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Pakur (Jaydev Kumar) : ठंडी हवाओं के साथ नवंबर का महीना आते ही पूरे झारखंड में उत्सव की हलचल शुरू हो गई है। इस बार झारखंड स्थापना दिवस केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य के गर्व और जनभावना का उत्सव बनने जा रहा है। वजह भी खास है… राज्य अपने रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर रहा है। डीसी मनीष कुमार के चेहरे पर तैयारी की दृढ़ता और उत्साह साफ झलकती है। बुधवार को उन्होंने जिले के तमाम विभागों और अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए विस्तृत समीक्षा बैठक की। हर शब्द में एक ही बात थी… “इस बार का स्थापना दिवस भव्य, गरिमामय और जन-उत्सव की तरह होना चाहिए।”
रजत जयंती वर्ष का अर्थ – एक भावनात्मक पड़ाव
झारखंड राज्य की यह 25वीं वर्षगांठ है। बीते ढाई दशक में इस धरती ने संघर्ष से विकास की दिशा तक का सफर तय किया है। अब प्रशासन चाहता है कि यह पर्व हर गांव, हर बच्चे और हर परिवार तक पहुँचे। इसलिए इस बार केवल मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसहभागिता पर जोर है। राज्य सरकार की योजना “सरकार आपके द्वार” भी इसी अवधि में शुरू की जाएगी — ताकि प्रशासन लोगों के बीच जाकर उनकी बात सुन सके।
10 नवंबर से सजेगा उत्सव का रंग
झारखंड के रंग, संस्कृति और जनभावना को एक साथ जोड़ने वाली गतिविधियां 10 नवम्बर से 15 नवम्बर तक चलेंगी। रंगोली प्रतियोगिता, हस्ताक्षर अभियान, सजावट और स्वच्छता से लेकर स्कूलों में सेल्फी कॉर्नर तक… हर आयोजन इस बात का संदेश देगा कि यह दिन सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि जनता का उत्सव है।
‘रन फॉर झारखंड’ – रजत वर्ष की प्रतीक दौड़
11 नवम्बर की सुबह जब सूरज निकलेगा, तब शहर की सड़कों पर युवा, छात्र और आम नागरिक दौड़ते नज़र आएंगे… “Run for Jharkhand” के बैनर तले। यह सिर्फ एक दौड़ नहीं होगी, बल्कि झारखंड की ऊर्जा और जोश का प्रतीक होगी। डीसी ने बताया कि हर प्रखंड में प्रभात फेरी और दौड़ प्रतियोगिता आयोजित होगी, ताकि रजत वर्ष का उत्सव गांव-गांव तक पहुंचे।
संस्कृति की झलक – लोकगीतों की गूंज के साथ 12 नवंबर
अगले दिन यानी 12 नवम्बर को झारखंड की आत्मा, उसकी संस्कृति मंच पर जीवंत होगी। ढोल-नगाड़ों की ताल पर पारंपरिक नृत्य, लोकगीतों की मधुरता और आदिवासी परिधान की झिलमिलाहट — यह दिन राज्य की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित रहेगा। हर प्रखंड मुख्यालय पर शाम सजेगी संस्कृति के रंगों से।
धरती की सुंदरता से जुड़ा 13 नवंबर – साइक्लिंग अभियान
झारखंड की सुंदर वादियों और ऐतिहासिक स्थलों से होकर निकलेगा साइक्लिंग अभियान, जो धरनी पहाड़ और कंचनगढ़ गुफा जैसे स्थलों से गुजरेगा। यह अभियान प्रकृति संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने का भी संदेश देगा। सोशल मीडिया के ज़रिए इस दिन को “ग्रीन एंड प्राउड झारखंड” थीम पर प्रचारित किया जाएगा।
14 नवम्बर – आंदोलन की यादों को सलाम
यह दिन होगा समर्पण और सम्मान का। झारखंड आंदोलनकारियों को नमन करते हुए जिले में सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
इसके साथ ही बच्चों और युवाओं के लिए पेंटिंग, वाद-विवाद, क्विज़ और खेल प्रतियोगिताएँ होंगी। मैदानों में फिर गूंजेगी फुटबॉल की आवाज… खेल विभाग इसके आयोजन की निगरानी करेगा।
15 नवम्बर – टाउन हॉल में मुख्य समारोह, जनता की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत
अंतिम दिन, यानी 15 नवम्बर, जब पूरा झारखंड अपने गौरव दिवस पर झूमेगा — पाकुड़ का टाउन हॉल इस आयोजन का साक्षी बनेगा।
यहां विधायक, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और सबसे महत्वपूर्ण… आमजन एक साथ झारखंड की आत्मा का उत्सव मनाएंगे।
बच्चों में गर्व की भावना जगाने की पहल
स्थापना सप्ताह के दौरान स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में राजकीय प्रतीकों (राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष आदि) से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। डीसी मनीष कुमार का मानना है… “राज्य के भविष्य को अपने अतीत और पहचान से जोड़ना ही सच्चा उत्सव है।”
“आत्मसम्मान का प्रतीक है स्थापना दिवस”
बैठक के अंत में डीसी मनीष कुमार ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि 3 नवम्बर तक सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। उनका एक वाक्य पूरे आयोजन का सार कह गया… “झारखंड का स्थापना दिवस सिर्फ तिथि नहीं, बल्कि हमारी पहचान और आत्मसम्मान का प्रतीक है… इसे हर दिल में महसूस किया जाना चाहिए।”
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