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Pakur (Jaydev Kumar) : सरकारी निर्माण और विकास योजनाओं में काम कर रहे पाकुड़ जिले के संवेदकों ने लघु खनिजों के चालान जमा करने के नियम में राहत देने की मांग की है। इसको लेकर संवेदकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीसी को ज्ञापन सौंपा। संवेदकों का कहना है कि चालान की अनिवार्यता के कारण न सिर्फ उनके बिलों का भुगतान अटक रहा है, बल्कि कई सरकारी योजनाओं की रफ्तार पर भी असर पड़ रहा है।
मिट्टी, डस्ट और ईंट के चालान को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी
संवेदकों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत निर्माण कार्यों के बिल का भुगतान कराने के लिए मिट्टी, डस्ट, बालू, पत्थर डस्ट और ईंट जैसी निर्माण सामग्री के चालान जमा करना जरूरी है। परेशानी यह है कि स्थानीय बाजार में इन सभी सामग्रियों के चालान आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
संवेदकों के मुताबिक, निर्माण कार्यों में सामग्री की जरूरत लगातार बनी रहती है। ऐसे में सामग्री तो स्थानीय स्तर पर मिल जाती है, लेकिन उसके साथ जरूरी चालान नहीं मिल पाता। इसका सीधा असर बिल भुगतान पर पड़ रहा है।
बिल अटकने से बढ़ रहा आर्थिक दबाव
संवेदकों ने कहा कि चालान नहीं जमा कर पाने के कारण कई निर्माण कार्यों के बिल लंबित पड़े हैं। लंबे समय से भुगतान नहीं होने से संवेदकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उन्हें मजदूरों, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और अन्य खर्चों का भुगतान अपनी जेब से करना पड़ रहा है।
संवेदकों का कहना है कि इसका असर सरकारी योजनाओं पर भी पड़ रहा है। भुगतान में देरी होने से कई जगह निर्माण कार्यों की गति धीमी हो रही है।
नियमों में व्यावहारिक राहत देने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से संवेदकों ने डीसी को बताया कि निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री स्थानीय स्तर से ही खरीदी जा रही है। उन्होंने मांग की कि मिट्टी, डस्ट और ईंट जैसी मूलभूत निर्माण सामग्रियों के लिए चालान जमा करने की अनिवार्यता में व्यावहारिक छूट या शिथिलता दी जाए।
संवेदकों ने कहा कि यदि प्रशासन उनकी समस्या पर ध्यान देता है तो लंबित बिलों का भुगतान हो सकेगा और विकास योजनाओं का काम भी बिना रुकावट आगे बढ़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी परेशानी को समझते हुए जल्द उचित निर्णय लेगा।
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