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Jammu (Kishtwar) : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोती इलाके में गुरुवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही मच गई। ऐसा लगा जैसे किसी ने धरती चीर दी हो। इस हादसे में अब तक 38 लोगों की मौत की खबर सामने आयी है, जबकि मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। करीब 80 लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है। हादसे के बाद NDRF, SDRF, स्थानीय पुलिस और सेना के जवान बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
मचैल माता यात्रा पर पहुंचे श्रद्धालु हुए हादसे का शिकार
चशोती में यह हादसा उस समय हुआ, जब मचैल माता मंदिर की वार्षिक यात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र थे। यह मंदिर समुद्र तल से करीब 9,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। श्रद्धालु वाहन से चशोती तक आते हैं और फिर 8.5 किलोमीटर पैदल चढ़ाई करके मंदिर पहुंचते हैं। गुरुवार दोपहर 12 से 1 बजे के बीच अचानक बादल फटने से लंगर स्थल और आसपास का इलाका मलबे व पानी की चपेट में आ गया। कई दुकानें, वाहन और एक सुरक्षा चौकी भी बह गई।
खौफनाक मंजर
मौके से आई तस्वीरों और वीडियोज में दूर-दूर तक मलबा बिखरा है। सड़कें, घर, दुकानें, बाइक और कारें मलबे में दबे दिख रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो धरती को चीर दिया गया हो। हादसे के समय ज्यादातर लोग लंगर में या मंदिर यात्रा की तैयारी में थे।
किश्तवाड़ के चोसिटी क्षेत्र में हुए विनाशकारी बादल फटने की खबर सुनकर अत्यंत व्यथित हूँ, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।
चंडी माता (मचैल वाली) से सबकी रक्षा करने की प्राथना करता हूँ। pic.twitter.com/p0VOnhIRkr
— Baldev Singh Billawaria (@BaldevOfficial) August 14, 2025
प्रशासन और नेता क्या बोले…
किश्तवाड़ के डीसी पंकज कुमार शर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खुद घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्य की निगरानी कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हादसे पर दुख जताया है। उपराज्यपाल सिन्हा ने राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और प्रभावितों को हरसंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए।
यात्रा स्थगित, बचाव कार्य जारी
मचैल माता मंदिर की वार्षिक यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी गई है। एनडीआरएफ की दो टीमें उधमपुर से किश्तवाड़ भेजी गई हैं। पहाड़ी की तलहटी में बसे कई घर पानी और मलबे में बह गए हैं। प्रशासन ने अब तक 65 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जबकि लापता लोगों की तलाश जारी है। यह हादसा किश्तवाड़ शहर से करीब 90 किलोमीटर दूर हुआ और स्थानीय लोगों के मुताबिक, इतनी बड़ी तबाही उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।
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