अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : झारखंड में बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार अब सिर्फ दावे नहीं, बल्कि जमीन पर बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है। आने वाले समय में राजधानी रांची को तीन नए स्मार्ट ग्रिड मिलेंगे। राज्य में जलविद्युत और सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर तेजी से काम होगा। हर पात्र परिवार तक 200 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ पहुंचाने की व्यवस्था और मजबूत होगी। गांवों में ट्रांसफार्मर जलने पर 24 घंटे के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। अस्पतालों में चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली सुनिश्चित की जाएगी और बिजली व्यवस्था की निगरानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का भी इस्तेमाल होगा। ये फैसले झारखंड मंत्रालय में हुई ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिए गए। बैठक की अध्यक्षता सीएम हेमंत सोरेन ने की। करीब कई घंटे तक चली इस समीक्षा में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण, नई परियोजनाओं, मुफ्त बिजली योजना, विभाग में खाली पदों, स्मार्ट मीटर और शिकायत निवारण व्यवस्था जैसे हर अहम मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत में ही सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि बिजली अब सिर्फ एक सरकारी सेवा नहीं है। यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सिंचाई, उद्योगों की रफ्तार और अस्पतालों की जीवन रेखा है। इसलिए सरकार की पहली जिम्मेदारी है कि राज्य के हर नागरिक तक बिना रुकावट अच्छी गुणवत्ता की बिजली पहुंचे।
अब सिर्फ बिजली नहीं, भरोसेमंद बिजली देने की तैयारी
बैठक के दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिजली व्यवस्था में कई सुधार हुए हैं, लेकिन अभी भी कई जगहों से बिजली कटौती, लो वोल्टेज और ट्रांसफार्मर खराब होने की शिकायतें आती हैं। इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए, जहां लोगों को बार-बार शिकायत करने की जरूरत ही न पड़े। बिजली आपूर्ति लगातार बनी रहे और अगर कहीं कोई तकनीकी खराबी आती भी है तो उसका समाधान तुरंत हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों के साथ-साथ गांव और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी उतनी ही अच्छी बिजली मिलनी चाहिए, जितनी राजधानी या बड़े शहरों में मिलती है। विकास तभी माना जाएगा, जब उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
जिलों के उपायुक्तों से सीधे बात, जानी हकीकत
समीक्षा बैठक सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रही। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बोकारो, धनबाद, हजारीबाग समेत कई जिलों के उपायुक्तों से सीधे बात की। उन्होंने ग्रिड निर्माण, ट्रांसमिशन लाइन और बिजली परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। जहां जमीन अधिग्रहण, वन स्वीकृति या दूसरी प्रशासनिक बाधाएं सामने आईं, वहां मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाकर जल्द समाधान निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में सिर्फ कागजी प्रक्रिया के कारण देरी नहीं होनी चाहिए।
24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य के लोगों को चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि आज बिजली की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। घरों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या बढ़ी है, उद्योगों का विस्तार हो रहा है और गांवों में भी बिजली पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर अभी से तैयारी करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को भी मजबूत करना होगा। अगर बिजली बनेगी लेकिन सही तरीके से लोगों तक नहीं पहुंचेगी तो उसका कोई फायदा नहीं होगा।
ट्रांसफार्मर जले तो 24 घंटे के भीतर बदले
ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब होना सबसे बड़ी समस्या मानी जाती है। कई बार एक ट्रांसफार्मर जलने के बाद पूरा गांव कई दिनों तक अंधेरे में रहता है। इस पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी इलाके में ट्रांसफार्मर खराब होने पर 24 घंटे के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग की पहचान उसके काम से होनी चाहिए। लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
रांची की बिजली व्यवस्था होगी हाईटेक
बैठक में राजधानी रांची की बिजली व्यवस्था को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि शहर में तीन नए स्मार्ट ग्रिड बनाए जाएंगे। ये स्मार्ट ग्रिड कुसई कॉलोनी, बरियातू और इटकी में स्थापित होंगे। इनके अलावा कई नए पावर सब-स्टेशन भी बनाए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट ग्रिड बनने के बाद बिजली वितरण व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक हो जाएगी। बिजली आपूर्ति की निगरानी आसान होगी। लोड का संतुलन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा और तकनीकी खराबियों का तुरंत पता चल जाएगा। इससे बिजली कटौती कम होगी और उपभोक्ताओं को पहले से ज्यादा भरोसेमंद बिजली मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और तय समय के भीतर काम पूरा किया जाए।
200 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे
बैठक में मुख्यमंत्री ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकार ने यह योजना गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए शुरू की है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रहे। उन्होंने लाभुकों की पहचान की प्रक्रिया को आसान बनाने, नियमित निगरानी करने और शिकायतों का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लोगों के बीच योजना को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि जिन परिवारों को अभी तक जानकारी नहीं है, वे भी इसका लाभ उठा सकें।
