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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कवि की कलम में समाज और राष्ट्र को दिशा देने की ताकत होती है। जरूरत है तो बस इस ताकत को पहचानने और सही दिशा में इस्तेमाल करने की। राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल ‘बाबूजी’ ने रामगढ़ में आयोजित प्रांतीय अधिवेशन में कवियों से यही अपील की। उन्होंने कहा कि कवियों को ऐसी रचनाएं लिखनी चाहिए, जो देश, धर्म और समाज के लिए प्रेरणा बनें और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।
होटल शिवम इन में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय कवि संगम, झारखंड प्रांत के प्रांतीय कार्यकारिणी अधिवेशन में राज्य के 13 जिलों से 55 कवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में साहित्य, राष्ट्रहित और संगठन के विस्तार को लेकर चर्चा हुई।

जगदीश मित्तल ने कहा कि सभी कवि मां सरस्वती के वरदपुत्र हैं। उनकी लेखनी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को नई सोच देने का जरिया भी है। उन्होंने कवियों से विनम्रता बनाए रखने और अपनी आंतरिक शक्तियों को समाजहित में लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में विनम्रता सबसे बड़ी पूंजी है। अपनी जरूरतों को सीमित रखते हुए दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
प्रांतीय अध्यक्ष विजय मेवाड़ ने कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम साहित्य के साथ राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का काम कर रहा है। अधिवेशन में संगठन को पंचायत स्तर तक पहुंचाने और युवा कवियों को मंच देने पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। प्रथम सत्र में नई प्रांतीय कार्यकारिणी की घोषणा की गई। दूसरे सत्र में कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन पर अतिथियों और प्रतिभागियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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