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Home » मेहनत के बल पर सफल मस्त्य बीज उत्वपादक बन गया भूमिहीन प्रेमचंद मछुआ
झारखंड

मेहनत के बल पर सफल मस्त्य बीज उत्वपादक बन गया भूमिहीन प्रेमचंद मछुआ

September 11, 2019No Comments2 Mins Read
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खूंटी। मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाला अड़की प्रखंड के सिन्दरी निवासी प्रेमानंद मछुआ की पहचान आज मत्स्य बीज उत्पादक के रूप है। मत्स्य विभाग खूंटी से जुड़ने के बाद वह आर्थिक रूप मजबूत होता गया। मत्स्य विभाग से जुड़ने के पूर्व उसकी आर्थिक स्थिति दयनीय थी। खेत नहीं होने के कारण वह दूसरे के खेतों में मजदूरी व तालाबों में जाकर मछली पकड़ने का कार्य करता था। इससे प्राप्त मजदूरी से अपने परिवार का भरण-पोषण बहुत मुशिकल से कर पाता था। 2009 में उसने मत्स्य विभाग से जुड़कर मत्स्य बीज उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और मत्स्य मित्र के रूप में काम करना आरंभ किया। वह गांवों में जाकर लोगों के तालाब का सर्वे करने लगा। साथ ही बैठक का आयोजन कर लोगों को मत्स्य पालन के प्रति जागरूक कर प्रषिक्षण के लिए जिला मुख्यालय भेजने का काम करना शुरू कर दिया। कालांतर में वह मत्स्य मित्र वह मत्स्य बीज उत्पादन करने लगा। वह मत्स्य बीज तैयार कर उचित मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराने लगा। इससे उसे आमदनी प्राप्त होने लगी। उसकी पहचान लागों के बीच मत्स्य बीज उत्पादक के तौर पर हो गयी। नये लाभुक स्वयं उसके पास जाकर मत्स्य बीज की खरीदारी कर मछली पालन कर रहे हैं।

प्रेमानंद मछुआ के पास एक भी तालाब नहीं था, पर, आज उसके पास लीज के 12 तालाब हैं। इन तालाबों में वह मछली पालन करने के साथ मत्स्य बीज का उत्पादन का भी कार्य कर रहा है। 2018-19 में मत्स्य विभाग खूंटी की ओर से उसे ऑटोरिक्शा क्रय करने लिए अनुदान दिया गया। ऑटोरिक्शा क्रय करने के बाद मछली व मत्स्य बीज को बेचने के लिए अड़की से बाहर आने-जाने सुविधा प्राप्त हो गयी। फिलवक्त, मत्स्य विभाग खूंटी से जुड़ने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति लगातर सुदृढ़ हो रही है।

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