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Sitamarhi : सीतामढ़ी जिले की सुरसंड विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार यहां से उषा किरण ने जन सुराज पार्टी का टिकट लेकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। 48 वर्षीय उषा पहले जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं और अब विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने जा रही हैं। उनके राजनीतिक सफर में सबसे बड़ी ताकत उनका परिवार और खासकर उनके ससुर सीताराम यादव का अनुभव है।
परिवार की गहरी राजनीतिक जड़ें
उषा किरण का परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके ससुर सीताराम यादव ने नयाटोल पंचायत के मुखिया और नानपुर ब्लॉक प्रमुख के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1990 और 1995 में वे पुपरी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। क्षेत्रीय पुनर्संरचना के बाद जब यह क्षेत्र सुरसंड विधानसभा के नाम से जाना गया, तब भी यादव परिवार की पकड़ मजबूत बनी रही।
ससुर का अनुभव और बहू की जीत का लक्ष्य
सीताराम यादव ने दो बार विधायक और दो बार सांसद रहते हुए क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। 1998 और 2004 में वे सीतामढ़ी से लोकसभा सांसद रहे। आरजेडी से निष्कासित होने के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा। अब वे जन सुराज आंदोलन के साथ जुड़े हैं और अपनी बहू उषा किरण को विधानसभा में विजयी बनाने में पूरी ताकत लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यादव परिवार की राजनीतिक समझ और संगठनात्मक अनुभव उषा के लिए बड़ी पूंजी साबित हो सकती है।
शिक्षित और समाज से जुड़ी उम्मीदवार
उषा किरण की पहचान एक शिक्षित और संवेदनशील नेता के रूप में है। उन्होंने B.Sc. (Zoology) की पढ़ाई की है। वे महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में कई सामाजिक कार्यक्रमों से जुड़ी रही हैं। जिला परिषद सदस्य के रूप में उनके कार्यकाल को जनता ने सराहा है। अब वे इसी अनुभव को विधानसभा की राजनीति में बदलने की कोशिश कर रही हैं।
सुरसंड में इस बार का मुकाबला
सुरसंड सीट पर इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प माना जा रहा है। यादव परिवार की राजनीतिक पकड़ और ससुर के अनुभव के साथ उषा के सामने अन्य दलों के मजबूत उम्मीदवार हैं। क्षेत्र में यादव, ब्राह्मण और अति पिछड़ा वर्ग के वोट निर्णायक माने जाते हैं। ऐसे में यह चुनाव उषा के लिए सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने की लड़ाई भी है।
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