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Ranchi : रांची की पहचान यहां के सुंदर पहाड़ों और शांत माहौल से है, लेकिन इसी शहर के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर परिसर में आज एक अलग ही चहल-पहल थी। अमूमन फाइलों और कोयले के उत्पादन की रणनीति में व्यस्त रहने वाले अधिकारी और कर्मचारी आज हाथों में झाड़ू और डस्टबिन थामे नजर आए। मौका था CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में बीते 15 दिनों से चल रहे ‘स्वच्छता पखवाड़ा-2026’ के समापन का। 16 जून को एक संकल्प के साथ शुरू हुआ यह सफर आज, 30 जून को जमीनी बदलाव और ढेरों उम्मीदों के साथ पूरा हुआ। सीसीएल मुख्यालय सहित इसके तमाम क्षेत्रों में इस पखवाड़े के दौरान सिर्फ दफ्तरों को ही नहीं चमकाया गया, बल्कि समाज के हर तबके को इस मुहिम से जोड़ने की कोशिश की गई।
दफ्तर से बाहर निकलकर जब बनी बात
समापन समारोह के मुख्य अतिथि सीसीएल के एचआर डायरेक्टर हर्ष नाथ मिश्र और टेक्निकल/ऑपरेशनल डायरेक्टर चंद्र शेखर तिवारी रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी भीड़ के बीच श्री हर्ष नाथ मिश्र ने बेहद सीधे शब्दों में एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कोई ऐसा काम नहीं है जिसे हम कैलेंडर देखकर 15 दिनों के लिए करें और फिर भूल जाएं। यह तो हमारे जीने का सलीका होना चाहिए। सीसीएल कोयला निकालने के साथ-साथ समाज को एक स्वस्थ और साफ वातावरण देने के लिए भी हमेशा खड़ा रहेगा। वहीं, श्री चंद्र शेखर तिवारी ने दफ्तरों के माहौल पर बात की। उनका मानना था कि एक साफ-सुथरी जगह पर काम करने से न सिर्फ मन खुश रहता है, बल्कि हादसे भी कम होते हैं और काम की रफ्तार अपने आप बढ़ जाती है। उन्होंने सभी से इसे अपनी रोज की आदत बनाने की अपील की।
“मिस्टर लापरवाह” ने जब आईना दिखाया
इस पूरे आयोजन का सबसे मजेदार और ध्यान खींचने वाला हिस्सा रहा नुक्कड़ नाटक, जिसका नाम था “मिस्टर लापरवाह”। जब कलाकारों ने ढोलक की थाप पर अपनी प्रस्तुति शुरू की, तो वहां मौजूद हर शख्स की नजरें वहीं टिक गईं। नाटक में बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में उन आदतों पर चोट की गई, जो हम अक्सर अनजाने में कर बैठते हैं… जैसे चलते-फिरते सड़क पर कचरा फेंक देना या गुटखा खाकर दीवारें गंदी करना। हंसते-हंसाते इस नाटक ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं हम भी अपने शहर के लिए “मिस्टर लापरवाह” तो नहीं बन रहे?

मंच पर जब तालियों की गड़गड़ाहट से नम हुईं आंखें
किसी भी संस्थान को साफ रखने में सबसे बड़ा योगदान वहां के सफाई कर्मचारियों का होता है, जिन्हें अक्सर लोग भूल जाते हैं। लेकिन इस कार्यक्रम की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब दिखी जब इन ‘सफाई मित्रों’ को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। दोनों निदेशकों ने खुद आगे बढ़कर इन कर्मियों को एक विशेष स्वच्छता किट सौंपी। इस किट में कैनवास बैग, टी-शर्ट, दस्ताने, मास्क, सैनिटाइजर, टिफिन बॉक्स और तौलिया जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें शामिल थीं। यह सिर्फ एक उपहार नहीं था, बल्कि उनकी दिन-रात की मेहनत के प्रति संस्थान का आभार था।
बच्चों के रंगों में उतरी सफाई और कबाड़ से बनी ‘मेक इन इंडिया’ की मूरत
पिछले दो हफ्तों के दौरान सीसीएल के अलग-अलग इलाकों में कई अनोखे प्रयोग देखने को मिले, जो इस पखवाड़े की असली जान थे।
- कैनवास पर बच्चों की सोच : 28 जून को कलाकृति स्कूल ऑफ आर्ट्स के साथ मिलकर एक पेंटिंग प्रतियोगिता हुई। इसमें रांची के 30 स्कूलों के 180 से ज्यादा बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों ने रंगों के जरिए दिखाया कि वे कैसा भारत देखना चाहते हैं।
- कबाड़ से कंचन का कमाल : सबसे अनोखी मिसाल अरगड़ा क्षेत्र की वर्कशॉप में देखने को मिली। वहां के कर्मियों ने वर्कशॉप में पड़े बेकार स्क्रैप और लोहे के टुकड़ों को जोड़कर ‘मेक इन इंडिया’ की एक बेहद खूबसूरत प्रतिमा बना डाली। इसने साबित कर दिया कि अगर सोच सही हो, तो कबाड़ को भी कंचन बनाया जा सकता है।
- बदली दीवारों की सूरत : रजरप्पा, कुजू और बरकासयाल जैसे इलाकों में दीवारों पर खूबसूरत पेंटिंग्स बनाकर लोगों को प्लास्टिक छोड़ने और जूट के थैले अपनाने का संदेश दिया गया।
पहाड़ी मंदिर में महा-सफाई के साथ नई शुरुआत
पखवाड़े के इस आखिरी दिन रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर परिसर में सुबह से ही एक अलग ऊर्जा थी। महाप्रबंधकों से लेकर छोटे-बड़े सभी कर्मियों ने मिलकर पूरे परिसर की कोने-कोने से सफाई की। दोपहर होते-होते जब कार्यक्रम का समापन हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर काम पूरा होने का सुकून था। सीसीएल परिवार ने इस वादे के साथ विदा ली कि झाड़ू भले ही आज रख दी जाएगी, लेकिन साफ-सफाई और पर्यावरण को बचाने का यह सिलसिला थमेगा नहीं, बल्कि यह अब उनकी जीवनशैली का हिस्सा रहेगा।
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