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News Samvad : मानसून जहां सुकून और ठंडक लेकर आता है, वहीं यह मौसम त्वचा के लिए कई समस्याएं भी पैदा करता है। नमी और उमस के कारण स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है, जिससे फंगल इंफेक्शन, एलर्जी, मुंहासे, रैशेज़ और खुजली जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
नमी और उमस से मुंहासे
मानसून के दौरान हवा में नमी बढ़ने से तैलीय त्वचा पर सीबम का स्तर बढ़ जाता है। इससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और पिंपल्स या फोड़े निकलने लगते हैं। वहीं, रूखी त्वचा वाले लोगों की स्किन डिहाइड्रेट हो जाती है।
फंगल संक्रमण का खतरा
इस मौसम में पसीना और गंदगी मिलकर फंगल इंफेक्शन को बढ़ावा देते हैं। खासकर अंडरआर्म्स, गर्दन और पैरों में खुजली, रेड पैच और रैशेज़ आम हो जाते हैं।
खानपान का असर
मानसून में फास्ट फूड, बासी खाना और सी फूड एलर्जी को बढ़ा सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ताजे फल, सब्जियां, विटामिन-सी युक्त आहार और पर्याप्त पानी का सेवन त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
अलग-अलग त्वचा के लिए देखभाल
तैलीय त्वचा: हल्का फेसवॉश और नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइज़र लगाएं।
रूखी त्वचा: क्रीम बेस्ड क्लेंज़र और हाइड्रेटिंग सीरम का इस्तेमाल करें।
संवेदनशील त्वचा: बिना खुशबू और अल्कोहल-फ्री उत्पाद चुनें।
बचाव के आसान उपाय
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
बाहर से आने के बाद चेहरा, हाथ और पैर धोएं।
भीगे जूते-मोज़े ज्यादा देर न पहनें।
एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल करें।
तौलिया या पर्सनल चीजें शेयर न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खुजली, सूजन या पिंपल्स की समस्या अचानक बढ़ जाए तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।
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