अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
News Samvad : ज्यादातर लोग जूते या चप्पल खरीदते समय रंग, डिजाइन और कीमत पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं। कई बार यह भी देख लिया जाता है कि पैर जूते में आसानी से आ रहा है या नहीं। लेकिन सिर्फ इतना देखना काफी नहीं है। जूते का सही साइज, उसकी चौड़ाई और पैर के आकार के हिसाब से फिट होना भी उतना ही जरूरी है। गलत फिटिंग वाले फुटवियर लंबे समय तक पहनने पर पैरों में दर्द और दूसरी परेशानियों की वजह बन सकते हैं। पैर पूरे शरीर का वजन संभालते हैं और चलते समय शरीर को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में जूते का आकार और डिजाइन चलने के तरीके पर भी असर डाल सकता है। अगर जूता पैर से छोटा या बहुत टाइट है तो उंगलियों को फैलने की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। लगातार दबाव पड़ने से पैर में दर्द, छाले, कॉर्न और त्वचा के मोटे होने जैसी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।
पैर जूते में आ रहा है तो भी जरूरी नहीं कि फिटिंग सही हो
जूता खरीदते समय अक्सर लोग सिर्फ यह देखते हैं कि पैर उसमें आ रहा है या नहीं। असल में जूते की चौड़ाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आगे से बहुत संकरा जूता पहनने पर पैर की उंगलियां एक-दूसरे पर दबने लगती हैं। इससे कुछ देर चलने के बाद ही दर्द या असहजता महसूस हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा फुटवियर पहनने से परेशानी और बढ़ सकती है। सही जूते में पैर को स्वाभाविक रूप से रहने की जगह मिलनी चाहिए। उंगलियां आपस में दबनी नहीं चाहिए और उन्हें हल्का फैलने की पर्याप्त जगह होनी चाहिए। जूता इतना ढीला भी नहीं होना चाहिए कि चलते समय एड़ी बार-बार बाहर निकलने लगे। अगर जूता पहनने के कुछ ही समय बाद पैर में दबाव, जलन या दर्द महसूस होने लगे तो इसे सामान्य मानकर लगातार पहनते रहना ठीक नहीं है। जूते की फिटिंग जांचते समय पैर के आगे, पीछे और दोनों तरफ पर्याप्त जगह देखना जरूरी है। खासकर ऐसे लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए जिन्हें दिनभर जूते पहनकर रहना पड़ता है। लंबे समय तक एक ही तरह का टाइट फुटवियर पहनने से पैरों पर लगातार दबाव बना रह सकता है।
हाई हील में रोजाना चलना पड़ सकता है भारी
हाई हील पहनने को लेकर भी सावधानी जरूरी है। शोध में लंबे समय तक ऊंची हील पहनने को पैरों की बनावट में बदलाव, मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी परेशानी तथा चोट के बढ़े खतरे से जोड़ा गया है। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि हाई हील पहनकर चलने से घुटनों पर पड़ने वाला कुछ दबाव और मोमेंट बढ़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि कभी-कभार हील पहनना हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक ही होगा। परेशानी खासकर तब बढ़ सकती है जब रोजाना और लंबे समय तक ऊंची हील पहनी जाए। हील की ऊंचाई के साथ पैर का भार आगे की तरफ ज्यादा पड़ सकता है। इससे पैरों के अगले हिस्से पर दबाव बढ़ने और लंबे समय तक चलने या खड़े रहने पर दर्द महसूस होने की संभावना रहती है। अगर किसी फुटवियर को पहनने के बाद बार-बार पैर में दर्द या जलन होती है तो उसे सिर्फ आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में जूते का साइज और फिटिंग बदलकर देखना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह भी ली जा सकती है।
जूता ऐसा हो जिसमें पैर आराम से रह सके
विशेषज्ञों के मुताबिक जूते का सबसे जरूरी गुण उसका आरामदायक होना है। पैर को जूते के अंदर स्वाभाविक स्थिति में रहने की जगह मिलनी चाहिए। उंगलियों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ना चाहिए और चलते समय एड़ी बार-बार बाहर नहीं निकलनी चाहिए। जूता खरीदते समय दोनों पैरों की फिटिंग देखना भी जरूरी है, क्योंकि कई लोगों के दोनों पैरों का आकार बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। दिनभर चलने के बाद पैरों में हल्की सूजन भी हो सकती है, इसलिए जूते की फिटिंग ऐसी होनी चाहिए कि सामान्य गतिविधियों के दौरान पैर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। आखिरकार जूता सिर्फ पहनने की चीज नहीं है। यह हमारे चलने के तरीके और पैरों पर पड़ने वाले दबाव को प्रभावित करता है। इसलिए अगली बार फुटवियर खरीदते समय केवल उसका रंग, डिजाइन या कीमत न देखें। यह भी देखें कि उसमें पैर आराम से रह रहा है या नहीं और उंगलियों को पर्याप्त जगह मिल रही है या नहीं। सही फिटिंग वाला फुटवियर पैरों को आराम देने के साथ रोजमर्रा की गतिविधियों को भी आसान बना सकता है।
इसे भी पढ़ें : 10वीं पास से ग्रेजुएट तक के लिए नौकरी का मौका, 1000 से ज्यादा पदों पर Vacancy



