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Ranchi : JPSC यानी झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते समेत अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई पूरी हो गई। सीआईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के आदेश पर सभी आरोपितों की नजर है। इस मामले में एल खियांग्ते के अलावा अभय तिवारी, सौरभ सुमन और अरविंद कुमार की ओर से भी जमानत की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान सीआईडी ने आरोपितों के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों और केस से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से आरोपितों को जमानत दिए जाने के पक्ष में दलीलें पेश की गईं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
पिछली सुनवाई में कोर्ट पहुंची थी करीब 1000 पन्नों की केस डायरी
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सीआईडी ने अदालत में करीब 1000 पन्नों की केस डायरी पेश की थी। जांच एजेंसी ने इसमें आरोपितों के खिलाफ जुटाए गए कई साक्ष्यों का उल्लेख किया है। बुधवार को जमानत याचिकाओं पर बहस के दौरान इन्हीं साक्ष्यों और केस की जांच से जुड़े बिंदुओं पर भी चर्चा हुई। सीआईडी का कहना है कि जेपीएससी की परीक्षाओं में अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते ने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों से कमीशन के तौर पर मोटी रकम ली थी। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। एल खियांग्ते की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने अदालत में पक्ष रखा और जमानत देने की मांग की।
करीब 30 आरोपित गिरफ्तार, कई नियुक्तियों को लेकर भी जांच
JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता को लेकर सीआईडी ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इस मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ गिरफ्तारियों का सिलसिला भी जारी रहा है। अब तक करीब 30 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। सभी आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
जांच में JPSC से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। बताया गया है कि एल खियांग्ते करीब एक साल तक जेपीएससी के अध्यक्ष रहे थे। वहीं, श्वेता गुप्ता का भी आयोग में लंबा कार्यकाल रहा था। अभय तिवारी और उसके परिवार के कई सदस्यों को जेपीएससी की अलग-अलग परीक्षाओं के जरिए नियुक्तियां मिलने की बात भी सामने आई है। इन नियुक्तियों और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीआईडी जांच कर रही है। अब जमानत याचिकाओं पर अदालत का फैसला महत्वपूर्ण होगा। फैसला आने के बाद यह साफ होगा कि एल खियांग्ते समेत अन्य आरोपितों को जेल से राहत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। मामले की जांच अभी जारी है।
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