अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
News Samvad : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की आदत बन चुका है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि लोग रोजाना औसतन 6–7 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। इसका सीधा असर आंखों और दिमाग पर पड़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका सबसे अच्छा उपाय है डिजिटल इंटरमिटेंट फास्टिंग, यानी कुछ समय के लिए स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बनाना।
कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रुति लांजेवार वासनिक बताती हैं कि जैसे उपवास शरीर को आराम देता है, वैसे ही डिजिटल फास्टिंग आंखों और दिमाग को राहत देता है। इससे थकान कम होती है, नींद बेहतर आती है और मन भी तरोताजा रहता है।
डॉ. वासनिक के अनुसार, शुरुआत में सुबह उठने के बाद आधा घंटा मोबाइल न देखें और रात को सोने से एक घंटा पहले फोन बंद कर दें। दिन में 1–2 घंटे स्क्रीन से दूरी बनाकर धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं। हफ्ते में एक दिन सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाना भी बेहद फायदेमंद है।
विशेषज्ञ बच्चों के लिए रोज 1–2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम से बचने की सलाह देते हैं। वहीं ऑफिस में काम करने वालों को 20-20-20 रूल अपनाना चाहिए—हर 20 मिनट में 20 फीट दूर किसी चीज़ को 20 सेकंड देखना।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने से फोकस बढ़ता है, तनाव कम होता है और क्रिएटिविटी में भी सुधार आता है।
इसे भी पढ़ें : पलामू सेंट्रल जेल से 200 कैदी होंगे शिफ्ट, कहां और क्यों… जानें
इसे भी पढ़ें : ऑनलाइन मनी गेम्स बंद, खिलाड़ियों के जमा पैसों का क्या होगा?
इसे भी पढ़ें : रिम्स में चाय पीते ही डॉक्टर वेंटिलेटर पर भर्ती, मचा हड़कंप
इसे भी पढ़ें : भारत सरकार ने शुरू की ई-पासपोर्ट सेवा, जानें क्या हैं खासियतें
इसे भी पढ़ें : राजधानी को फ्लाईओवर के बाद अब मेट्रो की सौगात, केंद्र ने मांगा मोबिलिटी प्लान
इसे भी पढ़ें : एल्विश यादव के घर फा’यरिंग करने वाले के साथ पुलिस का एनका’उंटर, कैसे क्या हुआ… जानें



