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New Delhi : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया तैयार किया है। इस कॉर्निया का इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है। अगर ट्रायल सफल होता है तो यह तकनीक हजारों लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने में मदद कर सकती है।
भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग कॉर्निया डैमेज के कारण अंधे हो जाते हैं। कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए डोनर कॉर्निया की भारी कमी है, जिसकी वजह से मरीजों को सालों इंतजार करना पड़ता है। नई तकनीक से उन कॉर्नियाज का भी इस्तेमाल संभव होगा, जिन्हें अब तक अनुपयोगी मानकर फेंक दिया जाता था।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कॉर्निया तब कारगर है जब आंख की ऊपरी परत खराब हो और नीचे की परत ठीक हो। इसे लगाने पर यह धीरे-धीरे प्राकृतिक कॉर्निया के साथ जुड़कर नई सतह बना देता है। इससे पूरी कॉर्निया बदलने की बजाय केवल एक पैच लगाकर इलाज संभव हो जाएगा।
इस तकनीक से इलाज न सिर्फ सस्ता और सुरक्षित होगा बल्कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को फायदा मिल सकेगा। लैब और जानवरों पर किए गए परीक्षण सफल रहे हैं और अब इंसानों पर ट्रायल जारी है।
अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भारत में कॉर्निया डोनर की कमी दूर होगी और हजारों मरीजों को नई रोशनी मिल सकेगी।
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