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Home » “डीसी साहब आ गये हैं”… फिर समाहरणालय में मची खलबली… जानें क्यों
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“डीसी साहब आ गये हैं”… फिर समाहरणालय में मची खलबली… जानें क्यों

October 29, 2025No Comments4 Mins Read
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डीसी
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Ranchi : दोपहर के चार बज चुके थे। समाहरणालय परिसर में त्योहार के बाद की हल्की सुस्ती अब भी महसूस की जा रही थी। कुछ कर्मचारी फाइलों के बीच चाय की चुस्कियों में खोए थे, तो कुछ अपनी मेजों पर लौटे ही थे। तभी गलियारे में अचानक एक हलचल सी मची… “डीसी साहब आ गए हैं!” यह सुनते ही कुर्सियां सीधी होने लगीं, फाइलें सलीके से रखी जाने लगीं और चेहरों पर मुस्कान के साथ घबराहट साफ झलकने लगा। दरअसल, डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बिना किसी पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण शुरू कर दिया था।

‘दफ्तर में लापरवाही की कोई जगह नहीं’

प्रशासन की नब्ज टटोलते हुए डीसी मंजूनाथ भजंत्री धीरे-धीरे एक-एक कक्ष में पहुंचे। किसी कमरे में उन्होंने फाइलें देखीं, कहीं कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर डाली, तो कहीं सीधे कर्मचारियों से बातचीत की। उनका लहजा न कठोर था, न कोमल… बस साफ, सटीक और जिम्मेदारी का अहसास कराता हुआ। उन्हों एक कमरे से निकलते हुए बस इतना कहा… “दफ्तर जनता की सेवा का जरिया है, यहां लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”

गायब तीन अधिकारियों को शोकॉज

निरीक्षण के दौरान जब यह पता चला कि कुछ कर्मचारी बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित हैं, तो डीसी का चेहरा गम्भीर हो उठा। उन्होंने तुरंत नक्सल शाखा की प्रधान सहायक सुनीता चौधरी, उप निर्वाचन कार्यालय के हेल्प डेस्क मैनेजर साहिल कुमार और आदित्य कुमार झा के नाम लेते हुए कहा… “इन सभी पर शोकॉज जारी करें और एक दिन का वेतन काटें। यह सिर्फ कार्रवाई नहीं, चेतावनी है… जिम्मेदारी निभाइए।” उनकी यह बात कमरे में मौजूद सभी कर्मचारियों के लिए एक संदेश थी… कि अब रांची समाहरणालय में लापरवाही नहीं चलेगी।

बिना आईडी कार्ड वाले कर्मचारी भी नपे

निरीक्षण के दौरान कुछ कर्मचारी आईडी कार्ड और नेम प्लेट के बिना काम करते मिले। डीसी भजंत्री ने हल्के किन्तु सख्त लहजे में कहा… “पहचान के बिना काम करना प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके काम के पीछे कौन है।” डीसी ने ऐसे सभी कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया और कहा कि अब से हर कर्मचारी कार्यालय अवधि में पहचान पत्र पहनना अनिवार्य है।

छुट्टियों की भी जांच

डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने सिर्फ उपस्थित कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि छुट्टी पर रहने वालों की फाइलें भी देखीं। उन्होंने पूछा… “कितने लोगों ने छुट्टी के लिए आवेदन दिया है? और किसने इजाजत ली?” उनका मकसद साफ था… सिस्टम पारदर्शी और जवाबदेह बने।

स्वच्छता पर सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान कुछ कार्यालयों की दीवारों और फाइल अलमारियों पर धूल की परत दिखी। डीसी भजंत्री ने रुककर हौले से कहा… “साफ जगह पर साफ सोच पनपती है। प्रशासनिक जगहों पर स्वच्छता सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि एक संदेश है कि काम व्यवस्थित ढंग से हो रहा है।” उन्होंने सभी कार्यालय प्रधानों को नियमित सफाई, फाइल प्रबंधन और समयबद्ध कार्य निष्पादन सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

सन्नाटे में गूंजा अनुशासन का संदेश

जब निरीक्षण पूरा हुआ, तब समाहरणालय का माहौल पहले जैसा नहीं था। कर्मचारी अपनी कुर्सियों पर लौट चुके थे, लेकिन इस बार उनकी निगाहें फाइलों पर टिके रहने लगीं। कई कर्मचारियों ने आपस में कहा… “डीसी साहब का ये निरीक्षण आंखें खोल देने वाला था।
अब कोई भी जोखिम नहीं लेगा।”

एक दृढ़ प्रशासक की झलक

डीसी मंजूनाथ भजंत्री के इस निरीक्षण के बाद कुछ कर्मचारियों ने हौले से कहा कि ये साहब केवल दफ्तर में बैठकर आदेश देने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि मैदान में उतरकर व्यवस्था को देखने और सुधारने वाले प्रशासक हैं। उनकी मौजूदगी ने यह अहसास दिलाया कि प्रशासन तब ही मजबूत होता है जब उसकी नींव अनुशासन पर टिकी हो।

ये अधिकारी रहे मौजूद

इस मौके पर उप विकास आयुक्त सौरभ कुमार भुवनिया, एडीएम  एंड ऑर्डर राजेश्वर नाथ आलोक, सामान्य शाखा प्रभारी विवेक कुमार सुमन, जिला नजारत उपसमाहर्ता सुदेश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय और सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा रवि शंकर मिश्रा समेत कई अधिकारी साथ थे।

इसे भी पढ़ें : तूफान ‘मोंथा’ को लेकर RMC ने कसी कमर, एक्टिव किया 24X7 कंट्रोल रूम

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