका 34%, ब्रिटेन 38%, जर्मनी 27% से बहुत ज्यादा है।

इसी तरह से काम की बात करें, तो देश में रजिस्टर्ड 50 हजार स्टार्टअप्स में 45% महिला उद्यमी हैं। महिलाओं के स्टार्ट-अप 5 साल की अवधि में पुरुषों से 10% अधिक राजस्व बनाते हैं और 3 गुना अधिक महिलाओं को रोजगार देते हैं। ये आंकड़े महिलाओं के दौर के आगाज का संकेत हैं।
बिजनेस में भी पुरुषों को पछाड़ने लगी महिलाएं, स्टार्टअप से 10% ज्यादा कमाई
बिजनेस में भी महिलाएं अमूल्य योगदान दे रही हैं। देश में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग से मान्यता प्राप्त 50,000 से अधिक स्टार्टअप हैं, जिनमें से कम से कम 45% महिला उद्यमी हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के अनुसार, महिलाओं द्वारा स्थापित या सह-स्थापित स्टार्ट-अप पांच साल की अवधि में पुरुषों से 10% अधिक रेवेन्यू बनाते हैं। ये स्टार्टअप में अधिक समावेशी कार्य संस्कृति है और पुरुषों की तुलना में 3 गुना अधिक महिलाओं को रोजगार देते हैं।
अगले 5 वर्षों में बढ़ेंगे महिलाओं की अगुआई वाले बिजनेस
बोस्टन कंसल्टिंग ने अपनी रिसर्च में बताया कि अगले 5 सालों में महिलाओं की अगुवाई वाले बिजनेस के 90% बढ़ने का अनुमान है। यही नहीं, 2030 तक 3 करोड़ से अधिक बिजनेस कंपनियों की मालिक महिलाएं होंगी और इन कंपनियों से 15 से 17 करोड़ नौकरियां मिलने की उम्मीद हैं।
मौजूदा समय में भारत में 1.57 करोड़ से अधिक बिजनेस कंपनियों की मालिक महिलाएं हैं, जिसमें स्टार्ट-अप भी शामिल हैं। MSME बिजनेस यानी माइक्रो, स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए महिलाएं पुरुषों से कर्ज ले रही हैं। महिलाओं ने 20.82 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया था, जबकि पुरुषों ने 11.56 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram WhatsApp Email
Previous Articleजहरीले सांप के डसने के बावजूद परीक्षा देने पहुंचा छात्र, लेकिन हुआ ये हाल…
Next Article घोड़े पर सवार होकर सदन पहुंचीं अंबा प्रसाद

Related Posts

Headlines

कोलकाता भगदड़ पर सीएम शुभेंदु का बड़ा ऐलान- मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख और सरकारी नौकरी

October 18, 2026
Headlines

कोलकाता पंडाल हादसे पर सीएम हेमंत ने जताया गहरा शोक, बोले- खबर से मन अत्यंत व्यथित

October 18, 2026
Headlines

कोलकाता के पंडाल में बारिश के बीच भगदड़… 17 की मौत, पीएम ने किया मुआवजे का ऐलान

October 18, 2026
Advertisement
  • Facebook
  • Twitter
  • Telegram
  • WhatsApp

Latest Post

राशिफल @ 18 अक्टूबर 2026… आज क्या कहता है आपका भाग्य… जानें

October 18, 2026

कोलकाता भगदड़ पर CM सम्राट ने जताया शोक, बोले- श्रद्धालुओं की मौत हृदयविदारक

October 18, 2026

कोलकाता भगदड़ पर सीएम शुभेंदु का बड़ा ऐलान- मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख और सरकारी नौकरी

October 18, 2026

कोलकाता पंडाल हादसे पर सीएम हेमंत ने जताया गहरा शोक, बोले- खबर से मन अत्यंत व्यथित

October 18, 2026

कोलकाता के पंडाल में बारिश के बीच भगदड़… 17 की मौत, पीएम ने किया मुआवजे का ऐलान

October 18, 2026
© 2026 News Samvad. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.