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Patna : पटना एम्स की नौकरी फर्जी दस्तावेज़ों से लेने के आरोप में दो डॉक्टरों पर CBI ने केस दर्ज किया है। जिन दो डॉक्टरों पर मामला दर्ज हुआ है, उनके नाम डॉ. कुमार सिद्धार्थ और डॉ. कुमार हर्षित राज हैं। इन दोनों पर फर्जी जाति और आरक्षण प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप है। जांच CBI की एंटी करप्शन यूनिट कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
डॉ. कुमार सिद्धार्थ ने खुद को ओबीसी नॉन क्रीम लेयर दिखाकर एम्स पटना के फिजियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी पाई। जांच में सामने आया है कि उनके OBC प्रमाणपत्र फर्जी हैं, जो पटना सदर एसडीओ के नाम से जारी दिखाए गए थे।
वहीं डॉ. कुमार हर्षित राज, जो कि एम्स पटना में बाल शल्य चिकित्सा विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बिंदे कुमार के बेटे हैं, उन पर आरोप है कि उन्होंने ईडब्ल्यूएस कोटे की सीट को UR श्रेणी में बदलवाकर ट्यूटर की नौकरी पाई। उनके दस्तावेज भी जांच में गड़बड़ पाए गए।
कब और कैसे सामने आया मामला?
दानापुर के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार ने दिसंबर 2024 में CBI को शिकायत दी थी। इसमें कहा गया था कि जून से सितंबर 2023 के बीच एम्स पटना में फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर कुछ भर्तियां की गई हैं।
CBI की शुरुआती जांच में ही कई फर्जी प्रमाणपत्र पकड़े गए और अब यह मामला धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं (IPC 420, 467, 468, 471) में दर्ज किया गया है।
जांच में कौन-कौन?
CBI ने एम्स प्रशासन से डॉ. बिंदे कुमार और डॉ. प्रेम कुमार (पूर्व रेडियोलॉजी प्रमुख) की सर्विस बुक की प्रमाणित कॉपी भी तलब की है। साथ ही, उनसे जुड़ी जानकारी देने वाले अफसर को भी 22 अगस्त को सीबीआई दफ्तर बुलाया गया है।