जलप्रपातों से बनेगी ज्यादा बिजली
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने झारखंड की प्राकृतिक संपदा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में जलविद्युत उत्पादन की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने हुंडरू, जोन्हा सहित दूसरे जलप्रपातों और जलाशयों का वैज्ञानिक अध्ययन कर बिजली उत्पादन बढ़ाने की योजना तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से कम पानी में भी ज्यादा बिजली बनाई जा सकती है। इसलिए विशेषज्ञों की मदद लेकर ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे आने वाले वर्षों में राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अगर झारखंड अपनी बिजली खुद ज्यादा बनाएगा तो भविष्य में बाहर से बिजली खरीदने पर निर्भरता भी कम होगी और राज्य आर्थिक रूप से भी मजबूत होगा।
सोलर ऊर्जा से लेकर एआई तक, बिजली व्यवस्था को हाईटेक बनाने की तैयारी
बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सरकार अब भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नई तकनीकों पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सिर्फ पारंपरिक तरीके से काम करने से अब बात नहीं बनेगी। दुनिया तेजी से बदल रही है और ऊर्जा क्षेत्र में भी आधुनिक तकनीकों को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड के पास प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। अगर राज्य अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करे तो आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर बन सकता है।
फ्लोटिंग सोलर और रूफटॉप सोलर पर रहेगा फोकस
बैठक में मुख्यमंत्री ने फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्य के बड़े जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी इमारतों के साथ-साथ निजी भवनों की छतों पर भी रूफटॉप सोलर लगाने को बढ़ावा दिया जाए। इससे लोगों का बिजली बिल कम होगा और राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आने वाले वर्षों को ध्यान में रखकर ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत राज्य बन सके।
बंजर जमीन अब बनेगी किसानों की कमाई का जरिया
समीक्षा बैठक में किसानों की आय बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य की बंजर और अनुपयोगी जमीन को सोलर फार्म के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि कई किसानों के पास ऐसी जमीन है, जहां खेती नहीं हो पाती। अगर वहां सोलर पैनल लगाए जाएं तो किसानों को हर महीने अतिरिक्त आय मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने किसानों को सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी, तकनीकी सहायता और बैंक ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही यह व्यवस्था बनाने को कहा कि किसानों द्वारा उत्पादित बिजली की खरीद सरकार या संबंधित एजेंसी तय प्रक्रिया के तहत करे। उनका कहना था कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।
सिकिदिरी पावर प्लांट को मिलेगा नया जीवन
राज्य की सबसे महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल सिकिदिरी पावर प्लांट की भी बैठक में विस्तार से समीक्षा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि मौजूदा मशीनों की स्थिति क्या है और नई तकनीक अपनाकर उत्पादन कितना बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्लांट की पुरानी और नई मशीनों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। जहां जरूरत हो वहां आधुनिक उपकरण लगाए जाएं और ऐसी तकनीक अपनाई जाए, जिससे कम पानी में भी ज्यादा बिजली पैदा की जा सके। उन्होंने कहा कि सिर्फ पुराने सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय भविष्य को ध्यान में रखकर निवेश करना होगा। इससे उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी और बिजली बनाने की लागत भी कम होगी।
बिजली पहुंचाने वाली लाइनें भी होंगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली उत्पादन बढ़ाने से काम पूरा नहीं होगा। सबसे जरूरी है कि बिजली सुरक्षित तरीके से हर घर तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को राज्य के ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। खासकर शहरों और घनी आबादी वाले इलाकों में आधुनिक मोनोपोल तकनीक अपनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक चार पोल वाली संरचना की तुलना में मोनोपोल कम जगह घेरते हैं और इन्हें लगाना भी आसान होता है। इससे लोगों को कम परेशानी होगी और बिजली लाइनें भी ज्यादा सुरक्षित रहेंगी। उन्होंने बिजली पोलों के नियमित निरीक्षण, रखरखाव और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश भी दिए।
10 दिन में दूर हों परियोजनाओं की बाधाएं
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बोकारो, धनबाद और हजारीबाग के उपायुक्तों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान कई परियोजनाओं में वन स्वीकृति और जमीन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी सामने आई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अलग-अलग विभाग मिलकर काम करें और अगले दस दिनों के भीतर इन बाधाओं का समाधान निकालें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता से जुड़ी परियोजनाओं में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब एआई रखेगा बिजली व्यवस्था पर नजर
बैठक में सबसे अहम फैसलों में से एक था ऊर्जा विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल बढ़ाना। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए, जिससे बिजली आपूर्ति, परियोजनाओं की प्रगति, शिकायतों के समाधान और विभागीय कामकाज की निगरानी रियल टाइम में हो सके। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से यह तुरंत पता चल सकेगा कि किस इलाके में सबसे ज्यादा बिजली समस्या है, किस परियोजना में देरी हो रही है और किस शिकायत का समाधान बाकी है। मुख्यमंत्री का कहना था कि इससे विभाग की जवाबदेही भी बढ़ेगी और लोगों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया होगी तेज
