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Home » सैटेलाइट शहरों में जमीन खरीदने-बेचने की राह होगी आसान, सम्राट सरकार ने दी राहत
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सैटेलाइट शहरों में जमीन खरीदने-बेचने की राह होगी आसान, सम्राट सरकार ने दी राहत

July 29, 2026No Comments4 Mins Read
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जमीन
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Patna : अगर आपकी जमीन बिहार के किसी प्रस्तावित सैटेलाइट शहर में है और खरीद-बिक्री पर लगी रोक की वजह से आप लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, तो अब राहत की खबर है। बिहार सरकार ने फैसला किया है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में डेवलपमेंट प्लान का अंतिम प्रकाशन होते ही जमीन के खरीद-बिक्री और ट्रांसपर पर लगी रोक हटा दी जाएगी। इससे न सिर्फ जमीन मालिकों की मुश्किलें कम होंगी, बल्कि इन नए शहरों के विकास को भी रफ्तार मिलेगी। सरकार का मानना है कि योजनाबद्ध तरीके से विकास और जमीन के लेनदेन दोनों साथ-साथ चलेंगे। इससे लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा और निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे।

मास्टर प्लान बनने तक इसलिए लगाई गई थी रोक

दरअसल, नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, भूमि विकास और भवन निर्माण पर रोक लगा दी थी। सरकार चाहती थी कि पहले पूरे इलाके की योजना तैयार हो, उसके बाद ही विकास कार्य शुरू हों, ताकि भविष्य में अव्यवस्थित बसावट की स्थिति पैदा न हो। लेकिन इस फैसले का असर उन लोगों पर भी पड़ा, जिनकी जमीन इन इलाकों में थी। वे चाहकर भी अपनी जमीन बेच या किसी और के नाम नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में लगातार राहत की मांग उठ रही थी।

सरकार ने भू-स्वामियों की दिक्कतों को देखते हुए 19 जून 2026 को एक अहम फैसला लिया था। इसके तहत बिहार राज्य आवास बोर्ड को अधिकृत किया गया कि वह जरूरत पड़ने पर भू-स्वामियों से जमीन खरीद सके। अब सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए साफ कर दिया है कि विकास योजना के अंतिम प्रकाशन के बाद जमीन के लेनदेन पर लगी रोक पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी।

डेवलपमेंट प्लान तय करेगा किस जमीन का क्या होगा इस्तेमाल

सरकार फिलहाल सभी प्रस्तावित सैटेलाइट शहरों के मास्टर प्लान और डेवलपमेंट प्लान को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसी योजना के आधार पर तय होगा कि किस इलाके में आवासीय क्षेत्र विकसित होगा, कहां व्यावसायिक गतिविधियां होंगी, कहां सड़कें, पार्क, स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं बनाई जाएंगी। यानी भविष्य में शहर कैसे बढ़ेगा और किस दिशा में विकास होगा, इसकी पूरी तस्वीर इसी योजना से तय होगी।

सरकार ने अपने निर्णय में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था भी की है। यदि विकास योजना का प्रारूप प्रकाशित होने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि जमीन की खरीद-बिक्री शुरू करने से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे, तो बिहार नगर विकास प्राधिकरण अंतिम प्रकाशन से पहले भी रोक हटाने का निर्णय ले सकेगा। इसका मतलब है कि कुछ इलाकों में लोगों को तय समय से पहले भी राहत मिल सकती है।

लैंड पूलिंग और भू-अर्जन की प्रक्रिया भी होगी शुरू

विकास योजना लागू होने के बाद सरकार जमीन अधिग्रहण, जमीन की खरीद और लैंड पूलिंग जैसी प्रक्रियाएं भी शुरू करेगी। साथ ही बिहार नगर विकास प्राधिकरण विकास योजना और विकास नियंत्रण विनियमन (डीसीआर) के तहत भवन निर्माण और भूमि विकास से जुड़े सभी कार्यों की निगरानी करेगा। सरकार का कहना है कि इससे विकास कार्य तय नियमों के अनुसार होंगे और भविष्य में किसी तरह की अव्यवस्था या विवाद की संभावना कम होगी।

जानकारों का मानना है कि जमीन के लेनदेन पर लगी रोक हटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। इससे नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट सामने आएंगे, निर्माण गतिविधियां तेज होंगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन लोगों की जमीन लंबे समय से अटकी हुई थी, उन्हें अब अपनी संपत्ति के इस्तेमाल का अधिकार फिर से मिल सकेगा।

सरकार का फोकस सुनियोजित शहर बसाने पर

राज्य सरकार का कहना है कि उद्देश्य सिर्फ जमीन की खरीद-बिक्री शुरू कराना नहीं है, बल्कि ऐसे आधुनिक और व्यवस्थित सैटेलाइट शहर विकसित करना है, जहां सड़क, पानी, सीवरेज, पार्क, सार्वजनिक सुविधाएं और भवन निर्माण सभी तय योजना के मुताबिक हों। सरकार का मानना है कि इस फैसले से भू-स्वामियों के हित सुरक्षित रहेंगे, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बिहार में सुनियोजित शहरी विकास को नई गति मिलेगी।

इसे भी पढ़ें :मेट्रो लुक में दिखेंगे बिहार के छोटे-बड़े शहर, मंत्री नीतीश ने खोला शहरी विकास का ब्लूप्रिंट

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