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Home » 15 जून से पहले करें यह शुभ काम, घर में बनी रहेगी सुख-शांति और समृद्धि
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15 जून से पहले करें यह शुभ काम, घर में बनी रहेगी सुख-शांति और समृद्धि

June 13, 2026No Comments4 Mins Read
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पुरुषोत्तम
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News Samvad : हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है, बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही वजह है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान, पूजा और सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है।वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास 17 मई से शुरू हुआ था और 15 जून को इसका समापन होगा। ऐसे में इस अवधि के दौरान किए जाने वाले कुछ विशेष धार्मिक कार्यों का महत्व और बढ़ जाता है। इन्हीं में से एक है भांजे और भांजी का सम्मान और उनकी सेवा।

क्या होता है अधिक मास?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर रह जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग 32 महीने बाद पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिक मास कहा जाता है।धार्मिक मान्यता है कि जब इस माह को कोई विशेष पहचान नहीं मिली थी, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम और स्वरूप प्रदान किया। तभी से इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा। यह महीना पूरी तरह भगवान विष्णु की भक्ति, साधना और सेवा को समर्पित माना जाता है।

मांगलिक कार्यों से परहेज, पूजा-पाठ पर जोर

पुरुषोत्तम मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। हालांकि पूजा-पाठ, व्रत, कथा श्रवण, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सेवा को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस माह में किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसलिए लोग पूरे महीने धार्मिक गतिविधियों में अधिक रुचि लेते हैं।

भांजे-भांजी को क्यों दिया गया है विशेष स्थान?

सनातन परंपरा में भांजे और भांजी को सम्मान का विशेष अधिकार प्राप्त है। लोक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि एक भांजा सौ ब्राह्मणों के बराबर माना जाता है। इसी वजह से अधिक मास में मामा और मामी द्वारा भांजे-भांजी की सेवा और सम्मान को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।मान्यता है कि बहन के बच्चे ईश्वरीय आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक होते हैं। उनकी सेवा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।

कैसे करें भांजे-भांजी का सम्मान?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास समाप्त होने से पहले भांजे-भांजी को घर बुलाकर उनका आदर-सत्कार करना शुभ माना जाता है। यदि ऐसा संभव न हो तो उनके घर जाकर भी सम्मान किया जा सकता है।सम्मान की पारंपरिक विधि में सबसे पहले उनका तिलक किया जाता है। इसके बाद आरती उतारी जाती है और प्रेमपूर्वक भोजन कराया जाता है। भोजन के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फल, मिठाई, वस्त्र या कोई उपयोगी उपहार भेंट किया जाता है।मान्यता है कि इस तरह किया गया सम्मान रिश्तों को मजबूत बनाता है और परिवार में प्रेम व अपनापन बढ़ाता है।

परिक्रमा की भी है एक परंपरा

देश के कई हिस्सों में भांजे-भांजी की सेवा के बाद उनकी परिक्रमा करने की परंपरा भी प्रचलित है। कुछ परिवारों में मामा-मामी भांजे या भांजी की 7, 11 या 21 बार परिक्रमा करते हैं।धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। हालांकि यह परंपरा हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं है और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसमें बदलाव देखने को मिलता है।

क्या मिलता है इस सेवा का फल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। भांजे-भांजी का सम्मान करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और परिवार में प्रेम, सौहार्द तथा खुशहाली बनी रहती है।कुछ धार्मिक मान्यताओं में तो इसे सौ यज्ञों के समान पुण्यदायी भी बताया गया है। यही कारण है कि पुरुषोत्तम मास के दौरान कई परिवार इस परंपरा का पालन श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय मान्यताओं, पंचांग और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में मान्यताओं तथा रीति-रिवाजों में भिन्नता हो सकती है।

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