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Ranchi : एक मां की आंखों में डर था, पिता के चेहरे पर बेचैनी साफ दिख रही थी और परिवार के बाकी लोग बस यही दुआ कर रहे थे कि किसी तरह उनका बेटा बच जाए। बरसात के दिनों में सांप निकलने की खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन जब यही हादसा अपने घर में हो जाए तो हर पल पहाड़ जैसा लगने लगता है।
सीसीएल कर्मचारी भुनेश्वर मुंडा के परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके 22 वर्षीय बेटे लोकेश कुमार को जहरीले सांप ने डस लिया। कुछ ही देर में घर का माहौल बदल गया। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, लेकिन परिवार ने एक समझदारी भरा फैसला लिया। बिना समय गंवाए लोकेश को सीधे सीसीएल के केंद्रीय अस्पताल, डकरा ले जाया गया। यही फैसला उसकी जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी वजह बन गया।
डॉक्टरों ने एक पल की भी देरी नहीं की
डकरा केंद्रीय अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने हालात की गंभीरता को समझ लिया। औपचारिकताओं में समय गंवाने के बजाय तुरंत इलाज शुरू किया गया। लोकेश को एंटी स्नेक वेनम की 10 डोज दी गई और उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जाने लगी। डॉक्टरों को लगा कि मरीज को और बेहतर निगरानी की जरूरत है। इसलिए प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत केंद्रीय अस्पताल, गांधीनगर रेफर कर दिया गया। इलाज की यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी की गई।
दो दिन तक चली मौत से जंग
गांधीनगर केंद्रीय अस्पताल में अगले दो दिनों तक डॉक्टरों की टीम लगातार लोकेश की निगरानी करती रही। हर जांच, हर दवा और हर बदलाव पर बारीकी से नजर रखी गई। परिवार अस्पताल के बाहर उम्मीद लगाए बैठा था, जबकि डॉक्टर अस्पताल के भीतर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। धीरे-धीरे इलाज असर दिखाने लगा। युवक की हालत सुधरने लगी। जब डॉक्टरों ने बताया कि अब वह खतरे से बाहर है, तो परिवार की आंखों में राहत के आंसू छलक पड़े। कुछ समय पहले जो परिवार सबसे बुरी खबर सुनने के डर में था, वही अब अपने बेटे को स्वस्थ देखकर मुस्कुरा रहा था।
समय पर लिया गया फैसला बना जीवनदान
रांची के जाने-माने चिकित्सक डॉ उमा शंकर वर्मा कहते हैं कि सर्पदंश के मामलों में हर मिनट की अहमियत होती है। अगर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए और तुरंत एंटी स्नेक वेनम मिल जाए, तो जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
लोकेश के मामले में भी यही हुआ। परिवार ने झाड़-फूंक या घरेलू उपायों में समय नहीं गंवाया। सीधे अस्पताल पहुंचने का फैसला किया और डॉक्टरों ने भी बिना देर किए इलाज शुरू कर दिया। दोनों की यही सतर्कता एक युवा की जिंदगी बचाने में काम आई।
सिर्फ इलाज नहीं, भरोसा भी दे रहे सीसीएल के अस्पताल
यह घटना ये भी जता गया कि सीसीएल के अस्पताल सिर्फ कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं हैं, बल्कि मुश्किल वक्त में उम्मीद का सहारा भी बनते हैं। आधुनिक सुविधाएं, अनुभवी डॉक्टर और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की है। सीसीएल प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारियों, उनके परिवारों, हितधारकों और आसपास के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। यह घटना उसी प्रतिबद्धता की एक मिसाल बनकर सामने आई है।
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