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News Samvad : सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान में गिरावट होने लगती है। इस मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर को गर्म रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल की डॉ. सोनिया रावत बताती हैं कि इस प्रक्रिया से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी घट जाती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
कम फिजिकल एक्टिविटी से बिगड़ता है ब्लड शुगर
ठंड के मौसम में लोग बाहर निकलने से कतराते हैं और एक्सरसाइज भी कम कर देते हैं। कम शारीरिक गतिविधि के कारण शरीर में ग्लूकोज का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता। इसका सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है और डायबिटीज मरीजों को इसे नियंत्रित करने में दिक्कत होती है।
गलत खानपान और डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं खतरा
सर्दियों में लोग अधिकतर कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर फूड्स का सेवन करते हैं। ये फूड्स ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। इसके साथ ही ठंड में प्यास कम लगने के कारण पानी की मात्रा घट जाती है, जिससे डिहाइड्रेशन और शुगर असंतुलन की समस्या होती है। डॉक्टरों के अनुसार, गर्म लेकिन हेल्दी भोजन और पर्याप्त पानी का सेवन जरूरी है।
मानसिक तनाव और नींद की कमी भी नुकसानदायक
मौसम का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। तनाव, डिप्रेशन और नींद की कमी से ब्लड शुगर लेवल और अस्थिर हो सकता है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि योग, मेडिटेशन और स्ट्रेस मैनेजमेंट को अपनाकर डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
सर्दियों में डायबिटीज कंट्रोल का मंत्र
सर्दियों में डायबिटीज कंट्रोल भले मुश्किल लगे, लेकिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के साथ इसे आसानी से मैनेज किया जा सकता है। ठंड के मौसम में जागरूक रहना और अपने स्वास्थ्य की निगरानी करना सबसे जरूरी है।
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