बैठक में राज्य में चल रहे स्मार्ट मीटर अभियान की भी समीक्षा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तय समय के भीतर स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत का सही रिकॉर्ड मिलेगा। उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिलिंग होगी और विभाग को भी बिजली प्रबंधन में सुविधा मिलेगी। साथ ही उन्होंने लोगों के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर जागरूकता फैलाने के निर्देश भी दिए, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
ऊर्जा विभाग में होगी बड़ी भर्ती, अस्पतालों में हर हाल में मिलेगी बिजली
ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सिर्फ बिजली उत्पादन और नई परियोजनाओं पर ही बात नहीं की, बल्कि यह भी साफ किया कि अगर विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं होंगे और शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होगा, तो बेहतर व्यवस्था की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसी वजह से बैठक में विभाग की रिक्तियों से लेकर अस्पतालों की बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं की शिकायतों तक हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई।
ऊर्जा विभाग में खाली पद जल्द भरने के निर्देश
बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि ऊर्जा विभाग और उससे जुड़े निगमों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इसका असर कई बार बिजली आपूर्ति, लाइन मरम्मत और उपभोक्ता सेवाओं पर भी पड़ता है। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए पहले चरण में 35 प्रतिशत रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भर्ती का प्रस्ताव जल्द कैबिनेट में लाया जाए ताकि मंजूरी मिलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया तेजी से शुरू हो सके। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अगर विभाग में पर्याप्त कर्मचारी होंगे तो बिजली व्यवस्था भी बेहतर होगी और लोगों की शिकायतों का समाधान भी समय पर होगा।
सिर्फ शहर नहीं, गांवों तक पहुंचेंगे तकनीकी कर्मचारी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी याद दिलाया कि कई बार ग्रामीण इलाकों में छोटी-सी तकनीकी खराबी कई दिनों तक ठीक नहीं हो पाती, क्योंकि वहां पर्याप्त कर्मचारी नहीं होते। उन्होंने निर्देश दिया कि सिर्फ जिला मुख्यालयों में ही नहीं, बल्कि पंचायत और प्रखंड स्तर तक भी तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कर्मचारी मौजूद रहेंगे तो लाइन खराब होने, ट्रांसफार्मर जलने या दूसरे तकनीकी कामों को जल्दी पूरा किया जा सकेगा।
अस्पतालों में किसी भी कीमत पर नहीं जानी चाहिए बिजली
बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में बिजली कटना सिर्फ तकनीकी दिक्कत नहीं है, बल्कि यह मरीजों की जिंदगी से जुड़ा मामला है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, नवजात शिशु वार्ड और आपातकालीन सेवाओं में बिजली की एक मिनट की रुकावट भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए अस्पतालों की बिजली व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
हर अस्पताल में होगी ड्यूल लाइन व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी बड़े अस्पतालों में ड्यूल लाइन व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी कारण से एक बिजली लाइन में खराबी आती है तो दूसरी लाइन से तुरंत बिजली मिलनी चाहिए। इससे इलाज का काम बिना रुके चलता रहेगा और मरीजों को परेशानी नहीं होगी। इसके साथ ही अस्पतालों की बिजली व्यवस्था का नियमित तकनीकी निरीक्षण करने और जहां जरूरत हो वहां अतिरिक्त उपकरण लगाने के निर्देश भी दिए गए।
जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कई बार लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह होती है कि आवेदन देने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान समय पर नहीं होता। इसे बदलना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हेल्पलाइन, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और जन समस्या केंद्रों को पहले से ज्यादा प्रभावी बनाया जाए। शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी लगातार निगरानी हो और तय समय के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार बिजली कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। विभाग की कोशिश होनी चाहिए कि अधिकतर शिकायतों का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो जाए।
हर विभाग में बने मजबूत शिकायत निवारण केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायत दर्ज करना ही काफी नहीं है। यह भी जरूरी है कि हर शिकायत की नियमित समीक्षा हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों की मॉनिटरिंग की जाए और यह देखा जाए कि कौन-सी शिकायत का समाधान हुआ और कौन-सी अब भी लंबित है। इससे अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।
पूरे बिजली नेटवर्क का मुख्यमंत्री ने लिया जायजा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के ग्रिड सब-स्टेशन, पावर सब-स्टेशन और पूरे ट्रांसमिशन नेटवर्क के मानचित्रों का भी विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने अधिकारियों से आने वाले वर्षों की बिजली जरूरतों को लेकर चर्चा की। नए उद्योग, बढ़ते शहर, ग्रामीण विद्युतीकरण और भविष्य की मांग को देखते हुए विभाग की तैयारियों की जानकारी ली। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना, मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सभी योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए।
इसे भी पढ़ें : ‘पेंडिंग लाइसेंस तुरंत निपटाएं अफसर’… IDTR की नींव रखते ही एक्शन मोड में सीएम हेमंत

