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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : तारीख… 9 जुलाई 2026, दिन…गुरुवार। पतरातू प्रखंड के ब्लॉक मोड़ इलाके की सुबह रोज़ जैसी नहीं थी। हवा में एक अजीब सी खामोशी थी और हर आंख नम थी। खबर ही ऐसी थी जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। इलाके के चहेते और हर दिल अजीज समाजसेवी डॉ. मिश्रा मोदी अब हमारे बीच नहीं रहे। जैसे ही यह खबर फैली, क्या बूढ़े, क्या बच्चे, हर कोई उनके आवास की तरफ दौड़ पड़ा। सुबह से ही उनके घर पर आखिरी दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें रो रही थी और जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी… “हमने आज अपना एक सच्चा हमदर्द खो दिया।”
जब भी कोई परेशान हुआ, याद आए डॉ. मिश्रा मोदी
डॉ. मिश्रा मोदी सिर्फ एक नाम नहीं थे, बल्कि पतरातू के लोगों के लिए एक भरोसा थे। उनका बेहद सरल स्वभाव और सबसे खुलकर मिलना उनकी ऐसी खासियत थी, जो पहली मुलाकात में ही लोगों को अपना बना लेती थी। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि उनके घर का दरवाजा कभी किसी के लिए बंद नहीं हुआ। आधी रात को भी अगर कोई बीमार पड़ता या किसी बड़ी मुसीबत में होता, तो लोग बिना झिझक उनके पास पहुंच जाते थे। वे न सिर्फ लोगों की परेशानी सुनते थे, बल्कि उसे दूर करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देते थे। उनका मानना था कि इंसानों की सेवा करना ही भगवान की सबसे बड़ी पूजा है।
बिना किसी भेदभाव के हर दिल से रिश्ता जोड़ा
आज के दौर में जहां लोग अपनों से दूरी बना लेते हैं, वहीं डॉ. मिश्रा मोदी ने सालों तक बिना किसी भेदभाव के गरीबों, बेसहारों और जरूरतमंदों को गले लगाया। वे किसी की जाति, धर्म या हैसियत नहीं देखते थे। किसी की बेटी की शादी हो, किसी का इलाज कराना हो या समाज का कोई सामूहिक काम, वे हमेशा सबसे आगे खड़े मिलते थे। लोगों के सुख में शामिल होना और उनके दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहना उनके जीवन का नियम बन चुका था। यही वजह थी कि समाज के हर वर्ग के लोग उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानते थे।
पद और पैसे से बड़ी होती है इंसानियत
उनके जाने से पूरे पतरातू क्षेत्र में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है। उनके अंतिम दर्शन के लिए आए स्थानीय लोगों ने भर्राई आवाज में कहा कि डॉ. साहब ने अपने जीने के तरीके से समाज को एक बहुत बड़ा सबक सिखाया है। उन्होंने साबित किया कि दुनिया में इंसान की पहचान उसकी धन-दौलत या बड़े पद से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि उसने कितने लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी। वे एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने हमेशा दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढी।
यादों में जिंदा रहेगी सेवा की यह अनूठी मिसाल
आज पतरातू का हर शख्स दुखी है और ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि डॉ. मिश्रा मोदी की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को इस भारी दुख को सहने की शक्ति मिले। डॉ. मिश्रा मोदी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सादगी भरा जीवन, लोगों के लिए उनका निस्वार्थ प्यार और समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनकर जिंदा रहेगा। लोग उन्हें एक ऐसे फरिश्ते के रूप में हमेशा याद रखेंगे, जिसने अपना पूरा जीवन दूसरों की भलाई में लगा दिया।
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